जयपुर (अग्रगामी) इस ही सप्ताह राज्य विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही प्रदेश में चुनावी आचार संहिता लागू हो जायेगी। आचार संहिता लागू होने के बाद जयपुर नगर निगम क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध निर्माण और अतिक्रमणों दौर शुरू होने वाला है। अतिक्रमण करने वाले या फिर गैरकानूनी अवैध निर्माण करने वालों ने निर्माण सामग्री का भण्डारण करना शुरू कर दिया है। उधर नगर निगम के अफसरों और कारिंदों की मिलीभगत से जो बिना इजाजत अवैध निर्माण किये जा रहे हैं, उनके निर्माणकर्ता-ठेकेदार भी इन अवैध निर्माणों को आचार सहिंता लागू होने की अवधि में पूरा करने के लिये अपने काम तेजी ला रहे हैं।
चार दिवारी क्षेत्र में अंडरग्राउण्ड (तहखाना) बनाने एवं बोरिंग खोदने पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन गुपचुप में तहखाने और बोरिंग खुद रहे हैं और अफसर सन्नीपात में जकड़े-अकड़े तमाशा देख रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि अकेले चार दिवारी क्षेत्र में लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा अवैध कॉमर्शियल निर्माण जिनमें ज्यादातर कॉमर्शियल काम्प्लेक्स हैं, जयपुर नगर निगम के अफसरों की मिलीभगत से बना लिये गये हैं। वहीं चार दिवारी क्षेत्र की 400 से अधिक दुकानों में जयपुर नगर निगम के अफसरों की रहनुमाई में अवैध रूप से तहखाने बना लिये गये हैं, लेकिन मेयर से लेकर जोन आयुक्तों में से कोई माई का लाल सख्त सक्षम कार्यवाही करने की हैसियत नहीं रखता है।
जयपुर नगर निगम में बैठे भ्रष्टाचारियों की एक करतूत हम यहां साया कर रहे हैं। भवन म्युनिसिपल नम्बर 2490, रास्ता तेलीपाड़ा (पटवों का रास्ता), चौकड़ी विश्वेश्वर जी, जयपुर नगर निगम में शरद कुमार अग्रवाल पुत्र स्व.बिहारीलाल को रिहायशी निर्माण जी+2 हेतु दिनांक 25 अक्टूबर, 2011 को जयपुर नगर निगम की भवन अनुज्ञा एवं संकर्म समिति ने अपने प्रस्ताव संख्या-6 के द्वारा अनुमति दी गई थी।
इस जी+2 रिहायशी तामीरात की इजाजत की आड़ में शरद कुमार अग्रवाल ने इस भवन म्युनिसिपल नम्बर 2490 में पांच मंजिला कॉमर्शियल काम्प्लेक्स का निर्माण कर लिया है और अब इस निर्माण की फिनिशिंग चल रही है।
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के स्टेट जनरल सेक्रेटरी हीराचंद जैन ने इस गैरकानूनी बिना इजाजत बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स की शिकायत अपने पत्र क्रमांक आरएसएफबी/4/2013 दिनांक 15 अप्रेल, 2013 को की थी। इस ही मामले में फारवर्ड ब्लाक के रिमाइंडर सम संख्यांक 15 अप्रेल, 2013 पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव ने तत्काल तीन दिन में कार्यवाही करने का आदेश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी ने भी इस प्रकरण में कार्यवाही कर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी थी।
लेकिन शर्मनाक स्थिति यह है कि जयपुर नगर निगम में बैठे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, हवामहल जोन पश्चिम के आयुक्त सहित इनके भ्रष्ट और निकम्मे अधीनस्थ अफसरों की इस अवैध निर्माण के मामले में कार्यवाही करने का कोई सोच ही पैदा नहीं हुआ।
