भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा आरोप लगाये जाने के बाद मुख्य सचिव सी.के.मैथ्यू ने राजस्थान विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने तक छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। हालांकि राजस्थान के मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक जैन ने भाजपा द्वारा लगाये गये आरोपों को खारिज कर दिया था। लेकिन मुख्य सचिव सी.के.मैथ्यू के छुट्टी पर जाने या नहीं जाने का फैसला लेने का अधिकार उन्होंने राज्य सरकार और खुद मैथ्यू पर छोड़ दिया था। लेकिन मुख्य सचिव सी.के.मैथ्यू छुट्टी पर जाने के लिये अड़े रहे!
मैथ्यू अपनी ईमानदारी के लिये जगजाहिर हैं। भाजपा के कुछ खुदगर्ज नेताओं ने मैथ्यू पर चुनावी चकल्लस के चलते आरोप जड़ दिये। अपने आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सबूत भी पेश नहीं किये। लेकिन भाजपा के नेताओं को एक बात अपने जहन में उतार लेनी चाहिये कि सियासत के दांवपेंच वे खेलें जरूर लेकिन अपने हित साधन के लिये किसी ईमानदार अफसर की खुद्दारी के साथ खिलवाड़ न करें! राज्य का मुख्य सचिव पूरे राजस्थान के प्रशासनिक बेडे का मुख्या होता है। ऐसे में अगर राज्य के प्रशासनिक बेडे पर बेमतलब के आरोप गैर जुम्मेदारी से जडे जाते हैं तो पूरे प्रशासनिक बेडे पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
भारतीय जनता पार्टी पिछले दो महिनों से अशोक गहलोत और उनकी सरकार पर सिर्फ आरोपों की बौछारों के अलावा कुछ भी नहीं कर रही है। श्रीमती वसुन्धरा राजे के पास आरोपों के पुलिंदे इधर से उधर करने के अलावा कहने के लिये कुछ भी नहीं है। सत्ता में आने के बाद जनहित के क्या काम करेगीं, उसके बारे में उन्होंने आज तक कुछ भी नहीं कहा। गत चुनावों में हार कर सत्ता गंवाने के बाद चार साल तक उन्होंने पार्टी केंद्रीय नेतृत्व एवं राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेताओं से अनबन के चलते कोप भवन में बिताये और अपनी हट को मनवाकर चुनावों के लिये दौड़ भाग कर रही हैं।
भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता और नेता सारी हकीकत से वाकिफ है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं का सोच भी श्रीमती वसुन्धरा राजे के प्रति नकारात्मक है, लेकिन दिल्ली के सिंहासन पर मोदी को बैठाने की उसकी मुहिम को परवान चढ़ाने के लिये उनकी महारानी के आगे झुकने की मजबूरी है।
वसुन्धरा राजे अपनी कार्यशैली के चलते वैसे भी कुछ चापलूसों को छोड़ दें तो, प्रशासनिक हलकों में अप्रिय है और अब भाजपा नेताओं द्वारा एक कर्तव्यनिष्ठ ईमानदार वरिष्ठतम प्रशासनिक अधिकारी पर गैर जुम्मेदारान आरोप लगाये जाने से भाजपा और खुद श्रीमती वसुन्धरा राजे की छवि अवाम में गहराई से धूमिल हुई है।
चुनाव आते रहेंगे। पंचायत, नगर पालिका से लेकर विधानसभा और लोकसभा या राज्यसभा के चुनाव साल दर साल होते रहेंगे। इस लिये आवश्यक है कि राजनेताओं को अपनी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से हट कर जनहित में उनकी पहल पर ज्यादा बोलना चाहिये। सिर्फ आरोपों-प्रत्यारोपों की चकल्लस से अवाम का कोई भला नहीं होने वाला। बल्कि अवाम भी ऐसे राजनेताओं को गम्भीरता से लेना छोड़ देता है। इस लिये आवश्यक है कि राजनेता अपने आचरण को सुधारें!
मैथ्यू अपनी ईमानदारी के लिये जगजाहिर हैं। भाजपा के कुछ खुदगर्ज नेताओं ने मैथ्यू पर चुनावी चकल्लस के चलते आरोप जड़ दिये। अपने आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सबूत भी पेश नहीं किये। लेकिन भाजपा के नेताओं को एक बात अपने जहन में उतार लेनी चाहिये कि सियासत के दांवपेंच वे खेलें जरूर लेकिन अपने हित साधन के लिये किसी ईमानदार अफसर की खुद्दारी के साथ खिलवाड़ न करें! राज्य का मुख्य सचिव पूरे राजस्थान के प्रशासनिक बेडे का मुख्या होता है। ऐसे में अगर राज्य के प्रशासनिक बेडे पर बेमतलब के आरोप गैर जुम्मेदारी से जडे जाते हैं तो पूरे प्रशासनिक बेडे पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
भारतीय जनता पार्टी पिछले दो महिनों से अशोक गहलोत और उनकी सरकार पर सिर्फ आरोपों की बौछारों के अलावा कुछ भी नहीं कर रही है। श्रीमती वसुन्धरा राजे के पास आरोपों के पुलिंदे इधर से उधर करने के अलावा कहने के लिये कुछ भी नहीं है। सत्ता में आने के बाद जनहित के क्या काम करेगीं, उसके बारे में उन्होंने आज तक कुछ भी नहीं कहा। गत चुनावों में हार कर सत्ता गंवाने के बाद चार साल तक उन्होंने पार्टी केंद्रीय नेतृत्व एवं राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेताओं से अनबन के चलते कोप भवन में बिताये और अपनी हट को मनवाकर चुनावों के लिये दौड़ भाग कर रही हैं।
भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता और नेता सारी हकीकत से वाकिफ है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं का सोच भी श्रीमती वसुन्धरा राजे के प्रति नकारात्मक है, लेकिन दिल्ली के सिंहासन पर मोदी को बैठाने की उसकी मुहिम को परवान चढ़ाने के लिये उनकी महारानी के आगे झुकने की मजबूरी है।
वसुन्धरा राजे अपनी कार्यशैली के चलते वैसे भी कुछ चापलूसों को छोड़ दें तो, प्रशासनिक हलकों में अप्रिय है और अब भाजपा नेताओं द्वारा एक कर्तव्यनिष्ठ ईमानदार वरिष्ठतम प्रशासनिक अधिकारी पर गैर जुम्मेदारान आरोप लगाये जाने से भाजपा और खुद श्रीमती वसुन्धरा राजे की छवि अवाम में गहराई से धूमिल हुई है।
चुनाव आते रहेंगे। पंचायत, नगर पालिका से लेकर विधानसभा और लोकसभा या राज्यसभा के चुनाव साल दर साल होते रहेंगे। इस लिये आवश्यक है कि राजनेताओं को अपनी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से हट कर जनहित में उनकी पहल पर ज्यादा बोलना चाहिये। सिर्फ आरोपों-प्रत्यारोपों की चकल्लस से अवाम का कोई भला नहीं होने वाला। बल्कि अवाम भी ऐसे राजनेताओं को गम्भीरता से लेना छोड़ देता है। इस लिये आवश्यक है कि राजनेता अपने आचरण को सुधारें!


