जैन संस्कृति की दो धाराओं, श्वेताम्बर एवं दिगम्बर, के साधु व साध्वियां प्रतिदिन गोचरी (गऊ-चरी) ग्रहण करते हैं। मानव जीवन क्रम में गाय एक ऐसा प्राणी है जो जन्म से मृत्युपर्यन्त मानव सेवा निस्वार्थ भाव से करती है। पौष्टिक दूध, ईंधन व खाद के लिये गोबर, औषध के रूप में गौमूत्र और मृत्यु पश्चात वह अपना शरीर भी प्राणी मात्र के कल्याण हेतु समर्पित कर देती है। इस ही तरह सांसारिक जीवन को त्याग कर बने साधु, सन्त, साध्वियां, मानव कल्याण के लिये जीवनपर्यन्त कार्य करते हैं और उनके देह त्याग के बाद भी उनके आदर्श वचनों का पालन कर, मानव आदिनाथ ऋषभदेव द्वारा स्थापित "मानव धर्मसूत्र" में निर्देशित सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह जैसे नियमों का पालन करने हेतु प्रेरित होते हैं। मानव समुदाय (गृहस्थ समुदाय) इसके बदले गाय व गाय की तरह गुणी साधु-साध्वियों को अपने स्वंय के उपार्जन में से आहार-निवास की व्यवस्था करता है, यह विचारते हुये कि गऊ-चरी! आदिनाथ ऋषभदेव द्वारा मानव धर्मसूत्र में निर्देशित तरीके से साधु-साध्वियों को गोचरी (आहार ग्रहण) करना होता है। इसके अनुसार साधु-साध्वियां प्रतिदिन कम से कम दस से पंद्रह विभिन्न परिवारों से निर्देशित मार्ग निर्देशों के तहत गोचरी/आहार ग्रहण करते हैं तथा अपने प्रवास के दौरान प्रवास क्षेत्र के सभी परिवारों से अनिवार्य रूप से आहार लेते हैं। गोचरी/आहार प्राप्त करने के दौरान उन्हें उन परिवारों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, पारिवारिक स्थितियों और परिवार की व्यक्तिगत समस्याओं से रूबरू होना होता है। जिसका वे व्यवहारिक लेखा-जोखा लेते हैं और समाज के पिछडे-शोषित-पीडित तकबे को तलाश कर खोज निकालते हैं तथा समाज के सम्पन्न वर्ग को आदिनाथ द्वारा स्थापित 'मानव धर्म सूत्रÓ में दिये गये निर्देशों का अनुसरण कर समाज के शोषित पीडित वर्ग की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक व पारिवारिक/व्यक्तिगत समस्याओं का सामुहिक तौर पर निराकरण करने हेतु प्रेरित करते हैं ताकि समाज के कमजोर, शोषित पीडित वर्ग का जीवन स्तर उनके जीवन स्तर के समकक्ष हो सके। यह है गोचरी (गऊ-चरी) ग्रहण करने वाले साधु-साध्वियों का दायीत्व। क्या इस आचरण का पालन होता है? अगर नहीं तो क्यों? यह विचारणीय तत्व है और आम जैन समुदाय का सदस्य चातुर्मास के इस पावन अवसर पर हमारे प्रवचन भट्ट संतों से जानना चाहेगा कि क्या वे गोचरी के नियमों का पालन करते और करवाते हैं? अगर नहीं तो क्यों?


