जयपुर (अग्रगामी) आप माने या नही माने, लेकिन श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की मतदाता सूची के अनुसार आगामी 22 दिसम्बर को आयोजित संघ चुनावों में स्वर्ग से भी वोटर वोट देने के लिये आ सकते हैं! खरतरगच्छ संघ पर कब्जा जमाने के लिये संघ की मतदाता सूची में भारी धांधली की गई है। अग्रगामी संदेश के पास उपलब्ध मतदाता सूची में हुई धांधली की कुछ नजीरें हम यहां पेश कर रहे हैं।
नई मतदाता सूची की अनुक्रमणिका के क्रम संख्या-22 पर उल्लेखित पूरक सदस्यों की सूची (आजीवन) ही मतदाता सूची में गायब है!
वहीं नई मतदाता सूची के पृष्ठ संख्या-9 के क्रम संख्या-1696 पर अंकित श्री रतनचंद बुरड़ पुत्र स्वर्गीय मुन्नीलाल बुरड़ का देहान्त हुए लगभग तीन साल हो चुके हैं, लेकिन मतदाता सूची में उनका नाम यथावत चल रहा है। आखिर क्यों? क्या फर्जी मतदान के लिये!
नई मतदाता सूची के पृष्ठ संख्या-16 पर क्रम संख्या-329 में विनयचंद खवाड़ पुत्र उमरावमल का नाम दर्ज है। पता है, 602बी, लक्ष्मी छाया एल.टी.रोड़, बोरीवली (प.), मुंबई-92! संघ के विधान की धारा-5 (च) के तहत जयपुर से लगातार तीन साल बाहर रहने वाले संघ के सदस्य की सदस्यता समाप्त कर दी जाती है, लेकिन खवाड़ साहब की सदस्यता बरकरार है। इस मतदाता सूची में इस तरह के अन्य कई व्यक्तियों के नाम हैं, जो अर्से से जयपुर के बाहर रहते हैं और उनकी सदस्यता समाप्त हो जानी चाहिये, लेकिन वे मतदाता सूची में वैध मतदाता के रूप में दर्ज हैं! ताकि फर्जी वोट डाले जा सकें।
अब आगे चलें, मतदाता सूची के पृष्ठ संख्या-66 में अंकित क्रम संख्या-2005 पर श्रीमती नीरा पत्नी पदमचंद मुन्नीबोहरा (55) अंकित है। पदमचंद जी (59) का नाम भी इस ही पृष्ठ के क्रम संख्या-2004 पर अंकित है। अब आईये पृष्ठ संख्या-54 पर! इस पृष्ठ के क्रम संख्या-2005 पर श्रीमती मीरा पत्नी पदमचंद मुन्नीबोहरा (59) अंकित है और पदमचंद मुन्नीबोहरा (63) का नाम भी इस ही पेज में क्रम संख्या-2004 पर अंकित है। अर्थात पृष्ठ संख्या-54 और 66 पर एक ही क्रमांक से पदमचंद मुन्नीबोहरा और उनकी पत्नी नीरा बोहरा को दो बार दर्शाया गया है। पेज-54 पर तो नीरा जी को मीरा जी बताया गया है और दोनों पृष्ठों पर पदमचंद जी और नीरा जी की उम्र भी अलग-अलग दर्शाई गई है!
