जयपुर (अग्रगामी) राजस्थान में विधानसभा चुनावों के लिये चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की तैयारियां अब लगभग अन्तिम चरण में बताई जाती हैं। राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा अक्टूबर, 2013 के पहिले सप्ताह में किये जाने की सम्भावना मजबूत होती जा रही है और अगर सूत्रों की बात मानी जाये तो आगामी 5 अक्टूबर को विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है और इस ही के साथ चुनावी आचार सहिंता भी लागू हो जायेगी।
कांग्रेस, भाजपा, एनपीपी, सीपीआई (एम) और जनता दल यूनाइटेड की सुराज संकल्प यात्रा से शवयात्रा तक सभी यात्राऐं पूरी हो चुकी हैं। भाजपा और कांग्रेस ने तो अपनी यात्राओं की समाप्ति के कार्यक्रम भी आयोजित कर यात्राओं के समापन की विधिवत् घोषणा कर दी है। बहुजन समाज पार्टी ने बिड़ला आडिटोरियम में अपना कार्यकर्ता सम्मेलन भी पिछले दिनों किया। उधर जनता दल यूनाइटेड आगामी विधानसभा चुनाव एनपीपी के साथ लडऩे का मानस बना रहा है। क्योंकि जनता दल सेक्यूलर जिसका राजस्थान में कोई वजूद नहीं है, कुछ नेताओं के निजी स्वार्थों के चलते वामपंथियों से चिपका है, नतीजन राजस्थान में कोई वृहद्त्तर तीसरा विकल्प बनने के आसार सीमित हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आचार सहिंता के लागू होने से पहिले-पहिले ज्यादा से ज्यादा शिलान्यास, लोकार्पण कार्यक्रमों को सम्पन्न करवाने में जुटे हैं! उधर वसुन्धरा राजे और नाराज चल रहे पार्टी े वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाडी में तालमेल बैठ जाने की स्थितियां बन रही है। लेकिन वसुन्धरा राजे और गुलाबचंद कटारिया के प्रति पार्टी में अन्दरूनी नाराजगी दूर नहीं हो पा रही है। काफी तादाद में नाराज भाजपा कार्यकर्ता सांसद किरोडीलाल मीणा के साथ एकजुट होने के लिये एनपीपी के साथ एकजुट हो रहे हैं।
जयपुर शहर की चार विधानसभा सीटों हवामहल, किशनपोल, आदर्शनगर और मालवीय नगर में ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के उम्मीदवार भाजपा/कांग्रेसी उम्मीदवार की जीत में अहम भूमिका निभायेंगे। इन विधानसभा सीटों पर दोनों ही पार्टियों का समीकरण फारवर्ड ब्लाक के कारण डगमगा रहा है।
प्रादेशिक स्तर पर आंकलन किया जाये तो वोटों का प्रतिशत भाजपा के पक्ष में बढऩे का तो दावा किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान समीकरणों के चलते सीटें कांग्रेस एवं उस के समर्थित दलों को ज्यादा मिलने के आसार हैं। माकपा और एनपीपी भी सीटों की दौड़ में हैं।
कांग्रेस, भाजपा, एनपीपी, सीपीआई (एम) और जनता दल यूनाइटेड की सुराज संकल्प यात्रा से शवयात्रा तक सभी यात्राऐं पूरी हो चुकी हैं। भाजपा और कांग्रेस ने तो अपनी यात्राओं की समाप्ति के कार्यक्रम भी आयोजित कर यात्राओं के समापन की विधिवत् घोषणा कर दी है। बहुजन समाज पार्टी ने बिड़ला आडिटोरियम में अपना कार्यकर्ता सम्मेलन भी पिछले दिनों किया। उधर जनता दल यूनाइटेड आगामी विधानसभा चुनाव एनपीपी के साथ लडऩे का मानस बना रहा है। क्योंकि जनता दल सेक्यूलर जिसका राजस्थान में कोई वजूद नहीं है, कुछ नेताओं के निजी स्वार्थों के चलते वामपंथियों से चिपका है, नतीजन राजस्थान में कोई वृहद्त्तर तीसरा विकल्प बनने के आसार सीमित हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आचार सहिंता के लागू होने से पहिले-पहिले ज्यादा से ज्यादा शिलान्यास, लोकार्पण कार्यक्रमों को सम्पन्न करवाने में जुटे हैं! उधर वसुन्धरा राजे और नाराज चल रहे पार्टी े वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाडी में तालमेल बैठ जाने की स्थितियां बन रही है। लेकिन वसुन्धरा राजे और गुलाबचंद कटारिया के प्रति पार्टी में अन्दरूनी नाराजगी दूर नहीं हो पा रही है। काफी तादाद में नाराज भाजपा कार्यकर्ता सांसद किरोडीलाल मीणा के साथ एकजुट होने के लिये एनपीपी के साथ एकजुट हो रहे हैं।
जयपुर शहर की चार विधानसभा सीटों हवामहल, किशनपोल, आदर्शनगर और मालवीय नगर में ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के उम्मीदवार भाजपा/कांग्रेसी उम्मीदवार की जीत में अहम भूमिका निभायेंगे। इन विधानसभा सीटों पर दोनों ही पार्टियों का समीकरण फारवर्ड ब्लाक के कारण डगमगा रहा है।
प्रादेशिक स्तर पर आंकलन किया जाये तो वोटों का प्रतिशत भाजपा के पक्ष में बढऩे का तो दावा किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान समीकरणों के चलते सीटें कांग्रेस एवं उस के समर्थित दलों को ज्यादा मिलने के आसार हैं। माकपा और एनपीपी भी सीटों की दौड़ में हैं।


