अग्रगामी संदेश हिन्‍दी साप्ताहिक ***** प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित एवं प्रसारित ***** सटीक राजनैतिक विश्लेषण, लोकहित के समाचार, जनसंघर्ष का प्रहरी

जनता की तकलीफों को भूलने वाले राजनेताओं पर वोट का हथौड़ा तो अवाम ही चलायेगा!

जयपुर (अग्रगामी) देश के दो बड़े राजनैतिक दलों कांग्रेस और भाजपा के शीर्ष नेता अवाम के दु:खदर्दों को दरकिनार कर अपनी-अपनी डफली और अपना-अपना राग अलापने में जुटे हैं। देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, मंहगाई के नाग, बेरोजगारी की फांसी, बलात्कारों और अत्याचारों के दुश्चक्र से निजात दिलाने हेतु उनके पास न तो कोई सोच है और न ही कार्यक्रम!
एक कहता है कि मेरी दादी को मार दिया गया, मेरे पापा को मार दिया गया और अब मुझे मार दिया जायेगा! अगर मरने का इतना ही डर है, तो फिर क्यों नेतागिरी के रास्ते पर चलते हो महामना! उधर देश का प्रधानमंत्री पद हथियाने का सपना संजोये एक राज्य के मुख्यमंत्री जोरशोर से शहजादे पर तोपदडा बरसाने में लगे हैं। उन्हें शायद यह जानकारी सोशल मीडिया के जरिये दिलानी होगी कि हुजूर! आपने सवा सौ करोड़ से ज्यादा अवाम वाले भारत गणतंत्र का प्रधानमंत्री बनने का तिलस्मी सपना संजोया है और आप के लिये यह जरूरी है कि देश के सवा सौ करोड़ अवाम के दु:खदर्दों पर कुछ शब्द बोले! उनको मंहगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, बलात्कार सहित अन्य अत्याचारों से राहत दिलाने के लिये आपके पास क्या योजना है, उसका खुलासा करें! क्यों इन मुद्दों पर आपकी जबान तालू से चिपकी है? क्या शहजादे के पीछे तोपदडा लेकर पडऩे भर से आप सीधे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर टपक पडेंगे!
राजस्थान को ही लें। राज्य की कानून और व्यवस्था की स्थिति नाजुक है। राज्य के पुलिस बल का मनोबल टूट चुका है, वहीं राजनेताओं की दखलंदाजी के चलते पुलिस प्रशासन में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद चरम पर है। राज्य के पुलिस बेडे के मुखिया को मुख्यमंत्री हिला भी नहीं पाये, क्योंकि वे केंद्र की डॉ.मनमोहन सिंह सरकार में असरदार मंत्री पद पर विराजे मंत्री जी के भाई जो हैं!
दबे कुचलों पर अत्याचारों की लगभग बाढ़ सी आ गई है। भ्रष्टाचार में पूरा प्रशासन गले तक डूब चुका है। बलात्कारों, डकैती, हत्याओं का अम्बार लगता ही जा रहा है। भू-माफियाओं, जमाखोरों-कालाबाजारियों की पो-बारह-पच्चीस हो रही है! लेकिन शीर्ष की ये दोनों पार्टियां सत्तामद और सत्ता प्राप्ति की दौड़ में जुटी अवाम के इन दु:खदर्दों से किनारा कर रही है। इनके जहन में ठूंस-ठूंस कर यह भरा है कि अगर हमने अवाम के दु:खदर्दों पर जबान खोली तो वोटों की जरूरत के लिये नोटों का इन्तजाम करने में उन्हें पापड़ बेलने पडेंगे। क्योंकि अधिकांश चंदा तो उन्हें भू-माफियाओं, कालाबाजारियों, जमाखोरों, भ्रष्टाचारियों और अन्य काले धंधे करने वालों से ही मिलता है और यही कालाधन लुटा कर वे चुनावी वैतरणी पार करते आये हैं और आगे भी इन्ही का आसरा रहेगा! इसलिये जनता की पीड़ा, उनके दु:खदर्दों को नजरन्दाज करना इन राजनेताओं की फिदरत बन गया है।
उदयपुर में पिछले दिनों नरेन्द्र मोदी की जनसभा और इससे पहिले राहुल गांधी की सभा और इनके अलावा इन दोनों की जयपुर, चूरू और खेड़ली की जनसभा इनके और इनकी सभा के मैनेजरों के दिमागी दिवालियेपन को उजागर करते हैं। लेकिन अवाम मौन बैठा इनका तमाशा देख रहा है, क्योंकि वह जानता है कि वोट रूपी हथौडा तो उसे ही इस्तेमाल करना है।

 
AGRAGAMI SANDESH

AGRAGAMI SANDESH
AGEAGAMI SANDESH

मुख्‍य पृष्‍ठ | जयपुर संस्‍करण | राज्‍य समाचार | देश समाचार | विज्ञापन दर | सम्‍पर्क