पिछली बार डायन गरीबी और चुडैल अमीरी में हमने अपने जमाने के एक करोड़पति परिवार की दास्तां की शुरूआत की थी कि किस तरह इस करोड़पति सेठ की जायदाद को उनके लड़कों ने अपनी गलत आदतों और बुरी सोहबत के चलते उड़ा दिया और उन दोनों लड़कों के परिवारों को डायन गरीबी ने अपने शिकंजे में जकड़ लिया। छोटे भाई के परिवार की छह संतानों में से एक ने संघर्ष कर परिवार को छत का आसरा देने वाले मकान को दो बार कर्जदारों के शिकंजे से बचाया और अपने पुरखों की विरासत को बचाने के लिये खुद के पविार को कुर्बान करने में भी नहीं हिचका! लेकिन बेईमानी, मक्कारी, हवाला जैसी करतूतों में लिप्त चुडैल अमीरी के शिकंजे में जकड़े और समाज के पूंजीपतियों की जी हुजूरी, दलाली करने और समाज की ही सम्पत्ति पर कब्जा कर बेशर्मी से अपने आप को पूंजीपतियों का दलाल आरोपति करने वाले एक भाई ने अपनी निकृष्ट भूख को शांत करने के लिये पूरे परिवार को तितर-बितर कर दिया। वह पूरी ताकत इस बात में लगा रहा है कि किसी भी हालत में इस मकान को कब्जे में ले कर यहां एक आलीशान कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बना सके। ये बेशर्म भाई सारे रिश्ते-नातों को तिलांजलि देकर पहिले ही परिवार के एक मकान पर कब्जा जमा कर उसे भी कॉमर्शियल काम्प्लेक्स का स्वरूप देने की जुगत बैठा रहा है ताकि अपने ही परिवार को उजाड़ कर खुद करोड़पति बन सके।
हालात यहां तक बिगडे कि एक विकलांग भाई ने तो इस परिवार से हर तरह से नाते रिश्ते तोड़ लिये और लगभग 25 सालों से अपने परिजनों से बेगाना हो कर इस ही शहर में रह रहा है। यहां तक कि वह अपने मां-बाप, रिश्ते के भाई-बहनों के दाहसंस्कार में भी शामिल नहीं हुआ। लेकिन अमीरी डायन के चुंगल में फंसे सबसे बड़े भाई को इतनी भी शर्म नहीं आई कि वह अपने परिवार के बुजुर्ग के नाते अपने परिवार को एकता के सूत्र में पिरोने के लिये कुछ अहम भूमिका निभाये! निभाये तो कैसे और क्यों? सौतेला जो ठहरा! साथ ही चुडैल अमीरी की परछायी में जी जो रहा हैं। हम इस परिवार और इस कहानी के किरदारों का खुलासा समय आने पर विस्तार से करेंगे कि किस तरह ये किरदार अपने ही परिवार को गरीबी डायन और अमीरी चुडैल के शिकंजे में फंसा कर अपने ही परिवार और परिजनों को बर्बाद करने की मुहिम में जुटे हैं।
हमने एक परिवार में घुसी अमीरी चुडैल और गरीबी डायन की हकीकत को उजागर करने का प्रयास किया है। देश में आज अमीरी चुडैल और डायन गरीबी के चंगुल में करोड़ों परिवार अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं। भ्रष्टाचार और अनाचार का सहारा लेकर गरीबी डायन के चंगुल से निकल कर अमीरी चुडैल के शिकंजे में जकड़े राजनेता और नौकरशाह पीडि़त-शोषित वर्ग के दुख-दर्दों को शायद पूरी तरह भूल गये हैं और यह वर्ग आंसुओं के समुंदर में हिचकोले ले रहा है। इस वर्ग के आंसुओं की धारा को देख कर क्या बापू की आंखों में आंसू नहीं आते? हां! अगर आज बापू हमारे बीच होते तो उनके प्राण भी रोते! क्योंकि गरीबों के प्राण ही तो बापू के प्राण हैं। -क्रमश:
हालात यहां तक बिगडे कि एक विकलांग भाई ने तो इस परिवार से हर तरह से नाते रिश्ते तोड़ लिये और लगभग 25 सालों से अपने परिजनों से बेगाना हो कर इस ही शहर में रह रहा है। यहां तक कि वह अपने मां-बाप, रिश्ते के भाई-बहनों के दाहसंस्कार में भी शामिल नहीं हुआ। लेकिन अमीरी डायन के चुंगल में फंसे सबसे बड़े भाई को इतनी भी शर्म नहीं आई कि वह अपने परिवार के बुजुर्ग के नाते अपने परिवार को एकता के सूत्र में पिरोने के लिये कुछ अहम भूमिका निभाये! निभाये तो कैसे और क्यों? सौतेला जो ठहरा! साथ ही चुडैल अमीरी की परछायी में जी जो रहा हैं। हम इस परिवार और इस कहानी के किरदारों का खुलासा समय आने पर विस्तार से करेंगे कि किस तरह ये किरदार अपने ही परिवार को गरीबी डायन और अमीरी चुडैल के शिकंजे में फंसा कर अपने ही परिवार और परिजनों को बर्बाद करने की मुहिम में जुटे हैं।
हमने एक परिवार में घुसी अमीरी चुडैल और गरीबी डायन की हकीकत को उजागर करने का प्रयास किया है। देश में आज अमीरी चुडैल और डायन गरीबी के चंगुल में करोड़ों परिवार अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं। भ्रष्टाचार और अनाचार का सहारा लेकर गरीबी डायन के चंगुल से निकल कर अमीरी चुडैल के शिकंजे में जकड़े राजनेता और नौकरशाह पीडि़त-शोषित वर्ग के दुख-दर्दों को शायद पूरी तरह भूल गये हैं और यह वर्ग आंसुओं के समुंदर में हिचकोले ले रहा है। इस वर्ग के आंसुओं की धारा को देख कर क्या बापू की आंखों में आंसू नहीं आते? हां! अगर आज बापू हमारे बीच होते तो उनके प्राण भी रोते! क्योंकि गरीबों के प्राण ही तो बापू के प्राण हैं। -क्रमश:


