नई दिल्ली (अग्रगामी) कांग्रेस की डॉ.मनमोहन सिंह सरकार लगता है कि इस देश और देश की जनता के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी का भी पाटिया साफ करने पर तुली है! गरीबी के योजना आयोग और केंद्र सरकार के मापदण्ड अन्तत: केंद्र की यूपीएनीत कांग्रेस की अगुआई वाली डॉ.मनमोहन सिंह सरकार को तो ले ही डूबेगी, साथ ही साथ कांग्रेस पार्टी का भी पूरी तरह पाटिया साफ कर के छोड़ेगी। रोटी पर सियासत कर रहे कांग्रेसी नेताओं को भी अब यह समझ में आ गया है कि रोटी पर भाषण देने वाले कांग्रेसी भाषणभट्ट राजनेता बैकफुट पर आ गये हैं। एक रूपये, पांच रूपये और 12 रूपये में भरपेट खाना मिलने का दावा करने वाले फारूख अब्दुल्ला, राजबब्बर जैसे कांग्रेसी नेताओं ने अपने गैरजुम्मेदारान भाषणों को वापस ले लिया!
लेकिन देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के बारे में क्या कहा जाये? शायद इन दोनों कथित अर्थशास्त्रियों के दिमाग में सिर्फ अमरीका को फायदा पहुंचाने के अलावा कोई दूसरा सोच ही नहीं है! अवाम का इन दोनों कथित अर्थशास्त्रियों बनाम अनर्थशास्त्रियों से सीधा सवाल है कि क्या वे अपने-अपने परिवारों पर प्रति व्यक्ति 35 रूपये प्रतिदिन खर्च कर जीवनयापन करते हैं? अगर नहीं तो फिर इस तरह की बकवास क्यों करते हैं? आज डॉ.मनमोहन सिंह और मोंटेक सिंह अहलूवालिया के पास एक ही मुद्दा बचा है कि किसी भी तरह अमरीका को जितना ज्यादा फायदा हो सकता है करवाया जाये, चाहे देश और देश की जनता बर्बाद ही क्यों नहीं हो जाये! अमरीका को फायदा पहुंचाने के लिये रूपये की जो दुर्दशा की गई वह सबके सामने है।
अमरीकी पैट्रोलियम कम्पनियों और अमरीकी तेल सटोरियों को फायदा पहुंचाने के लिये दिन प्रतिदिन पैट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाये जा रहे हैं, जबकि ईरान सहित अन्य देशों, जहां से भारत को सस्ता क्रूड आयल मिल सकता है, उन देशों से तेल खरीद पर पाबन्दी लगाई जा रही है, आखीर क्यों?
देश में मंहगाई, बेरोजगारी, गरीबी का ग्राफ ऊपर उठता ही जा रहा है। पैट्रोल, डीजल, उर्वरकों और आम उपभोक्ता वस्तुओं के दाम पहिले से ही आसमान छू रहे हैं और इनका ग्राफ दिन प्रतिदिन ऊंचा ही होता जा रहा है। लेकिन केंद्र की डॉ.मनमोहन सिंह सरकार इन्हें अंकुशित करने का कोई सोच ही नहीं रखती है!
समझ में नहीं आता है कि डॉ.मनमोहन सिंह और डॉ.मोंटेक सिंह अहलूवालिया क्यों देश का बंटाढार करने पर तुले हैं? इन अमरीकी गुलामों से आखीर कब छुटकारा मिलेगा? अवाम के इस सवाल का किसी भी राजनेता के पास क्या कोई जवाब है!
लेकिन देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के बारे में क्या कहा जाये? शायद इन दोनों कथित अर्थशास्त्रियों के दिमाग में सिर्फ अमरीका को फायदा पहुंचाने के अलावा कोई दूसरा सोच ही नहीं है! अवाम का इन दोनों कथित अर्थशास्त्रियों बनाम अनर्थशास्त्रियों से सीधा सवाल है कि क्या वे अपने-अपने परिवारों पर प्रति व्यक्ति 35 रूपये प्रतिदिन खर्च कर जीवनयापन करते हैं? अगर नहीं तो फिर इस तरह की बकवास क्यों करते हैं? आज डॉ.मनमोहन सिंह और मोंटेक सिंह अहलूवालिया के पास एक ही मुद्दा बचा है कि किसी भी तरह अमरीका को जितना ज्यादा फायदा हो सकता है करवाया जाये, चाहे देश और देश की जनता बर्बाद ही क्यों नहीं हो जाये! अमरीका को फायदा पहुंचाने के लिये रूपये की जो दुर्दशा की गई वह सबके सामने है।
अमरीकी पैट्रोलियम कम्पनियों और अमरीकी तेल सटोरियों को फायदा पहुंचाने के लिये दिन प्रतिदिन पैट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाये जा रहे हैं, जबकि ईरान सहित अन्य देशों, जहां से भारत को सस्ता क्रूड आयल मिल सकता है, उन देशों से तेल खरीद पर पाबन्दी लगाई जा रही है, आखीर क्यों?
देश में मंहगाई, बेरोजगारी, गरीबी का ग्राफ ऊपर उठता ही जा रहा है। पैट्रोल, डीजल, उर्वरकों और आम उपभोक्ता वस्तुओं के दाम पहिले से ही आसमान छू रहे हैं और इनका ग्राफ दिन प्रतिदिन ऊंचा ही होता जा रहा है। लेकिन केंद्र की डॉ.मनमोहन सिंह सरकार इन्हें अंकुशित करने का कोई सोच ही नहीं रखती है!
समझ में नहीं आता है कि डॉ.मनमोहन सिंह और डॉ.मोंटेक सिंह अहलूवालिया क्यों देश का बंटाढार करने पर तुले हैं? इन अमरीकी गुलामों से आखीर कब छुटकारा मिलेगा? अवाम के इस सवाल का किसी भी राजनेता के पास क्या कोई जवाब है!


