जिनका इस दुनिया में अस्तित्व नहीं उसकी दुकान सीज और जो मालिक ही नहीं उसे सुपुर्द कर दी दुकान!
जयपुर (अग्रगामी) जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त, कनिष्ठ अभियन्ता चरण सिंह, गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य ने मिल कर स्थानीय बापू बाजार स्थित दुकान नम्बर 44 में तहखाना बनवाने के लिये जो तरीका अपनाया वह चौंकाने वाला है। इन लोगों ने मिली भगत कर बापू बाजार की दुकान नम्बर 44 में निर्माणाधीन तहखाने के मामले में दुकान मालिक को नोटिस देने के बजाय उस व्यक्ति के नाम से नोटिस जारी कर दिया जो कभी इस दुनिया में आया ही नहीं! यही नहीं इस अजन्मे कथित मालिक के नाम से दुकान तो 180 दिनों के लिये सील किया गया! यही नहीं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव के आदेश से इस दुकान की सील खोल कर ऐसे व्यक्ति को दुकान सौंप दी, जो इस दुकान का न तो कभी मालिक था और वर्तमान में भी वह इस दुकान का मालिक नहीं है। यही नहीं जयपुर नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव के आदेश की पालना में जब इस दुकान की जयपुर नगर निगम द्वारा सील खोली गई और जिसे यह दुकान सुपुर्द की गई वह भी इस दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर को मालिक नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इस सारे गोरखधंधे में लाखों का लेनदेन हुआ बताया जाता है।
हमने पिछले दिनों इस दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर में नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के तत्कालीन आयुक्त मदन कुमार शर्मा, जोन के कनिष्ठ अभियन्ता भवन चरण सिंह, गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्च की मिलीभगत से बनाये गये अण्डरग्राउण्ड के बारे में विस्तार से लिखा था। हमारे वरिष्ठ संवाददाता ने जब इस प्रकरण में आगे विस्तार से पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य उजागर होते ही जा रहे हैं।
गजधर गिरधारी शर्मा की दिनांक 28 अगस्त, 2012 को लिखी गई नोटशीट के आधार पर तत्कालीन कनिष्ठ अभियन्ता और राजस्व अधिकारी की अनुशंसा के बाद आयुक्त हवामहल जोन पूर्व ने दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर में खोदे जा रहे तहखाने के मामले में नोटिस जारी करने के आदेश दिये।
गजधरा गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य ने मौके का फायदा उठाया और नोटिस ऐसे आदमी के नाम से तैयार किया जो नोटिस जारी करने की तारीख 28 अगस्त, 2012 को इस दुकान का न तो मालिका था और न ही वह इस दुनिया में था, अर्थात इस नाम का कोई जिंदा व्यक्ति जयपुर में था ही नहीं! जबकि गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य की जानकारी में यह था कि जिस नाम से नोटिस जारी किया गया था, उस नाम का व्यक्ति जयपुर में ही नहीं और जो व्यक्ति दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर का असली मालिक है उसे वे अच्छी तरह से जानते थे और ऐसी स्थिति उन्हें अपने उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिये थी। कर्मचारी रामचंद्र मौर्य ने तो दुकान के असली मालिक (बेनामी मालिक) से मिलीभगत कर दुकान पर फर्जी तरीके से नोटिस चस्पा कर झण्डूमल को दुकान का मालिक साबित करने की गैर जुम्मेदारान कोशिश की। हालांकि इस नोटिस तामील के मामले में भी फर्जीवाडा किया गया। जिन लोगों के सामने नोटिस तामील करना बताया गया है उन गवाहों के हस्ताक्षर भी तामील कुनिन्दा ने नहीं करवाये और शातिराना चालाकी बरतते हुए राहगीर बताया गया जो कि गैर कानूनी है।
हवामहल जोन पूर्व के तत्कालीन आयुक्त मदन कुमार शर्मा, कनिष्ठ अभियन्ता भवन चरण सिंह, गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य ने दिनांक 31 अगस्त, 2012 को दुकान को सील करना बताया और इस सम्बन्ध में सीजिंग मिमो क्रमांक एफ.52/एमसी/एचएमजेड/ई/012 एसपी दिनांक 31 अगस्त, 2012 जारी किया, लेकिन दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर से सम्बन्धित इस सीलिंग मीमो को उन्होंने किसे तामील किया या फिर डाक से भेजा यह इन अधिकारियों को भी पता नहीं है! याने सीलिंग मीमो जारी करने और उसकी तामील करने में भी फर्जीवाडा हुआ है।
