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भू-माफियाओं और बिल्डरों के काले धंधे को अंकुशित करवाये चुनाव आयोग!

चुनाव आयोग द्वारा राजस्थान में विधानसभा चुनावों की तिथियां घोषित की जा चुकी है। चुनावों की तारीख की घोषणा के साथ ही राज्य में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा प्रदेश में प्रकाशित और वितरित समाचार पत्रों में पेड न्यूज प्रकाशित होने के मामले में कडी नजर रखी जा रही है। यह पहला मौका है कि समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाली पेड न्यूज पर चुनाव आयोग की कडी नजर है। हम चुनाव आयोग की इस पहल का तहेदिल से स्वागत करते हैं।
लेकिन हम चुनाव आयोग, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, रानैतिक दलों और उनके नेताओं से एक सीधा और स्पष्ट सवाल पूछना चाहते हैं कि पूरे प्रदेश और खास कर प्रदेश की राजधानी जयपुर में बिना वैधानिक इजाजत तामीर के जो अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स, अवैध कॉमर्शियल निर्माण तथा सरकारी जमीन पर धडल्ले से जो अतिक्रमण राजनेताओं और सरकारी हुक्कामों की शह पर चुनाव आचार सहिंता लागू होने के बाद किये जाने शुरू हो गये हैं और किये जा रहे हैं, उन पर क्यों सक्षम कार्यवाही नहीं की जा रही है?
पेड न्यूज पर राजस्थान के अवाम और चुनाव आयोग की सख्त नजर होती है और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही भी होती है! लेकिन राजनेताओं और सरकारी हुक्कामों की शह से चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान सरकारी जमीन पर गैर कानूनी तरीके से अतिक्रमण कर अवैध निर्माण करने या फिर बिना इजाजत कानूनों की धज्जियां उडा कर अवैध कॉमर्शियल कामप्लेक्स बनाने वालों पर कार्यवाही नहीं होने के कारण राज्य में खास कर राजस्थान की जयपुर में बिना इजाजत तामीर भारी संख्या में अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों और अवैध कॉमर्शियल निर्माणों का काम धडल्ले से जारी है और ये अवैध गैर कानूनी निर्माण उन हुक्कामों की शह पर हो रहा है जिन्हें इनको रोकने के लिये तैनात किया गया है।
इन अवैध निर्माणों के लिये नजराने के रूप में वसूले जा रहे कालेधन का भारी मात्रा में प्रवाह चुनावों में खड़े होने वाले उम्मीदवारों और राजनैतिक पार्टियों के पास हो रहा है। यह पैसा राजनैतिक पार्टियां और चुनावों में खडे होने वाले उम्मीदवारों के पास पहुंचने के बाद भी काला या दो नम्बर का ही रहता है और राजनैतिक पार्टियां राजनेता और उम्मीदवार इस का लेखा-जोखा अपने-अपने बही खाते में नहीं करते हैं।
चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त विभिन्न ऐजेंसियों की नजर से भी भू-माफिया और अवैध निर्माण करने वाले बिल्डर सरकारी हुक्कामों की मेहरबानी से बचे रहते हैं क्योंकि उन्हें मोटा नजराना जो पहुंचाते हैं ये भू-माफिया और बिल्डर!
होना यह चाहिये कि चुनावों की घोषणा के बाद चुनावों के सम्पन्न होने तक प्रदेश में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और बिना इजाजत तामीर अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण पर सख्ती से कार्यवाही हो और इस धंधे के जरिये चुनावों में लगाये जाने वाले कालेधन को अंकुशित किया जाये। पेड न्यूज पर अंकुश की आड़ में समाचार पत्रों खास कर छोटे समाचार पत्रों को अंकुशित करने के साथ ही चुनाव आयोग को चाहिये कि बिल्डरों-भूमाफियाओं के इस काले धंधे को भी अंकुशित किया जाये।

 
AGRAGAMI SANDESH

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