जयपुर (अग्रगामी) मुनि तरूण सागर के कड़वे प्रवचन की नौटंकी की कलई इस चार्तुमास में वे खुद ही खोलते जा रहे हैं! उनके कड़वे प्रवचनों की एक बानगी देखिये। वे कहते हैं कि कोई भी सुरक्षा मनुष्य को मौत से नहीं बचा सकती है। मौत के आगे सुरक्षा भी फेल हो जाती है। हम अपने जीवन की रक्षा के लिए भले ही कितने सुरक्षा कर्मचारी तैनात कर लें लेकिन वे मौत से नहीं बचा सकते। बाहरी सुरक्षाकर्मी कुछ नहीं कर सकते!
अब मुनि तरूण सागर के प्रवचनों की हकीकत नीचे फोटोग्राफ्स में देखें! स्टेनगन (स्टेन मशीन कारबाइन) लिये जवान उनकी सुरक्षा में तैनात हैं। जब उन्हें मालूम है कि बाहरी सुरक्षाकर्मी कुछ भी नहीं कर सकते हैं तो प्रवचन पांडाल में अहिंसा के हिमायतियों के बीच आटोमेटिक हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों की मुनि जी को क्या जरूरत पड गई? एक ओर अहम मुद्दा, जो इस से जुड़ा है वह यह है कि आटोमेटिक हथियारों से लैस इन पुलिसकर्मियों की नियुक्ति सरकार ने नहीं की है, बल्कि मुनि तरूण सागर प्रवचनों के आयोजकों के आग्रह पर पुलिस विभाग ने की है। इससे साफ जाहिर हो जाता है कि मुनि जी के कड़वे प्रवचनों और उनके हकीकती सोच में अंतर है!
अब उनके प्रवचनों की एक दूसरी बानगी भी देख लें! मुनि तरूण सागर अपने कड़वे प्रवचनों में एक जगह कहते हैं कि धन का अहंकार रखने वाले हमेंशा इस बात का ध्यान रखें कि पैसा कुछ भी हो सकता है, बहुत कुछ हो सकता है, लेकिन सबकुछ नहीं हो सकता है। अब मुनि तरूण सागर के प्रवचनों की हकीकत फोटोग्राफ्स बताते हैं कि अमीर से वे पांव धुलवा रहे हैं जबकि गरीब को हाथ के इशारे से हटा रहे हैं! यही नहीं जयपुर के एसएमएस इन्वेस्टमेंट ग्राउण्ड पर बने अपने प्रवचन पाण्डाल में वे अमीरों और वीआईपी को आगे बैठाते हैं और गरीबों को पीछे! अमीर और गरीब को विभाजित करने के लिये एक लक्षमण रेखा भी खैंची गई थी और अपने प्रवचनों में श्वेताम्बर मुनि चंद्रप्रभ सागर ने पांडाल में ही गरीब और अमीर को विभाजित करने वाली रेखा को हटाने का आयोजकों से आग्रह भी किया था!
अब मुनि तरूण सागर ही बता सकते हैं कि अपने प्रवचन पांडाल में कहे गये शब्दों का वे खुद ही पालन क्यों नहीं करते हैं? बतायें मुनि तरूण सागर!
