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देश की अखण्डता और एकता खतरे में!

देश में बढ़ती मंहगाई, बेरोजगारी, गरीबी और पिछड़ेपन से हैरान परेशान अवाम को राहत दिलवाने में नाकाम केंद्र की यूपीएनीत कांग्रेस की अगुआई वाली डॉ.मनमोहन सिंह सरकार अपनी कमियों को छुपाने के लिये देश में अस्थिरता का माहौल बनाने में जुटी है।

डॉ.मनमोहन सिंह सरकार के तेलंगाना जैसे मुद्दे पर चुनावी साल में गैरजुम्मेदारान तरीके से निर्णय लिये जाने की जो प्रक्रिया चलाई गई है उसके कारण देश के अनेक इलाकों में अलगाववादी मानसिकता भड़क उठी है। डॉ.मनमोहन सिंह सरकार अपनी विफलता छुपाने के लिये अन्दरखाने इन गतिविधियों को अपनी करतूतों के जरिये प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित कर रही है। तेलंगाना पर बेवक्त के फैसले से देश में विदर्भ, गोरखालैण्ड, कार्बी-आंगलाग, बोडोलैण्ड, बुंदेलखण्ड, पूर्वांचल, हरित प्रदेश को अलग राज्य का दर्जा देने के मुद्दे भी गर्मा गये हैं। नतीजन राजनितिज्ञों के गैरजुम्मेदारान तरीके से अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिये, लिये जा रहे फैसलों से देश की एकता और अखण्डता के विघटन की गम्भीर स्थिति पैदा होती जा रही है।

रूपये का तेजी से अवमूल्यन होता जा रहा है, नतीजन देश में आर्थिक संकट गहराने के आसार बढ़ते ही जा रहे हैं। पिछडों-अगडों के आरक्षण के गैरजुम्मेदारान मापदण्डों के कारण देश में आर्थिक असमानता का पैमाना बढ़ता जा रहा है। सरकार फर्जी और गैरजुम्मेदारान आंकडों का आधार लेकर गरीब को कुचलने में जुटी है, लेकिन देश में आज ऐसा एक भी राजनैतिक दल नहीं है जो देश और देश के अवाम की आवाज उठा सके। अवाम को एकजुट कर क्रान्तिकारी संघर्ष के जरिये देश और देश के अवाम की आबरू का बचाव कर सके!
देश अमरीकी जासूसी जाल में इतनी गहराई से उलझता जा रहा है कि आने वाले पांच सालों में हमें सबकुछ छोड़ कर अपने अस्तित्व को बचाने की जंग में उतरना पड़ेगा। देश की डॉ.मनमोहन सिंह सरकार भारत गणतंत्र को अमरीकी गुलाम बनाने के रास्ते पर चल रही है। हमें अफगानिस्तान में उलझाने की अमरीका ने एक सोची समझी साजिश को अंजाम देना शुरू कर दिया है।

यही कारण है कि डॉ.मनमोहन सिंह सरकार और राजनैतिक अस्थिरता फैलाने में जुटे हैं।

क्या भारत को अतीत बनाने की तैयारियां शुरू हो गई है? इस सवाल का जवाब देश के अवाम को ही सोचना होगा?

 
AGRAGAMI SANDESH

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