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राजनेता-अफसर और पूंजीपति तीन महिने प्याज नहीं खाने की लें शपथ!

नई दिल्ली/जयपुर (अग्रगामी) ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी कामरेड हीराचंद जैन ने देश की सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं, सत्ताधीशों, हुक्कामों, मीडिया ताइकूनों और मासिक पचार हजार रूपये से ज्यादा आय वाले देश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अगले तीन महिने प्याज नहीं खाने की शपथ लें। अगर देश का उच्च एवं उच्च मध्यम वर्ग अगले तीन महिने प्याज नहीं खाने की शपथ लेता है और सरकार प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगा देती है तो प्याज के दाम औंधे मुंह जमीन पर आ पडेगें।
फारवर्ड ब्लाक स्टेट जनरल सेक्रेटरी कामरेड हीराचंद जैन ने साफ-साफ आरोप लगाया है कि प्याज की कीमतों में उछाला भाजपा और शरद पंवार की सियासी चाल के चलते आया है। भाजपा और एनसीपी से जुड़े बड़े व्यवसायी गैर कानूनी तरीके से प्याज, चांवल, चीनी और गेंहूं की जमाखोरी कर कालाबाजारी कर रहे हैं। निर्यात करने वाले व्यवसाई भी भारी मात्रा में इन जिंसों का निर्यात कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। इन मोटे मुनाफाखोरों की कमाई का एक हिस्सा इन राजनैतिक पार्टियों को राजनैतिक चंदे के रूप में भी पहुंच रहा है। कामरेड हीराचंद जैन ने देश के इलेक्ट्रोनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया द्वारा प्याज के मुद्दे पर किये जा रहे शोरशराबे को नकारात्मक प्रचार की संज्ञा देते हुए उनसे सवाल किया है कि प्याज की बढ़ती कीमतों पर हायतौबा मचाने के साथ-साथ वे राजनेताओं, पूंजीपतियों, सत्ताधीशों और सरकारी अफसरों तथा उनके परिवारों द्वारा अगले तीन महिने प्याज नहीं खाने की शपथ का मुद्दा क्यों नहीं उठाते हैं?
फारवर्ड ब्लाक के स्टेट जनरल सेक्रेटरी कामरेड हीराचंद जैन ने पूंजीपतियों की एक अन्य शर्मनाक हरकत का भी खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि प्याज के अलावा हरी मिर्च और नींबू गरीब के साथ-साथ मरीजों के उपचार में भी उपयोग में लाया जाता है।
लेकिन शर्मनाक स्थिति यह है कि पूंजीपति वर्ग अपनी दौलत को नजर लगने से बचाने के लिये अपने दफ्तरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के दरवाजों पर नींबू मिर्च टांकता हैं ताकि उसे और उनकी सम्पत्ति को किसी की नजर नहीं लगे! उन्हें और उनकी सम्पत्ति को नजर लगे या नहीं लगे, लेकिन गरीबों की थाली पर तो अमीरों की नजर लग ही गई है और सब्जी मार्केट में नींबू-मिर्च के भाव भी सातवें आसमान पर पहुंचते जा रहे हैं। लेकिन जमाखोरों-भ्रष्ट राजनेताओं और नौकरशाहों को शर्म ही नहीं आती है कि वे नींबू-मिर्च के व्यवसायिक दुरूपयोग और प्याज सहित अन्य खाद्य पदार्थों-जिंसों की जमाखारी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिये कार्यवाही करें। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सहित लगभग सभी राष्ट्रीय पार्टियां अवाम के दु:ख दर्दों को नजरन्दाज कर जमाखोरों-कालाबाजारियों से चुनावी चंदा बटोरने में जुटी है।

 
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