एक मुद्दा ओर! मुनि तरूण सागर ने गत शनिवार को अपने प्रवचन में कहा बताते हैं कि जितने भ्रष्ट नेता हैं, उनका निर्यात कर दो! अब पहला सवाल है कि कौन सा नेता भ्रष्ट है और कौन सा नेता ईमानदार? बतायेंगे मुनि जी! दूसरा सवाल यह है कि जिस मुनि के अम्बर और दिशाऐं ही वस्त्र हैं, वे नेताओं के बंगलों पर क्यों ठहरते हैं? जयपुर प्रवास के दौरान वे जिस मंत्री या प्राधिकरण के अध्यक्ष के यहां ठहरे क्या उन्हें वे ईमानदार का प्रमाण पत्र दे रहे हैं? वैसे दीक्षा से सम्बन्धित नियमों-प्रावधानों के अनुसरण में मुनि तरूण सागर को गृहस्त के सरकारी आवास पर ठहरना ही नहीं चाहिये था! क्या वे अपने कृत्य को सुधारेंगे? क्रमश:
अब मुनि तरूण सागर के प्रवचनों की हकीकत नीचे फोटोग्राफ्स में देखें! स्टेनगन (स्टेन मशीन कारबाइन) लिये जवान उनकी सुरक्षा में तैनात हैं। जब उन्हें मालूम है कि बाहरी सुरक्षाकर्मी कुछ भी नहीं कर सकते हैं तो प्रवचन पांडाल में अहिंसा के हिमायतियों के बीच आटोमेटिक हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों की मुनि जी को क्या जरूरत पड गई? एक ओर अहम मुद्दा, जो इस से जुड़ा है वह यह है कि आटोमेटिक हथियारों से लैस इन पुलिसकर्मियों की नियुक्ति सरकार ने नहीं की है, बल्कि मुनि तरूण सागर प्रवचनों के आयोजकों के आग्रह पर पुलिस विभाग ने की है। इससे साफ जाहिर हो जाता है कि मुनि जी के कड़वे प्रवचनों और उनके हकीकती सोच में अंतर है!
अब उनके प्रवचनों की एक दूसरी बानगी भी देख लें! मुनि तरूण सागर अपने कड़वे प्रवचनों में एक जगह कहते हैं कि धन का अहंकार रखने वाले हमेंशा इस बात का ध्यान रखें कि पैसा कुछ भी हो सकता है, बहुत कुछ हो सकता है, लेकिन सबकुछ नहीं हो सकता है। अब मुनि तरूण सागर के प्रवचनों की हकीकत फोटोग्राफ्स बताते हैं कि अमीर से वे पांव धुलवा रहे हैं जबकि गरीब को हाथ के इशारे से हटा रहे हैं! यही नहीं जयपुर के एसएमएस इन्वेस्टमेंट ग्राउण्ड पर बने अपने प्रवचन पाण्डाल में वे अमीरों और वीआईपी को आगे बैठाते हैं और गरीबों को पीछे! अमीर और गरीब को विभाजित करने के लिये एक लक्षमण रेखा भी खैंची गई थी और अपने प्रवचनों में श्वेताम्बर मुनि चंद्रप्रभ सागर ने पांडाल में ही गरीब और अमीर को विभाजित करने वाली रेखा को हटाने का आयोजकों से आग्रह भी किया था!
अब मुनि तरूण सागर ही बता सकते हैं कि अपने प्रवचन पांडाल में कहे गये शब्दों का वे खुद ही पालन क्यों नहीं करते हैं? बतायें मुनि तरूण सागर!
एक मुद्दा ओर! मुनि तरूण सागर ने गत शनिवार को अपने प्रवचन में कहा बताते हैं कि जितने भ्रष्ट नेता हैं, उनका निर्यात कर दो! अब पहला सवाल है कि कौन सा नेता भ्रष्ट है और कौन सा नेता ईमानदार? बतायेंगे मुनि जी! दूसरा सवाल यह है कि जिस मुनि के अम्बर और दिशाऐं ही वस्त्र हैं, वे नेताओं के बंगलों पर क्यों ठहरते हैं? जयपुर प्रवास के दौरान वे जिस मंत्री या प्राधिकरण के अध्यक्ष के यहां ठहरे क्या उन्हें वे ईमानदार का प्रमाण पत्र दे रहे हैं? वैसे दीक्षा से सम्बन्धित नियमों-प्रावधानों के अनुसरण में मुनि तरूण सागर को गृहस्त के सरकारी आवास पर ठहरना ही नहीं चाहिये था! क्या वे अपने कृत्य को सुधारेंगे? क्रमश:


