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जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व का पट्टा भ्रष्टाचारियों के नाम लिख दो सीईओ जगरूप सिंह यादव!

जयपुर (अग्रगामी) जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व क्षेत्र में चुनाव आचार सहिंता लागू होने के बाद भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण करने तथा बिना इजाजत तामीर के अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की निर्माण का काम जोरशोर से बिना रोकटोक चल रहा है।
जयपुर नगर निगम में पदस्थ विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व क्षेत्र में जब अवैध निर्माणों के मामले में उच्चस्तरीय दबाव बनता है तो दफ्तर से उस प्रकरण की फाइल गायब हो जाती है और दस्तावेजों के नहीं मिलने का बहाना बना कर मामले को रफादफा कर अवैध निर्माण करवाने और भूमाफियाओं को प्रश्रय देने की साजिश रची जाती है।
सूत्रों के अनुसार जयपुर नगर निगम की रेकार्ड शाखा से ऐसी दर्जनों फाइलें गायब हैं जिनके मामलों में नगर निगम स्तर से कार्यवाही करने के स्पष्ट आदेश जारी हो चुके हैं अथवा आदेश जारी होने हैं।
हम सिलसिलेवार उन फाइलों का जिक्र करते हैं जो जयपुर नगर निगम के आयुक्त हवामहल जोन पूर्व, सहायक अभियन्ता, कनिष्ठ अभियन्ता भवन और जोन की रेकार्ड शाखा के प्रभारी जाहित अली सिद्दकी की भू-माफियाओं और अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माताओं से सांठगांठ के चलते लापता हैं।
सबसे पहिले आयें हवामहल जोन पूर्व क्षेत्र के आधीन चौकडी घाटगेट में मोतीसिंह भौमियों के रास्ते में स्थित कॉमर्शियल काम्प्लेक्स धनराज महल के पास भवन म्युनिसिपल संख्या 3826 (रेकार्ड में भवन संख्या ए-1 भी अंकित) में स्थित धार्मिक स्थल जिसमें 163 साल पुराने जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के जिन कुशल सूरि चरण स्थापित थे और चरणों को शहीद कर वहां कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनवाने की साजिश हवामहल जोन पूर्व के अफसरों और कारिंदों ने मूलचंद डागा, जिन चंद्रसूरि से मोटा नजराना लेकर रची। नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के हुक्कामों और कारिंदों के ढ़ोल की पोल खुलने पर फाइल ही गायब कर दी गई और स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के दखल के बाद इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स को तोडऩे के स्पष्ट आदेश रेकार्ड पर होने के बावजूद इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स को नहीं तोड़ा जा रहा है। जबकि इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स को तोडऩे के लिये पूरा दबाव है। इससे साफ जाहिर होता है कि नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में बैठे भ्रष्ट और बेईमान नजरानाखोर अफसरों को स्थापित कानूनों की परवाह नहीं है।
अगर कानूनों की परवाह होती तो इस ही जोन की रेकार्ड शाखा में लिपिक जाहित अली सिद्दकी पिछले 15 सालों से अधिक समय से कुर्सी पर जमा नहीं रहता। इस ही रेकार्ड क्लर्क की रेकार्ड कीपरी के दौरान भवन म्युनिसिपल संख्या-4317, भवन म्युनिसिपल संख्या 3832, म्युनिसिपल भवन संख्या 4361, म्युनिसिपल भवन संख्या 4318, म्युनिसिपल भवन संख्या 2494, एवं भवन संख्या 3834-35 की फाइलें भी रेकार्ड रूम से लापता हैं। सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी से यह फाइलें गायब करने का महा गोरखधंधा उजागर हुआ। यही नहीं भवन म्युनिसिपल संख्या 2055 (गोवर्धनदास झंवर) चौकडी विश्वेश्वर की फाइल का भी कोई अता-पता नहीं है।
उधर चौकडी घाटगेट में भवन म्युनिसिपल संख्या 4494 एवं 4495 की पत्रावली भी लापता है, हालांकि इस अवैध निर्माण से सम्बन्धित रेकार्ड की फोटो प्रतियां शिकायतकर्ता ने नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व आयुक्त को खुद उनके हाथ में देकर कार्यवाही की मांग की थी।
ताजातरीन भवन म्युनिसिपल संख्या 4255 के प्रकरण को ही लें, इस भवन की निर्माण स्वीकृति से सम्बन्धित फाइल भी फिलहाल जोन के दफ्तर से लापता है।
एक अन्य मामला है दुकान नम्बर 44, बापू बाजार का, जिसका अवैध तहखाना और मालिकाना हक छुपाने के लिये तथा अन्य गड़बड़ी को दबाने के लिये इस दुकान की फाइल को भी अब गायब कर दिया गया बताया जाता है। हालांकि नगर निगम में ही विभिन्न स्तरों पर इसकी फोटो प्रतियां भी उपलब्ध है।
इस ही तरह म्युनिसिपल भवन संख्या 3834-35 में शिकायतों के चलते पहले तो पत्रावलियों को गायब बताया गया और अब शिकायतों को दबाते हुए गैर कानूनी तरीके से दुकानों को चालू करवा दिया गया है।
जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में बैठे सूत्र बताते हैं कि जाहिद अली सिद्दकी के पिछले 15 सालों से अधिक समय से रेकार्ड शाखा में जमा रहने के चलते सैंकड़ों फाइलें रेकार्ड रूम से लापता हैं, लेकिन रेकार्ड शाखा के रेकार्ड का सत्यापन पिछले 15 सालों से नहीं हुआ है। नतीजन कितना रेकार्ड गायब है उसका कोई लेखा जोखा भी रेकार्ड पर उपलब्ध नहीं है वहीं रेकार्ड गुम होने के एक भी मामले में इस लिपिक के खिलाफ कोई कार्यवाही इसलिये नहीं होती है कि यह व्यक्ति नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव का चहेता बताया जाता है और कर्मचारी यूनियन का नेता तथा समुदाय विशेष से सम्बन्धित होने के कारण कोई भी अधीनस्थ अफसर इस पर हाथ डालने की कोशिश नहीं करता है!
चूंकि लिपिक जाहिद अली सिद्दकी जिस सीट पर बैठा है वह नजराना बटेरू गोरखधंधे के लिये पहिले से ही बदनाम है, लेकिन इस सीट पर काबिज रहने वाला व्यक्ति कच्ची बस्ती के गरीब मतदाताओं को प्रभावित करने की स्थिति का होता है।
अब सवाल उठता है कि चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सिद्दकी जो पिछले 15 सालों से अधिक समय से एक ही सीट पर बैठा है उसे क्यों नहीं हटाया गया? क्या किसी राजनैतिक पार्टी का दबाव है या फिर अन्य कोई गड़बड़झाला!
हम जयपुर नगर निगम द्वारा चुनाव आयोग के निर्देशों की अनदेखी के अन्य मामलों की असलियत भी आगे उजागर करेंगे।

 
AGRAGAMI SANDESH

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