शर्मनाक स्थिति यह है कि जिन आजीवन सदस्यों को मतदान करने के लिये अयोग्य माना गया है, उनकी सूची भी इस वोटर लिस्ट में नहीं दर्शाई गई है। जोकि वैधानिक रूप से आवश्यक है। हम विस्तार से वोटर्स लिस्ट की हकीकत को अगले अंकों में उजागर कर श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों की करतूतों का खुलासा करेंगे।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के चुनावों की नौटंकी का जोरशोर से ढोल पीटा जा रहा है। पूंजीपतियों-सरमायेदारों की छत्रछाया में सेठों की बी टीम अब जोश खरोश के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है। संघ के पिछले चुनावों में टीम ए ने लगभग चुनावों का बहिष्कार कर खरतरगच्छ संघ में मतभेद के साथ-साथ मनभेद को भी उजागर किया था।
इस बार तो टीम ए गायब है और खरतरगच्छ संघ में मनभेद गहरे हो गये तथा श्रीमाल समुदाय ने श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ से दूरी बना ली! संघ के संविधान की धारा-5(1)(ग)के अनुसार स्थानकवासी, तेरापंथी व तपागच्छ संघ का सदस्य होने की स्थिति में संघ के सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जायेगी। लेकिन श्रीमाल एवं पोरवाल समुदाय को सदस्यता से वंचित नहीं रखा जा सकता है। बावजूद इसके अगर नई वोटर लिस्ट का अवलोकन करा जाये तो स्पष्ट हो जायेगा कि खरतरगच्छ संघ में इन दोनों समुदायों को दरकिनार किया गया है तथा इस स्थिति में संघ के सदस्यों में मतभेद के साथ-साथ मनभेद भी गहराता जा रहा है।
यह तो हुई बात खरतरगच्छ संघ के अंदर समुदायों के मनमुटाव की बात। लेकिन धन्ना सेठों की पिछलग्गू खरतरगच्छ संघ पर कब्जा जमाये बैठी टीम बी, जो पुन: संघ पर कब्जा जमाने की पूरी ताकत से जुगत बैठा रही है, उसने तो निहायत बेशर्मी के साथ नैतिकता को ही तिलांजली दे दी है। खरतरगच्छ संघ के वर्तमान अध्यक्ष माणकचंद गोलेछा, राजेन्द्र कुमार छाजेड़ ने पिछले संघ के चुनावों में चुनाव नहीं लड़ा था। लेकिन माणकचंद गोलेछा और राजेन्द्र कुमार छाजेड़ सहवरण के रास्ते अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बन गये। इनके अलावा जिन लोगों को सहवरण के रास्ते संघ कार्यकारिणी में लाया गया वह अत्यन्त खेदजनक है। क्योंकि संघ की कार्यकारिणी के लगभग साढ़े तीन साल के कार्यकाल में कार्यकारिणी के सहवरित सदस्यों ने किसी भी स्तर पर अपने दायीत्वों का निर्वहन नहीं किया।
हकीकत में खरतरगच्छ संघ पर कब्जा जमाने के लिये कुछ पूंजीपति, सेठिये, भू-माफिया, जमाखोर अपनी जीभ से लार टपटाते नजर आ रहे हैं, हम इन निकृष्ट पूंजीपतियों और उनके दुमछल्लों के बारे में विस्तार से आगे लिखेंगे ताकि खरतरगच्छ समुदाय के सामने हकीकत उजागर हो सके।
नई मतदाता सूची की अनुक्रमणिका के क्रम संख्या-22 पर उल्लेखित पूरक सदस्यों की सूची (आजीवन) ही मतदाता सूची में गायब है!
वहीं नई मतदाता सूची के पृष्ठ संख्या-9 के क्रम संख्या-1696 पर अंकित श्री रतनचंद बुरड़ पुत्र स्वर्गीय मुन्नीलाल बुरड़ का देहान्त हुए लगभग तीन साल हो चुके हैं, लेकिन मतदाता सूची में उनका नाम यथावत चल रहा है। आखिर क्यों? क्या फर्जी मतदान के लिये!
नई मतदाता सूची के पृष्ठ संख्या-16 पर क्रम संख्या-329 में विनयचंद खवाड़ पुत्र उमरावमल का नाम दर्ज है। पता है, 602बी, लक्ष्मी छाया एल.टी.रोड़, बोरीवली (प.), मुंबई-92! संघ के विधान की धारा-5 (च) के तहत जयपुर से लगातार तीन साल बाहर रहने वाले संघ के सदस्य की सदस्यता समाप्त कर दी जाती है, लेकिन खवाड़ साहब की सदस्यता बरकरार है। इस मतदाता सूची में इस तरह के अन्य कई व्यक्तियों के नाम हैं, जो अर्से से जयपुर के बाहर रहते हैं और उनकी सदस्यता समाप्त हो जानी चाहिये, लेकिन वे मतदाता सूची में वैध मतदाता के रूप में दर्ज हैं! ताकि फर्जी वोट डाले जा सकें।
अब आगे चलें, मतदाता सूची के पृष्ठ संख्या-66 में अंकित क्रम संख्या-2005 पर श्रीमती नीरा पत्नी पदमचंद मुन्नीबोहरा (55) अंकित है। पदमचंद जी (59) का नाम भी इस ही पृष्ठ के क्रम संख्या-2004 पर अंकित है। अब आईये पृष्ठ संख्या-54 पर! इस पृष्ठ के क्रम संख्या-2005 पर श्रीमती मीरा पत्नी पदमचंद मुन्नीबोहरा (59) अंकित है और पदमचंद मुन्नीबोहरा (63) का नाम भी इस ही पेज में क्रम संख्या-2004 पर अंकित है। अर्थात पृष्ठ संख्या-54 और 66 पर एक ही क्रमांक से पदमचंद मुन्नीबोहरा और उनकी पत्नी नीरा बोहरा को दो बार दर्शाया गया है। पेज-54 पर तो नीरा जी को मीरा जी बताया गया है और दोनों पृष्ठों पर पदमचंद जी और नीरा जी की उम्र भी अलग-अलग दर्शाई गई है!
