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प्रस्थान कीजिये मुनिवर!

श्वेताम्बर जैन एकता का पाखण्डपूर्ण प्रलाप कुछ अवसरवादी जैन पिछले तीन महिनों से कर रहे हैं! मुनि तरूण सागर ने पूंजीपतियों के आर्थिक सहयोग से बने अपने प्रवचन पण्डाल में साफ माना था कि श्वेताम्बर मुनि वस्त्र त्याग नहीं सकते हैं और मैं स्वंय वस्त्र पहिन नहीं सकता। ऐसे में एकता का राग अलापना बेमानी है।
रविवार को मुनि चंद्रप्रभ सागर मूर्धन्य विद्वान विनय सागर के जन्म दिवस अवसर पर उनके सम्मान और उनकी पुस्तक विमोचन हेतु आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार में शिक्षामंत्री बृजकिशोर शर्मा भी सम्मिलित हुए।
उधर मुनि तरूण सागर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के स्थापना दिवस पर आदर्श नगर के सूरज मैदान में आरएसएस के विजयदशमी उत्सव में शामिल हुए, जहां अस्त्रशस्त्र का पूजन और घोष एवं दण्ड के प्रदर्शन हुए। उधर मुनि ललितप्रभ सागर टौंक रोड़ स्थित एवरेस्ट कॉलोनी में प्रवचन देने पहुंचे।
आखीर यह सब माजरा क्या है? श्वेताम्बर और दिगम्बर एकता का जाप करने वाले ये मुनित्रय मात्र दो महिनों में ही अपने एकता के पाखण्ड से कन्नी काट कर आरएसएस और कांग्रेस के खेमों की ओर पलायन के लिये क्यों लालायित हो गये?
लगता है कि मुनित्रय को लोभ और माया ने गहराई से जकड़ लिया है! इन्हें न तो जैन समुदाय की तरक्की से लेना देना है और न ही समाज की एकजुटता से। इन्हें अपने अहंकार और स्वार्थों की पूर्ति से ज्यादा एक कदम भी आगे नहीं चलना है। इनकी हरकतों से तो जैन समुदाय में विघटन के रास्ते खुल रहे हैं। पूंजीपतियों की दौलत के बूते पर श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता का पाखण्ड रच कर इन्होंने श्वेताम्बर और दिगम्बर दोनों ही समुदायों में अंदरूनी विघटन को बढ़ाया है।
उचित यही होगा कि मुनित्रय चातुर्मास समाप्ति पर यहां से प्रस्थान करलें, ताकि जैन समुदाय का राजनैतिक शोषण न हो सके।

 
AGRAGAMI SANDESH

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