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भारतीय जनता पार्टी का दोहरा चेहरा!

दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली प्रदेश में पेट्रोल पर वेट 25 प्रतिशत करने पर भारतीय जनता पार्टी के नेता जरूरत से ज्यादा चिल्लपों मचा रहे हैं। विश्व में क्रूड ऑयल की कीमतों में 60 प्रतिशत तक गिरावट आने पर भी देश में वास्तविक रूप से पेट्रोल व डीजल की कीमतों में केंद्र सरकार द्वारा कोई कमी नहीं की गई। तेल कम्पनियों ने पेट्रोल और डीजल के जितने दाम घटाये उसी को ध्यान में रखते हुये केंद्र की मोदी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी और आज भी केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी कम करने को तैयार नहीं है। उधर भाजपा शासित राजस्थान और हरियाणा में पेट्राल व डीजल पर वैट दिल्ली से ज्यादा है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के एक साथी अकाली दलनीत बादल सरकार ने राज्य में पेट्रोल और डीजल पर वैट दिल्ली प्रदेश से ज्यादा है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेतागण  मूं सीकर पट्टी बांधकर अपने-अपने दड़बों में घुसे बैठे हैं। उनकी हिम्मत नहीं हो रही है कि भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल की राजस्थान, हरियाणा और पंजाब सरकारों के खिलाफ वैट में कमी करने के लिये जबान खोलें। दिल्ली में वैट बढ़ाने के पीछे जीएसटी प्रमुख कारण है और यह फैसला देश के सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की सलाह पर किया गया प्रतीत होता है।
दिल्ली में वैट को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा जो चिल्लपों मचायी जा रही है, उसी तरह की चिल्लपों उन्हें राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में भी मचानी चाहिये। क्योंकि इन राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर स्टेट एक्साइज ड्यूटी की जो दरें हैं वे दिल्ली राज्य से ज्यादा है। वहीं केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार भी केंद्रीय उत्पाद शुल्क में बेजा तरीके से की गई बढ़ोतरी को वापस लेने के मूड में नजर नहीं आती है। ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी के नेता किस मूंह से दिल्ली में पेट्रोल और डीजल पर वैट के मुद्दे को लेकर चिल्लपों मचा रहे हैं? ये तो वो ही बता सकते हैं!
एक दूसरा सवाल भी है कि 18 जुलाई, 2015 को दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त हो गया है। जिस पर नियुक्ति को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी बिना मतलब का शोरशराबा मचा रहे हैं। दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति का संवैधानिक अधिकार अरविंद केजरीवाल सरकार का है और वे संवैधानिक दायरे में रह कर किसी भी योग्य व्यक्ति को नियुक्ति दे सकते हैं। दिल्ली में महिला आयोग में अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से हमारी एक गुजारिश है जरा राजस्थान की तरफ भी झांक कर देख लें जहां राज्य महिला आयोग, बाल आयोग और एसअी-एसटी आयोग के अध्यक्षों के पद लम्बे अरसे से रिक्त है। लेकिन एक भी भाजपाई नेता इस मुद्दे पर मूंह खोलने को तैयार नहीं है। दोनों मुद्दे भारतीय जनता पार्टी के दोहरे चरित्र को उजागर रहे हैं। अब देखना यही है कि राजस्थान में इन दोनों मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी क्या गुल खिलाती है।

 
AGRAGAMI SANDESH

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