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डायन गरीबी चुडैल अमीरी!-3

गत अंक में हमने डायन गरीबी और चुडैल अमीरी के दंश से पीडि़त एक जैन श्वेताम्बर परिवार से जुड़ी हकीकत बयां करने का क्रम शुरू किया था। इस बार पाठकों से एक सवाल के साथ हम उस क्रम को चालू रखेंगे। सवाल है कि अमीरी चुडैल के शिकंजे में जकड़ कर क्या हमें हमारी नैतिकता को तिलांजली दे देना चाहिये? मनन कीजिये हमारे सवाल पर!
हमने आपसे वादा किया था कि इस परिवार से जुड़े हर किरदार के बारे में हम विस्तार से समय आने पर खुलासा करेंगे। हम अपने वादे पर कायम हैं और बरडिया, वैद, पालावत, सकलेचा, भण्डारी, सुराणा हों या फिर मेहता, चाहे गोलेछा हों या फिर पारख, इन रिश्तों के घेरे में घिरे इस परिवार के एक-एक किरदार, जो डायन गरीबी और चुडैल अमीरी की चक्की में चक्करघनी होकर बेजा स्वार्थों की पूर्ति के लिये अपने ही परिवार को दोजख की आग में झोंकते रहे हैं उनकी हकीकत निश्चित रूप से हम परत-दर-परत उजागर करेंगे ही!
हम यह भी उजागर करेंगे कि कौन? पूंजीपति, सरमायेदार अपने निकृष्ट स्वार्थों की पूर्ति के लिये किस तरह एक परिवार में विघटन करने की घृणित करतूतों को कितनी बेशर्मी से अंजाम देते हैं! क्योंकि यह मसला एक परिवार के साथ-साथ सामाजिक संगठन में निकृष्टता की हदें पार कर बैठे पदाधिकारियों ओर उनके आकाओं की करतूतों से भी जुड़ा है।
यह सवाल भी उठता है कि आखीर क्यों हम इस परिवार की शर्मनाक दांस्ता को उजागर करने की ठान बैठे हैं! बैराठी जी हों या भंसाली जी या फिर हों गोलेछा जी, सभी (अब स्वर्गीय) ने इस परिवार के, चुडैल अमीरी के शिकंजे में जकड़े किरदारों और उनके माता-पिता को समझाया था कि जो गैर जुम्मेदारान करतूतें आप लोग सिर्फ और सिर्फ जायदाद और धन प्राप्ति की लिप्सा के लिये कर रहे हो वह अनुचित है और आगे चल कर इस परिवार को तुम लोगों की करतूतों का खमियाजा भुगतना होगा! लेकिन उनकी कड़ी चेतावनी के बाद भी इन्होंने चुडैल अमीरी के घेरे में रह कर इन्सानियत को तार-तार करने में कोर कसर नहीं छोड़ी।
हमने एक परिवार में घुसी चुडैल अमीरी और डायन गरीबी की हकीकत को उजागर करने का प्रयास शुरू किया है उसके बाद चुडैल अमीरी और गरीबी डायन से पीडि़त अन्य परिवारों की पीड़ा भी हम तक पहुंचने लगी है। जो साफ-साफ दर्शाते हैं कि चुडैल अमीरी के शिकंजे में जकडे लोग कितनी निकृष्टता से जैन संस्कृति के स्थापित सिद्धांतों और इंसानियत को ठोकर मार कर करोड़पति बनने की जुगत बैठा रहे हैं। अब अगर पीडि़तों के आंसुओं के साथ बापू की आंख में आंसू आये तो आश्चर्य कैसा? क्रमश:

 
AGRAGAMI SANDESH

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