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देश में उफनते जन आक्रोश के क्या नतीजे होंगे!

आज से 66 साल पहिले देश को गोरी चमड़ी वाले मालिकों से ट्रांसफर ऑफ पावर के जरिये क्रान्तिकारी देशभक्तों की कुर्बानियों के चलते प्रत्यक्ष रूप से बेशक छुटकारा मिल गया हो, लेकिन भारत के अवाम की गरदन पर काली चमड़ी वाले गोरों के गुलामों ने जिस कदर शिकंजा कस रखा है, वह तो गोरों के गुलामी राज से भी बद्तर है।

भारत के अवाम पर अंग्रेजों का तो प्रत्यक्ष राज था और उस से छुटकारा पाने के लिये देश के क्रान्तिकारियों ने जो कुर्बानियां दी और देश को आजाद कराया वह देश के इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। लेकिन देश की सत्ता पर कब्जा जमाये बैठे गोरी मानसिकता के काले गुलामों ने, जिनका देश से गोरी सल्तनत को विदा करने में कोई रोल नहीं है, आज भारत के अवाम को मंहगाई, बेरोजगारी, अनाचार, सत्ताधीशों के अत्याचारों की चक्की में पिसने के लिये लावारिस छोड़ दिया प्रतीत होता है। देश की सम्प्रगनीत कांग्रेस की अगुआई वाली डॉ.मनमोहन सिंह की सरकार पिछले पांच सालों से लगातार देश के अवाम की अनदेखी ही नहीं बेकद्री भी कर रही है। अवाम मंहगाई और गरीबी से त्रस्त है, जबकी डॉ.मनमोहन सिंह सरकार मंहगाई घटने का बेतुका दावा कर रही है। रूपये को डॉलर के मुकाबले गिरा-गिरा कर पैंदे बैठा दिया गया है, सिर्फ इस लिये कि भारत द्वारा आयात किये जाने वाले साजोसामान पर अमरीका ज्यादा कीमत वसूल सके!

अमरीका की बगलगिरी करने के लिये देश में चीनी आक्रमण का हव्वा खड़ा किया जा रहा है ताकि इस आड़ में अमरीकी रक्षा साजोसामान की थोक खरीदी की जा सके और अमरिकीयों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध हो सके! जबकि देश में औद्योगिक उत्पादन और कृषि उत्पादन को हतोत्साहित किया जा रहा है, नतीजन देश के युवकों के लिये रोजगार के अवसर कम होते चले जा रहे हैं। नतीजन युवाओं में सत्ताधीशों के प्रति जनआक्रोश चरम की ओर जा रहा है। इस जनआक्रोश के नतीजे क्या होंगे यह तो ऊपर वाला ही बता सकता है?

 
AGRAGAMI SANDESH

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