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जैन समाज की एकता के दावों की निकली हवा!-8

जयपुर (अग्रगामी) श्वेताम्बर और दिगम्बर जैन एकता के पाखण्ड की कलई आखीरकार मुनि तरूण सागर ने खुद ही खोल दी! एसएमएस इंवेस्टमेंट ग्राउण्ड में अपने वाटरप्रुफ पांडाल में चिल्ला कर बोले कि जैन एक हो यह हमारा प्रयास नहीं उन्होंने कहा कि मुनि चंद्रप्रभ सागर बैठे हैं, ये कपड़े उतार नहीं सकते और मैं कपड़े पहिन नहीं सकता! उन्होंने आगे साफ शब्दों में कहा कि जैन एक हों यह हमारा प्रयास नहीं है!
उधर एसएमएस इंवेस्टमेंट ग्राउण्ड के पांडाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आगमन का श्रोता बेसब्री से इंतजार करते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं आये! शायद उनको आना ही नहीं था। ज्ञातव्य रहे कि मुनि तरूण सागर चार्तुमास समिति ने गत 20 जुलाई, 2013 से लेकर रविवार 25 अगस्त तक जितनी बार मुख्यमंत्री अशोक गलोत के आने के दावे किये, उतनी ही बार मुख्यमंत्री मुनि तरूण सागर के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे!
अग्रगामी संदेश ने अपने पिछले सात अंकों में मुनि तरूण सागर, मुनि ललितप्रभ सागर और मुनि चंद्रप्रभ सागर के श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता के पाखण्ड की कलई खोली थी और उजागर किया था कि श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता की नौटंकी सिर्फ पाखण्ड के अलावा कुछ भी नहीं है। हमने अग्रगामी संदेश के गत 01 जुलाई, 2013 के अंक में साफ-साफ उजागर किया था कि श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता की नौटंकी सिर्फ पाखण्ड है और यह मुनि ललितप्रभ सागर, मुनि चंद्रप्रभ सागर और मुनि तरूण सागर के कथित दिव्य सत्संग-आध्यात्मिक प्रवचन स्थल एसएमएस इंवेस्टमेंट ग्राउण्ड पर श्रोताओं की भीड़ जुटाने की नौटंकी से ज्यादा कुछ भी नहीं है। हमने इस ही अंक में चार्तुमास समिति के संयोजक माणक काला से हुई बातचीत में उजागर हुई हकीकत से भी जैन समुदाय को अवगत कराया था। इसके बाद पिछले आठ सप्ताह से हमने इन तीनों कथित राष्ट्र संतों से सम्बन्धित हकीकत उजागर की थी और हमारी हर स्टोरी सही साबित हुई।
सारे मामले में मुनि तरूण सागर का यह खुलासा कि जैन एक हों यह हमारा प्रयास नहीं साफ-साफ उजागर करता है कि श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता के पाखण्ड को उन्होंने अपने प्रवचन स्थल पर भीड़ जुटाने के हथियार के रूप में उपयोग में लिया। हालांकि जैसे-जैसे श्रोताओं को हकीकत की जानकारी होती गई, वैसे-वैसे ही पांडाल में श्रोताओं की संख्या कम होती चली गई।
मुनि तरूण सागर चार्तुमास आयोजन समिति ने मुनि ललितप्रभ सागर, मुनि चंद्रप्रभ सागर और मुनि तरूण सागर के जयपुर महानगर में चार्तुमास प्रवेश के दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के माणक चौक चौपड़ (बड़ी चौपड़) पर आने की अफवाह फैलाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री जी नहीं आये! इस ही तरह मुनि तरूण सागर के कड़वे प्रवचन भाग-7 के विमोचन हेतु मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आने की अफवाह फैलाई गई, लेकिन वे नहीं आये! बाद में इसही विमोचन हेतु पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे का नाम प्रचारित किया गया, लेकिन वे भी नहीं आई और कड़वे प्रवचन भाग-7 का विमोचन हडबडी में मुनि चंद्रप्रभ सागर ने किया।
गत रविवार (25 अगस्त) को तरूण क्रान्ति अवार्ड वितरित करने के लिये भी राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम को प्रचारित किया गया, लेकिन वे नहीं आये। मंच पर जिस जगह राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मंचासीन होना था वह जगह खाली पड़ी थी जहां मुख्यमंत्री को बैठना था। वहां मात्र उनकी नाम पट्टिका पड़ी थी!
एक अहम बात यह भी हुई कि मुनि ललितप्रभ सागर रविवार को प्रवचनों में अनुपस्थित रहे। लेकिन क्यों? सवाल यह भी श्रोताओं के जहन में पैदा हुआ और श्रोता यह चर्चा करते नजर आये कि जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को तरूण क्रान्ति अवार्ड वितरित करने के लिये आना था तो मुनि ललितप्रभ सागर कार्यक्रम में अनुपस्थित क्यों रहे?
अब चूंकि श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता की नौटंकी का पाखण्ड साफ-साफ उजागर हो गया है, ऐसी स्थिति में क्या मुनि ललितप्रभ सागर और मुनि चंद्रप्रभ सागर तत्काल अपने चार्तुमास स्थल विचक्षण भवन लौटेंगे और सामाजिक धार्मिक दायीत्वों का निर्वहन करेंगे? वैसे इस सारे प्रकरण में एक बात सामने आ रही है कि यह सारा कियाधरा पूंजीपतियों, सरमायेदारों, छुटभय्या नेताओं, टैक्स चोरों ने शायद राजनैतिक प्रश्रय पाने के लिये ही अपने चमचों-दुमछल्लों से करवाया हो?
हम विस्तार से इन्ही सब मुद्दों पर अग्रगामी संदेश के अगले अंकों में विस्तार से लिखेंगे!

 
AGRAGAMI SANDESH

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