आखीरकार आसाराम की जमानत याचिका सैशन जज जोधपुर ने खारिज कर ही दी। अब आसाराम को अदालत के अगले आदेश तक जेल में रहना होगा। वैसे आसाराम के वकीलों का कहना है कि वे हाईकोर्ट में शीघ्र ही अपील दायर करेंगे।
अलग-अलग मीडिया चैनलों पर आसाराम को लेकर अलग-अलग तरीके से बहस चल रही है। वहीं आसाराम प्रकरण अखबारों की सुर्खियां भी बना हुआ है। पाकिस्तान से आये सात वर्षीय आसूमल से आज के आसाराम बनने तक आसाराम ने वाया तमाशाराम-झांसाराम के, जो सफर तैय किया है, उसमें हमारे देश के पूंजीपतियों, राजनेताओं, नौकरशाहों, तमाशारामों और झांसारामों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन पूंजीपतियों, राजनेताओं, नौकरशाहों ने अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिये देश की जनता की आस्थाओं को अंधविश्वास के रास्ते पर धकेलने हेतु सिर्फ एक आसाराम का ही सहारा नहीं लिया बल्कि आसाराम जैसे कई कथावाचकों, स्वंयभूं बाबाओं, सन्तों, महात्माओं, मुनियों का सहारा लेकर देश के अवाम की आस्थाओं का शोषण करवा कर उन्हें अन्धविश्वास, अंधभक्ति के गहरे खड्डे/खाई में धकेलते रहे हैं ताकि आम अवाम उनके भ्रष्ट आचरण, कालाबाजारी, सार्वजनिक सम्पत्ति की लूट खसौट, कालेधन के अर्जन जैसी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने में सक्षम नहीं हो सके।
अगर उदाहरण के तौर पर आसाराम को ही लें तो, ये कथावाचक वैदिक/हिन्दू धर्म के किसी भी मत-पंथ के धार्मिक सन्त नहीं हैं। दूसरे शब्दों में आसाराम का किसी भी मत-पंथ से सीधा-सीधा कोई नाता नहीं है। इस ही तरह, सुधांशु, कृपालू, निर्मल बाबा जैसे कई कथावाचक हैं जिनकी अपीन निजी दुकानें हैं। धन्ना सेठों के जरिये करोड़ों का कालाधन धर्म की आड़ में इन स्वंयभूं बाबाओं के पास पहुंता है और ये स्वंयभूं बाबा आस्था की आड़ में आम लोगों को अन्ध विश्वास की खाई में धकेलते रहते हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि इन स्वंयभूं बाबाओं की हरकतों-करतूतों को तत्काल सामाजिक और प्रशासनिक स्तर से अंकुशित किया जाये और इनके कब्जे की अरबो रूपये की नकदी और सम्पत्ति का तत्काल राष्ट्रीयकरण कर सरकारी कब्जे में लिया जाये ताकि इनकी टैक्स चोरी कर बनाई गई अकूत सम्पत्ति का अवाम के हित में उपयोग किया जा सके।
अलग-अलग मीडिया चैनलों पर आसाराम को लेकर अलग-अलग तरीके से बहस चल रही है। वहीं आसाराम प्रकरण अखबारों की सुर्खियां भी बना हुआ है। पाकिस्तान से आये सात वर्षीय आसूमल से आज के आसाराम बनने तक आसाराम ने वाया तमाशाराम-झांसाराम के, जो सफर तैय किया है, उसमें हमारे देश के पूंजीपतियों, राजनेताओं, नौकरशाहों, तमाशारामों और झांसारामों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन पूंजीपतियों, राजनेताओं, नौकरशाहों ने अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिये देश की जनता की आस्थाओं को अंधविश्वास के रास्ते पर धकेलने हेतु सिर्फ एक आसाराम का ही सहारा नहीं लिया बल्कि आसाराम जैसे कई कथावाचकों, स्वंयभूं बाबाओं, सन्तों, महात्माओं, मुनियों का सहारा लेकर देश के अवाम की आस्थाओं का शोषण करवा कर उन्हें अन्धविश्वास, अंधभक्ति के गहरे खड्डे/खाई में धकेलते रहे हैं ताकि आम अवाम उनके भ्रष्ट आचरण, कालाबाजारी, सार्वजनिक सम्पत्ति की लूट खसौट, कालेधन के अर्जन जैसी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने में सक्षम नहीं हो सके।
अगर उदाहरण के तौर पर आसाराम को ही लें तो, ये कथावाचक वैदिक/हिन्दू धर्म के किसी भी मत-पंथ के धार्मिक सन्त नहीं हैं। दूसरे शब्दों में आसाराम का किसी भी मत-पंथ से सीधा-सीधा कोई नाता नहीं है। इस ही तरह, सुधांशु, कृपालू, निर्मल बाबा जैसे कई कथावाचक हैं जिनकी अपीन निजी दुकानें हैं। धन्ना सेठों के जरिये करोड़ों का कालाधन धर्म की आड़ में इन स्वंयभूं बाबाओं के पास पहुंता है और ये स्वंयभूं बाबा आस्था की आड़ में आम लोगों को अन्ध विश्वास की खाई में धकेलते रहते हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि इन स्वंयभूं बाबाओं की हरकतों-करतूतों को तत्काल सामाजिक और प्रशासनिक स्तर से अंकुशित किया जाये और इनके कब्जे की अरबो रूपये की नकदी और सम्पत्ति का तत्काल राष्ट्रीयकरण कर सरकारी कब्जे में लिया जाये ताकि इनकी टैक्स चोरी कर बनाई गई अकूत सम्पत्ति का अवाम के हित में उपयोग किया जा सके।