लेकिन एक बात साफ है कि दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर का असली मालिक झण्डूमल चेलाराम नहीं है और कनिष्ठ अभियन्ता (वर्तमान सहायक अभियन्ता) चरण सिंह की फाइल की नोटशीटों पर की गई टिप्पणियां दिनांक 29 दिसम्बर, 2012, टिप्पणी दिनांक 4 जनवरी, 2013, टिप्पणी दिनांक 21 जनवरी, 2013, 11 मार्च, 2013 साफ-साफ उजागर करती है कि कनिष्ठ अभियन्ता भवन चरण सिंह, गजधर गिरधारी शर्मा, कर्मचारी रामचंद्र मौर्य की दुकान के असली मालिक (बेनामी मालिक) से एक बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कांट्रेक्टर इजराइल के माध्यम से आपस में तालमेल रहा है और इस ही का नतीजा है कि तत्कालीन कनिष्ठ अभियन्ता भवन (वर्तमान में सहायक अभियन्ता) ने रेकार्ड पर एक ऐसे व्यक्ति को दुकान का कब्जा सम्भलवाना बताया, जो न तो इस दुकान का मालिक है और न ही झण्डूमल चेलाराम नाम के शक्स से उसका कोई लेना देना है क्योंकि खुद झण्डूमल चेलाराम का इस दुनिया में कोई अस्तित्व ही नहीं है।
इस शतिराना चालाकी भरे मामले की सनसनी खेज परतें हम अगले अंकों में उजागर करेंगे।
हमने पिछले दिनों इस दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर में नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के तत्कालीन आयुक्त मदन कुमार शर्मा, जोन के कनिष्ठ अभियन्ता भवन चरण सिंह, गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्च की मिलीभगत से बनाये गये अण्डरग्राउण्ड के बारे में विस्तार से लिखा था। हमारे वरिष्ठ संवाददाता ने जब इस प्रकरण में आगे विस्तार से पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य उजागर होते ही जा रहे हैं।
गजधर गिरधारी शर्मा की दिनांक 28 अगस्त, 2012 को लिखी गई नोटशीट के आधार पर तत्कालीन कनिष्ठ अभियन्ता और राजस्व अधिकारी की अनुशंसा के बाद आयुक्त हवामहल जोन पूर्व ने दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर में खोदे जा रहे तहखाने के मामले में नोटिस जारी करने के आदेश दिये।
गजधरा गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य ने मौके का फायदा उठाया और नोटिस ऐसे आदमी के नाम से तैयार किया जो नोटिस जारी करने की तारीख 28 अगस्त, 2012 को इस दुकान का न तो मालिका था और न ही वह इस दुनिया में था, अर्थात इस नाम का कोई जिंदा व्यक्ति जयपुर में था ही नहीं! जबकि गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य की जानकारी में यह था कि जिस नाम से नोटिस जारी किया गया था, उस नाम का व्यक्ति जयपुर में ही नहीं और जो व्यक्ति दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर का असली मालिक है उसे वे अच्छी तरह से जानते थे और ऐसी स्थिति उन्हें अपने उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिये थी। कर्मचारी रामचंद्र मौर्य ने तो दुकान के असली मालिक (बेनामी मालिक) से मिलीभगत कर दुकान पर फर्जी तरीके से नोटिस चस्पा कर झण्डूमल को दुकान का मालिक साबित करने की गैर जुम्मेदारान कोशिश की। हालांकि इस नोटिस तामील के मामले में भी फर्जीवाडा किया गया। जिन लोगों के सामने नोटिस तामील करना बताया गया है उन गवाहों के हस्ताक्षर भी तामील कुनिन्दा ने नहीं करवाये और शातिराना चालाकी बरतते हुए राहगीर बताया गया जो कि गैर कानूनी है।
हवामहल जोन पूर्व के तत्कालीन आयुक्त मदन कुमार शर्मा, कनिष्ठ अभियन्ता भवन चरण सिंह, गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य ने दिनांक 31 अगस्त, 2012 को दुकान को सील करना बताया और इस सम्बन्ध में सीजिंग मिमो क्रमांक एफ.52/एमसी/एचएमजेड/ई/012 एसपी दिनांक 31 अगस्त, 2012 जारी किया, लेकिन दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर से सम्बन्धित इस सीलिंग मीमो को उन्होंने किसे तामील किया या फिर डाक से भेजा यह इन अधिकारियों को भी पता नहीं है! याने सीलिंग मीमो जारी करने और उसकी तामील करने में भी फर्जीवाडा हुआ है।
लेकिन एक बात साफ है कि दुकान नम्बर 44, बापू बाजार, जयपुर का असली मालिक झण्डूमल चेलाराम नहीं है और कनिष्ठ अभियन्ता (वर्तमान सहायक अभियन्ता) चरण सिंह की फाइल की नोटशीटों पर की गई टिप्पणियां दिनांक 29 दिसम्बर, 2012, टिप्पणी दिनांक 4 जनवरी, 2013, टिप्पणी दिनांक 21 जनवरी, 2013, 11 मार्च, 2013 साफ-साफ उजागर करती है कि कनिष्ठ अभियन्ता भवन चरण सिंह, गजधर गिरधारी शर्मा, कर्मचारी रामचंद्र मौर्य की दुकान के असली मालिक (बेनामी मालिक) से एक बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कांट्रेक्टर इजराइल के माध्यम से आपस में तालमेल रहा है और इस ही का नतीजा है कि तत्कालीन कनिष्ठ अभियन्ता भवन (वर्तमान में सहायक अभियन्ता) ने रेकार्ड पर एक ऐसे व्यक्ति को दुकान का कब्जा सम्भलवाना बताया, जो न तो इस दुकान का मालिक है और न ही झण्डूमल चेलाराम नाम के शक्स से उसका कोई लेना देना है क्योंकि खुद झण्डूमल चेलाराम का इस दुनिया में कोई अस्तित्व ही नहीं है।
इस शतिराना चालाकी भरे मामले की सनसनी खेज परतें हम अगले अंकों में उजागर करेंगे।


