गत रविवार को राजस्थान में मतदान प्रक्रिया समाप्त हो जाने के बाद राज्य विधानसभा चुनावों में अपनी पूरी ताकत झौंकने में जुटे प्रत्याशी अब आगामी 8 दिसम्बर को मतगणना प्रक्रिया शुरू होने तक थोडा सुकुन लेने की स्थिति में हैं। राज्य में कांग्रेस अशोक गहलोत ओर सी.पी.जोशी की अगुआई में पुन: सत्ता में आने के लिये ऐडी-चोटी का जोर लगाती रही है वहीं वसुन्धरा राजे की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी ने भी सत्ता प्राप्ति के लिये पूरा दम-खम लगाया।
प्रचार के स्तर पर भी दोनों ही पार्टियों ने कोई कोर कसर नहीं छोडी। एक तरफ कांग्रेस की चुनाव प्रचार सामग्री में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, डॉ.मनमोहन सिंह, सी.पी.जोशी, अशोक गहलोत, डॉ.चंद्रभान नजर आये तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी और वसुन्धरा राजे को ही पार्टी नेतृत्व के रूप में दर्शाया!
डॉ.किरोड़ीलाल मीणा की अगुआई में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने भी अपना पूरा दम-खम दिखाया! एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पी.ए.संगमा सहित पार्टी के अन्य नेताओं का राजस्थान में कोई असर नहीं है। ऐसी स्थिति में पार्टी के सर्वे-सर्वा के रूप में सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने पार्टी के शीर्षस्थ नेतृत्व का रोल बखूबी निभाया। अब 8 दिसम्बर को आने वाले नतीजे पार्टी की जमीनी हकीकत बयां करेंगे।
उधर गंगानगर, हनुमानगढ़ और शेखावाटी की कुछ सीटों पर जमींदारा पार्टी भी जोर अजमाइश कर रही है और निश्चित रूप से कांग्रेस और भाजपा के वोटों पर प्रभाव डालेगी। इस पार्टी के उम्मीदवारों से भाजपा-कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचेगा यह भी 8 दिसम्बर को साफ हो जायेगा।
वाम जनवादी पार्टियां भी अपने वोट बैंक कें इजाफे की जद्दोजहद में जुटी रही! इनमें सीपीआईएम अपनी तीन सीटों को सुरक्षित रखने और ज्यादा से ज्यादा वोट बैंक जुटाने की जुगत में रही। सीपीआई भी अपने क्षेत्रों में वोट बैंक को कन्सोलीडेट करती नजर आई। फारवर्ड ब्लाक ने जमीनी हकीकत को देखते हुए इन चुनावों का, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में फायदा उठाने के रूप में उपयोग करने का प्रयास किया!
राजनैतिक पार्टियां हों या फिर निर्दलिय उम्मीदवार! सभी का यह प्रयास अपना दम-खम दिखाने का रहा! अब आगामी 8 दिसम्बर को इन नतीजों की हकीकत सामने आयेगी कि कौन कितने पानी में है?
प्रचार के स्तर पर भी दोनों ही पार्टियों ने कोई कोर कसर नहीं छोडी। एक तरफ कांग्रेस की चुनाव प्रचार सामग्री में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, डॉ.मनमोहन सिंह, सी.पी.जोशी, अशोक गहलोत, डॉ.चंद्रभान नजर आये तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी और वसुन्धरा राजे को ही पार्टी नेतृत्व के रूप में दर्शाया!
डॉ.किरोड़ीलाल मीणा की अगुआई में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने भी अपना पूरा दम-खम दिखाया! एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पी.ए.संगमा सहित पार्टी के अन्य नेताओं का राजस्थान में कोई असर नहीं है। ऐसी स्थिति में पार्टी के सर्वे-सर्वा के रूप में सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने पार्टी के शीर्षस्थ नेतृत्व का रोल बखूबी निभाया। अब 8 दिसम्बर को आने वाले नतीजे पार्टी की जमीनी हकीकत बयां करेंगे।
उधर गंगानगर, हनुमानगढ़ और शेखावाटी की कुछ सीटों पर जमींदारा पार्टी भी जोर अजमाइश कर रही है और निश्चित रूप से कांग्रेस और भाजपा के वोटों पर प्रभाव डालेगी। इस पार्टी के उम्मीदवारों से भाजपा-कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचेगा यह भी 8 दिसम्बर को साफ हो जायेगा।
वाम जनवादी पार्टियां भी अपने वोट बैंक कें इजाफे की जद्दोजहद में जुटी रही! इनमें सीपीआईएम अपनी तीन सीटों को सुरक्षित रखने और ज्यादा से ज्यादा वोट बैंक जुटाने की जुगत में रही। सीपीआई भी अपने क्षेत्रों में वोट बैंक को कन्सोलीडेट करती नजर आई। फारवर्ड ब्लाक ने जमीनी हकीकत को देखते हुए इन चुनावों का, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में फायदा उठाने के रूप में उपयोग करने का प्रयास किया!
राजनैतिक पार्टियां हों या फिर निर्दलिय उम्मीदवार! सभी का यह प्रयास अपना दम-खम दिखाने का रहा! अब आगामी 8 दिसम्बर को इन नतीजों की हकीकत सामने आयेगी कि कौन कितने पानी में है?


