सत्ताधीश आखीर बेशर्मी की हद क्यों पार कर रहे हैं। सिर्फ इसलिये कि देश का अवाम उनके भ्रष्ट आचरण पर किंकर्तव्यविमूड होकर मौन तमाशा देख रहा है। यदि ऐसा है तो सत्ताधीश सिर्फ गलतफहमी पाल कर बैठे हैं, उन्हें शायद अन्दाज नहीं है कि जब अवाम वोट का तमाचा मारता है तब अच्छे-अच्छे सत्ताधीश पैंदे बैठ जाते हैं।
देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह भी ऐसे ही एक सत्ताधीश हैं। उनको गरूर है कि श्रीमती सोनिया गांधी की बदौलत वे राज्यसभा का चुनाव जीत कर देश के प्रधानमंत्री बन बैठे हैं और देश का सवा करोड़ अवाम उनका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है! लेकिन उन्हें इस बात का शायद एहसास नहीं है कि जिस कांग्रेस और उसकी अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने उन्हें सत्ता में बैठाया है, अगर उस कांग्रेस पार्टी को अवाम ने अपने वोट की ताकत से सत्ता से उखाड़ फैंका तब हुजूर का क्या होगा? विश्व बैंक, एशियन डवलपमैंट बैंक या कौन सी अमरीकी परस्त ऐजेंसी में जाकर वे नौकरी करेंगे? बतायेंगे हुजूर!
कोयला मंत्री का, कोयला घोटाले से सम्बन्धित फाइलों के गुम हो जाने के मामले में, बयान बताता है कि हुजूर के चारों ओर कितना काला ही काला है। शायद फाइलें वे ही गुमी हैं जिनमें से कोयला घोटाले से प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के तार जुड़े हैं। इस ही लिये कोयला मंत्री जायसवाल ने इस मोटे घोटाले से भाजपा के तार जोडऩे की वाहियात कोशिश की है। कोयला मंत्री को साफ-साफ समझ लेना चाहिये कि अवाम सिर्फ उन गुमशुदा फाइलों के बारे में सरकारी स्तर से सख्त कानूनी कार्यवाही चाहता है और दोषियों को कानून के दायरे में लाना चाहता है, जो कोयला घोटाले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है। चाहे वो डॉ.मनमोहन सिंह हों या फिर भाजपा के कोई नेता हो! इसलिये कोयला मंत्री जायसवाल यह कह कर मामले को दबा नहीं सकते हैं कि इसमें भाजपाई भी कथित तौर पर शामिल हैं।
अगर फाइलें गायब है तो इसके लिये दोषी अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज होने चाहिये और उनकी गिरफ्तारी कर गुमशुदा फाइलों की बरामदगी होनी चाहिये तथा पूरे मामले में किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिये।
देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह भी ऐसे ही एक सत्ताधीश हैं। उनको गरूर है कि श्रीमती सोनिया गांधी की बदौलत वे राज्यसभा का चुनाव जीत कर देश के प्रधानमंत्री बन बैठे हैं और देश का सवा करोड़ अवाम उनका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है! लेकिन उन्हें इस बात का शायद एहसास नहीं है कि जिस कांग्रेस और उसकी अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने उन्हें सत्ता में बैठाया है, अगर उस कांग्रेस पार्टी को अवाम ने अपने वोट की ताकत से सत्ता से उखाड़ फैंका तब हुजूर का क्या होगा? विश्व बैंक, एशियन डवलपमैंट बैंक या कौन सी अमरीकी परस्त ऐजेंसी में जाकर वे नौकरी करेंगे? बतायेंगे हुजूर!
कोयला मंत्री का, कोयला घोटाले से सम्बन्धित फाइलों के गुम हो जाने के मामले में, बयान बताता है कि हुजूर के चारों ओर कितना काला ही काला है। शायद फाइलें वे ही गुमी हैं जिनमें से कोयला घोटाले से प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के तार जुड़े हैं। इस ही लिये कोयला मंत्री जायसवाल ने इस मोटे घोटाले से भाजपा के तार जोडऩे की वाहियात कोशिश की है। कोयला मंत्री को साफ-साफ समझ लेना चाहिये कि अवाम सिर्फ उन गुमशुदा फाइलों के बारे में सरकारी स्तर से सख्त कानूनी कार्यवाही चाहता है और दोषियों को कानून के दायरे में लाना चाहता है, जो कोयला घोटाले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है। चाहे वो डॉ.मनमोहन सिंह हों या फिर भाजपा के कोई नेता हो! इसलिये कोयला मंत्री जायसवाल यह कह कर मामले को दबा नहीं सकते हैं कि इसमें भाजपाई भी कथित तौर पर शामिल हैं।
अगर फाइलें गायब है तो इसके लिये दोषी अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज होने चाहिये और उनकी गिरफ्तारी कर गुमशुदा फाइलों की बरामदगी होनी चाहिये तथा पूरे मामले में किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिये।


