आखीरकार आसाराम को राजस्थान पुलिस गिरफ्तार कर जोधपुर ले ही आई! आसाराम प्रकरण में पुलिस और आसाराम के बीच जो लुकाछिपी का खेल चला, उससे आम अवाम के सामने साधु-सन्तों की आड़ लेकर दौलत इकठ्ठी करने वालों की हकीकत साफ-साफ उजागर हो गई है।
आसाराम पर लड़की के यौन शोषण के गम्भीर आरोपों के अलावा कई मामले चल रहे हैं। दौलत और रूतबे की ताकत पर आसाराम हर मामले को दबाते चले आ रहे हैं। आसाराम की गिरफ्तारी से यह बात भी साफ हो गई है कि आसाराम को कुछ स्वार्थी राजनेताओं का संरक्षण भी प्राप्त रहा है। राजस्थान के एक विधायक की पत्नी तो आसाराम गिरफ्तारी प्रकरण के दौरान दो बसें लेकर जोधपुर पहुंच गई! जब मीडिया में बात आई तो विधायक जी बोले कि उनकी पत्नी आसाराम की अनुयायी है। अब यहां फिर एक सवाल उठता है कि विधायक जी की पत्नी अगर आसाराम की अनुयायी है तो फिर विधायक जी खुद और उनका परिवार जैन, वैदिक, हिन्दु या अन्य किस समुदाय के अनुयायी हैं? आसाराम के पाकिस्तान से भारत आने और फिर कथावाचक और राजनैतिक पार्टियों से जुड़े नेताओं, छुटभय्याओं और पूंजीपतियों के गठजोड़ से मठाधीश बने आसाराम के अनुयायी बनने से पहिले उनका परिवार किस का अनुयायी था, यह माननीय विधायक जी ने आज तक नहीं बताया!
दरअसल एक ओर भाजपा, कांग्रेस और अन्य व्यक्तिपरक राजनैतिक दलों से जुडे निज स्वार्थों में लिप्त कथित नेता अपने फायदे के लिये, अपने आपको राष्ट्रसंत, सन्त, मुनि आरोपित करने वाले कथावाचकों और उनके चमचों दुमछल्लों का आसरा लेते हैं वहां ये बाबारूपी कथावाचक इन स्वार्थी नेताओं और पूंजीपतियों का आसरा लेकर आश्रमों के नाम पर दौलत इकठ्ठी कर अपना और अपने परिजनों और रिश्तेदारों का पेट फुलाने की जुगत में लगे हैं।
ऐसे बाबारूपी कथावाचकों, नेताओं और पूंजीपतियों का न तो कोई धर्म होता है, न ही कोई जाति! इनके लिये धन-दौलत ही धर्म व जाति होती है। दौलत ही इनका नैतिक आचरण और चरित्र होता है। अब बाबारूपी ढोंगियों की हकीकतें उजागर होती जा रही है और इन पर सामाजिक, प्रशासनिक और कानूनी रूपसे सख्त प्रतिबन्ध लगाने की जरूरत है। यही अब वक्त का तकाजा है!
आसाराम पर लड़की के यौन शोषण के गम्भीर आरोपों के अलावा कई मामले चल रहे हैं। दौलत और रूतबे की ताकत पर आसाराम हर मामले को दबाते चले आ रहे हैं। आसाराम की गिरफ्तारी से यह बात भी साफ हो गई है कि आसाराम को कुछ स्वार्थी राजनेताओं का संरक्षण भी प्राप्त रहा है। राजस्थान के एक विधायक की पत्नी तो आसाराम गिरफ्तारी प्रकरण के दौरान दो बसें लेकर जोधपुर पहुंच गई! जब मीडिया में बात आई तो विधायक जी बोले कि उनकी पत्नी आसाराम की अनुयायी है। अब यहां फिर एक सवाल उठता है कि विधायक जी की पत्नी अगर आसाराम की अनुयायी है तो फिर विधायक जी खुद और उनका परिवार जैन, वैदिक, हिन्दु या अन्य किस समुदाय के अनुयायी हैं? आसाराम के पाकिस्तान से भारत आने और फिर कथावाचक और राजनैतिक पार्टियों से जुड़े नेताओं, छुटभय्याओं और पूंजीपतियों के गठजोड़ से मठाधीश बने आसाराम के अनुयायी बनने से पहिले उनका परिवार किस का अनुयायी था, यह माननीय विधायक जी ने आज तक नहीं बताया!
दरअसल एक ओर भाजपा, कांग्रेस और अन्य व्यक्तिपरक राजनैतिक दलों से जुडे निज स्वार्थों में लिप्त कथित नेता अपने फायदे के लिये, अपने आपको राष्ट्रसंत, सन्त, मुनि आरोपित करने वाले कथावाचकों और उनके चमचों दुमछल्लों का आसरा लेते हैं वहां ये बाबारूपी कथावाचक इन स्वार्थी नेताओं और पूंजीपतियों का आसरा लेकर आश्रमों के नाम पर दौलत इकठ्ठी कर अपना और अपने परिजनों और रिश्तेदारों का पेट फुलाने की जुगत में लगे हैं।
ऐसे बाबारूपी कथावाचकों, नेताओं और पूंजीपतियों का न तो कोई धर्म होता है, न ही कोई जाति! इनके लिये धन-दौलत ही धर्म व जाति होती है। दौलत ही इनका नैतिक आचरण और चरित्र होता है। अब बाबारूपी ढोंगियों की हकीकतें उजागर होती जा रही है और इन पर सामाजिक, प्रशासनिक और कानूनी रूपसे सख्त प्रतिबन्ध लगाने की जरूरत है। यही अब वक्त का तकाजा है!