सूत्र बताते हैं कि भवन म्युनिसिपल नम्बर 2490 में हो रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माण के मामले में अब तक अफसरों और कारिंदों को लगभग चार लाख के नजराने का भुगतान हो चुका बताया जाता है। अब सीईओ जगरूप सिंह यादव ही बता सकते हैं कि किसने कितना पाया! क्योंकि यह हकीकत है कि अगर नजराना नहीं मिलता तो अबतक यह अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स सीज हो गया होता और इसका अवैध निर्माण तोड़ दिया गया होता।
चार दिवारी क्षेत्र में अंडरग्राउण्ड (तहखाना) बनाने एवं बोरिंग खोदने पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन गुपचुप में तहखाने और बोरिंग खुद रहे हैं और अफसर सन्नीपात में जकड़े-अकड़े तमाशा देख रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि अकेले चार दिवारी क्षेत्र में लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा अवैध कॉमर्शियल निर्माण जिनमें ज्यादातर कॉमर्शियल काम्प्लेक्स हैं, जयपुर नगर निगम के अफसरों की मिलीभगत से बना लिये गये हैं। वहीं चार दिवारी क्षेत्र की 400 से अधिक दुकानों में जयपुर नगर निगम के अफसरों की रहनुमाई में अवैध रूप से तहखाने बना लिये गये हैं, लेकिन मेयर से लेकर जोन आयुक्तों में से कोई माई का लाल सख्त सक्षम कार्यवाही करने की हैसियत नहीं रखता है।
जयपुर नगर निगम में बैठे भ्रष्टाचारियों की एक करतूत हम यहां साया कर रहे हैं। भवन म्युनिसिपल नम्बर 2490, रास्ता तेलीपाड़ा (पटवों का रास्ता), चौकड़ी विश्वेश्वर जी, जयपुर नगर निगम में शरद कुमार अग्रवाल पुत्र स्व.बिहारीलाल को रिहायशी निर्माण जी+2 हेतु दिनांक 25 अक्टूबर, 2011 को जयपुर नगर निगम की भवन अनुज्ञा एवं संकर्म समिति ने अपने प्रस्ताव संख्या-6 के द्वारा अनुमति दी गई थी।
इस जी+2 रिहायशी तामीरात की इजाजत की आड़ में शरद कुमार अग्रवाल ने इस भवन म्युनिसिपल नम्बर 2490 में पांच मंजिला कॉमर्शियल काम्प्लेक्स का निर्माण कर लिया है और अब इस निर्माण की फिनिशिंग चल रही है।
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के स्टेट जनरल सेक्रेटरी हीराचंद जैन ने इस गैरकानूनी बिना इजाजत बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स की शिकायत अपने पत्र क्रमांक आरएसएफबी/4/2013 दिनांक 15 अप्रेल, 2013 को की थी। इस ही मामले में फारवर्ड ब्लाक के रिमाइंडर सम संख्यांक 15 अप्रेल, 2013 पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव ने तत्काल तीन दिन में कार्यवाही करने का आदेश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी ने भी इस प्रकरण में कार्यवाही कर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी थी।
लेकिन शर्मनाक स्थिति यह है कि जयपुर नगर निगम में बैठे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, हवामहल जोन पश्चिम के आयुक्त सहित इनके भ्रष्ट और निकम्मे अधीनस्थ अफसरों की इस अवैध निर्माण के मामले में कार्यवाही करने का कोई सोच ही पैदा नहीं हुआ।
सूत्र बताते हैं कि भवन म्युनिसिपल नम्बर 2490 में हो रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माण के मामले में अब तक अफसरों और कारिंदों को लगभग चार लाख के नजराने का भुगतान हो चुका बताया जाता है। अब सीईओ जगरूप सिंह यादव ही बता सकते हैं कि किसने कितना पाया! क्योंकि यह हकीकत है कि अगर नजराना नहीं मिलता तो अबतक यह अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स सीज हो गया होता और इसका अवैध निर्माण तोड़ दिया गया होता।