शर्मनाक स्थिति यह है कि जिन आजीवन सदस्यों को मतदान करने के लिये अयोग्य माना गया है, उनकी सूची भी इस वोटर लिस्ट में नहीं दर्शाई गई है। जोकि वैधानिक रूप से आवश्यक है। हम विस्तार से वोटर्स लिस्ट की हकीकत को अगले अंकों में उजागर कर श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों की करतूतों का खुलासा करेंगे।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के चुनावों की नौटंकी का जोरशोर से ढोल पीटा जा रहा है। पूंजीपतियों-सरमायेदारों की छत्रछाया में सेठों की बी टीम अब जोश खरोश के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है। संघ के पिछले चुनावों में टीम ए ने लगभग चुनावों का बहिष्कार कर खरतरगच्छ संघ में मतभेद के साथ-साथ मनभेद को भी उजागर किया था।
इस बार तो टीम ए गायब है और खरतरगच्छ संघ में मनभेद गहरे हो गये तथा श्रीमाल समुदाय ने श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ से दूरी बना ली! संघ के संविधान की धारा-5(1)(ग)के अनुसार स्थानकवासी, तेरापंथी व तपागच्छ संघ का सदस्य होने की स्थिति में संघ के सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जायेगी। लेकिन श्रीमाल एवं पोरवाल समुदाय को सदस्यता से वंचित नहीं रखा जा सकता है। बावजूद इसके अगर नई वोटर लिस्ट का अवलोकन करा जाये तो स्पष्ट हो जायेगा कि खरतरगच्छ संघ में इन दोनों समुदायों को दरकिनार किया गया है तथा इस स्थिति में संघ के सदस्यों में मतभेद के साथ-साथ मनभेद भी गहराता जा रहा है।
यह तो हुई बात खरतरगच्छ संघ के अंदर समुदायों के मनमुटाव की बात। लेकिन धन्ना सेठों की पिछलग्गू खरतरगच्छ संघ पर कब्जा जमाये बैठी टीम बी, जो पुन: संघ पर कब्जा जमाने की पूरी ताकत से जुगत बैठा रही है, उसने तो निहायत बेशर्मी के साथ नैतिकता को ही तिलांजली दे दी है। खरतरगच्छ संघ के वर्तमान अध्यक्ष माणकचंद गोलेछा, राजेन्द्र कुमार छाजेड़ ने पिछले संघ के चुनावों में चुनाव नहीं लड़ा था। लेकिन माणकचंद गोलेछा और राजेन्द्र कुमार छाजेड़ सहवरण के रास्ते अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बन गये। इनके अलावा जिन लोगों को सहवरण के रास्ते संघ कार्यकारिणी में लाया गया वह अत्यन्त खेदजनक है। क्योंकि संघ की कार्यकारिणी के लगभग साढ़े तीन साल के कार्यकाल में कार्यकारिणी के सहवरित सदस्यों ने किसी भी स्तर पर अपने दायीत्वों का निर्वहन नहीं किया।
हकीकत में खरतरगच्छ संघ पर कब्जा जमाने के लिये कुछ पूंजीपति, सेठिये, भू-माफिया, जमाखोर अपनी जीभ से लार टपटाते नजर आ रहे हैं, हम इन निकृष्ट पूंजीपतियों और उनके दुमछल्लों के बारे में विस्तार से आगे लिखेंगे ताकि खरतरगच्छ समुदाय के सामने हकीकत उजागर हो सके।


