अग्रगामी संदेश हिन्‍दी साप्ताहिक ***** प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित एवं प्रसारित ***** सटीक राजनैतिक विश्लेषण, लोकहित के समाचार, जनसंघर्ष का प्रहरी

नगर निगम में हुक्कामों और कारिंदों के लिये आदेश-निर्देश, कानून, आचार संहिता सब ठेंगे से!

जयपुर (अग्रगामी) राजस्थान विधानसभा चुनावों की आचार संहिता लागू हो जाने के बाद अब जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में गैर कानूनी अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों और अवैध कॉमर्शियल निर्माणों का काम जोरशोर से शुरू हो गया है। यही नहीं कुछ अवैध निर्माण जो अटके पड़े थे उनका काम भी तेज गति लेता जा रहा है।
जयपुर नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव की अगुआई में नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम, विद्याधर नगर जोन और हवामहल जोन पूर्व में तो चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ा कर गैर कानूनी अवैध निर्माणों की मानों बाढ़ सी आ गई है।
गत शुक्रवार को नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह अपने लाव लश्कर के साथ निकले थे गश्त पर कुछ चुनिंदा अवैध निर्माणों और अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों को देखने के लिये। हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त ने क्या देखा यह तो अब उनके द्वारा की जाने वाली कार्यवाही से ही पता चलेगा कि मामला तालमेल से सुलटने की स्थिति में रहा या फिर कार्यवाही करने का! लेकिन हम नगर निगम के आयुक्त हवामहल जोन पूर्व के इलाके के अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों और अवैध कॉमर्शियल निर्माणों की बानगी यहां दे रहे हैं।
जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में चौकडी घाटगेट के पुरानी कोतवाली का रास्ता में मनीराम कोठी के रास्ते के क्रासिंग पर स्थित भवन म्युनिसिपल संख्या 4255 में बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्पलेक्स के बारे में जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ कारिंदों इंजीनियरों, गजधर, सर्वेयर सहित रेकार्ड कीपर तक को पूरी जानकारी होते हुए कार्यवाही नहीं होने के पीछे क्या राज है!
इस भवन म्युनिसिपल संख्या 4255 में अवैध रूप से जोन आयुक्त और उनके अधीनस्थ कारिंदों की रहनुमाई में वाटर हार्वेस्टिंग की आड़ में बोरिंग खोद लिया गया। लेकिन भवन मालिक के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। जोन आयुक्त, इंजीनियर, गजधर और सर्वेयर इस तरह चुप्पी साध कर बैठ गये जैसे हाथ में चूडियां पहन रखी हो और दिमाग सन्नीपात में जकड़ा हो!
इस भवन को इजाजत तामीर देने के पहिले भवन उपविभाजन/कंसोलीडेशन शुल्क जमा होना था, लेकिन भवन मालिक ने जोन आयुक्त और उनके अधीनस्थ कारिंदों से सांठगांठ कर उक्त शुल्क जमा नहीं करवाया और नगर निगम को लगभग पाच लाख रूपये से ज्यादा का चूना लगा दिया। यही नहीं भवन मलिक ने लगभग 65 वर्गफुट सरकारी जमीन को भी दबाया है, लेकिन साहब मौन हैं और साहब के कारिंदे भवन निर्माण ठेकेदार पर दबाव बना रहे हैं कि आचार संहिता लागू रहते हुए इस कॉमर्शियल काम्प्लेक्स की पहिली मंजिल की छत डाल दो ताकि तोडफ़ोड़ की कार्यवाही से बचा जा सके।
यही नहीं इस भवन से सम्बन्धित सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई सूचनाओं के आवेदन पत्र को भी जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ कुछ कारिंदों के इशारे पर दफ्तर में इधर से उधर घुमाया जा रहा है। इस भवन के निर्माण स्वीकृति से सम्बन्धित फाइल रेकार्ड कीपर जाहिद अली सिद्दकी सहित कुछ लोगों ने इधर-उधर कर दी है। ताकि इस भवन की पहली मंजिल की छत नगर निगम हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ कारिंदों के सानिध्य में डाल दी जाये।
आयुक्त इंद्रजीत सिंह तहसीलदार सेवा से पदोन्नति पर आरएएस बने हैं और उनकी बतौर आरएएस पहली पोस्टिंग नगर (भरतपुर) रही और उसके तत्काल बाद उन्हें आयुक्त जयपुर नगर निगम लगाया गया है। अत: साफ है कि इंद्रजीत सिंह भूमि रूपान्तरण, उपविभाजन/कंसोलीडेशन से सम्बन्धित कार्यों की पूरी जानकारी रखते हैं, लेकिन कार्यवाही करने में क्यों फिसड्डी हैं? यह तो वे ही बतायें!
वैसे अग्रगामी संदेश को सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे प्रकरण में अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माताओं ओर नगर निगम के अफसरों और कारिंदों के बीच 19 लाख रूपये के बंटवारे की जोरदार चर्चा है। सूत्र बताते हैं कि समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों और नगर निगम में बैठे कारिंदों को इस बंटवारे में हिस्सेदार भी बनाया गया है ताकि इस भवन के निर्माण के मामले में शिकायतकार्ताओं को दादागिरी और गुण्डागर्दी जैसे तरीके अपनाकर नगर निगम के अफसर इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स का निर्माण करा सकें।
नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के अफसरों ओर कारिंदों की दूसरी करतूत का जायजा भी ले लिया जाये। जोन के चौकडी घाटगेट में ही कुंदीगर भैंरू के रास्ते में स्थित भवन म्युनिसिपल संख्या 3873 में किये जा रहे अवैध कॉमर्शियल निर्माण को जोन आयुक्त, भवन शाखा के इंजीनियर और कारिंदों, रेकार्ड शाखा के कारिंदों की मिलीभगत से अंजाम दिया जा रहा है। इस भवन म्युनिसिपल संख्या 3873 में हो रहे अवैध निर्माण के लिये जयपुर नगर निगम ने किसी भी स्तर पर कोई इजाजत तामीर नहीं दी है। सूत्र बताते हैं कि अवैध निर्माणकर्ता ने केस कम्पाउण्ड करने के लिये फाइल हवामहल जोन पूर्व में लगाई है। लेकिन जब स्पष्ट स्थाई आदेश हैं कि जयपुर के चार दिवारी क्षेत्र में भवन निर्माण के किसी भी मामले में केस कम्पाउण्ड नहीं हो सकता है और इसके लिये राजस्थान राजपत्र विशेषांक दिनांक 01 फरवरी, 2013 में अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। ऐसी स्थिति में नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में बैठे भ्रष्ट और बेईमान हुक्काम और उनके कारिंदे क्यों और कैसे राग अलाप रहे हैं कि प्रकरण केस कम्पाउण्ड का है! जब किसी भी हालत में केस कम्पाउण्ड होने की स्थिति ही नहीं है तो फिर आयुक्त इंद्रजीत सिंह और इनके अधीनस्थ कारिंदे क्यों राज्य के नगरीय विकास, अवास एवं स्वायत्त शासन विभाग के परिपत्र क्रमांक प.10 (54) नविवि/3/2005 पार्ट दिनांक 13 जून, 2012 एवं इससे पूर्ववर्ती समसंख्यांक पत्र दिनांक 25 फरवरी, 2009, समसंख्यांक 16 अप्रेल, 2010, 25 फरवरी, 2011 व 6 जून, 2011 तथा नगर पालिका अधिनियम 1958 की धारा 194 एवं 245 की पूरी तरह अवहेलना कर अवैध निर्माण को रोकने में अपनी नाकामी दिखा रहे हैं? जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ कारिंदे इस अवैध निर्माण का मौका मुआयना गत 18 अक्टूबर को कर चुके हैं, लेकिन इस अवैध निर्माण को तुड़वाने या सीज करने में गुरेज कर रहे हैं, आखीर क्यों? कितना लेन देने हुआ, किसको कितना नजराना मिला है, बतायें अपने कारिंदों से पूछ कर आयुक्त इंद्रजीत सिंह!
अब आगे जायजा ले अवाम, जयपुर नगर निगम में बैठे भ्रष्टाचारियों की, नगर निगम के हवामहल जोन के चौकडी घाटगेट क्षेत्र के ही मोतीसिंह भौमियों के रास्ते और मनीराम की कोठी के रास्ते में शिवजीराम भवन के सामने धार्मिक स्थल में अवैध रूप से बने कॉमर्शियल निर्माण करवाने की करतूत का। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि धार्मिक स्थल पर अवैध रूप से कॉमर्शियल निर्माण नहीं किये जा सकते हैं। लेकिन भवन म्युनिसिपल संख्या 3834-35 में धार्मिक स्थल पर नगर निगम से बिना निर्माण स्वीकृति (बिना इजाजत तामीर) कुछ लोगों ने हवामहल जोन पूर्व की भवन शाखा के कारिंदों के साथ मिल कर दुकानें बना डाली। शिकायतें हुई, लेकिन जोन के भ्रष्ट और बेईमान अफसरों और कारिंदों द्वारा सांठगांठ कर मामले को दबाया जा रहा है! शर्मनाक स्थिति यह है कि इस प्रकरण से सम्बन्धित फाइलें लापता बताई जा रही है। सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई सूचना से यह हकीकत उजागर हुई है। याने कि गैर कानूनी काम को अंजाम देने में सहयोग के लिये जोन से फाइलें ही गायब कर दो! इस अवैध निर्माण का जायजा भी आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने गत शुक्रवार को ही लिया था।
कुंदीगर भैरों के रास्ते में ही स्थित भवन म्युनिसिपल संख्या 4009 से 4011 में किये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माण का जायजा भी आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने गत शुक्रवार को ही लिया। अब वे ही बता सकते हैं कि इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सा में उन्हें क्या नजर आया?
हवामहल जोन पूर्व के चौकडी घाटगेट में ही पुरानी कोतवाली का रास्ता में भवन म्युनिसिपल संख्या 4269 में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के साथ-साथ अब चुनाव आचार संहिता की आड़ में चारों तरफ से बंद कर तहखाना खोदने की कार्यवाही भी जारी है। जयपुर नगर निगम के कारिंदों की जानकारी में होते हुए भी नगर निगम का अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा है!
हल्दियों के रास्ते में भवन म्युनिसिपल संख्या 2135-36, लूणावत मार्केट तथा भवन म्युनिसिपल संख्या 2494 मारूजी का चौक में भी अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स तैयार हो गये हैं। क्योंकि जयपुर नगर निगम के अफसरों और कारिंदों के लिये कानून, आचार संहिता, आदेश-निर्देश सब उनके ठेंगे से!
अन्य अवैध निर्माणों पर विस्तार से जानकारी अगले अंकों में।

 
AGRAGAMI SANDESH

AGRAGAMI SANDESH
AGEAGAMI SANDESH

मुख्‍य पृष्‍ठ | जयपुर संस्‍करण | राज्‍य समाचार | देश समाचार | विज्ञापन दर | सम्‍पर्क