जयपुर (अग्रगामी) जयपुर नगर निगम की वेबसाईट या मोबाईल एप पर अगर आपने अतिक्रमण या रोड़ पर सामान रख कर काम करने वालों की शिकायत की है तो फिर अधिकारियों के जवाब से परेशान होने की आवश्यकता ही नहीं है। क्योंकि उनका जवाब पहले मौखिक होता था, अब लिखित में भी टालमटोल वाला होता है। लेकिन सरकार, स्थानीय निकाय विभाग (स्वायत्त शासन विभाग), नगर निगम के अधिकारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। क्योंकि सारी गलतियों को बड़े-बड़े विज्ञापन देकर दबा दिया जायेगा। ज्यादा दबाव आया तो शिकायतकर्ता को नाम उजागर करने की धमकी दी जायेगी और फिर भी नहीं माने और शिकायत की तो फिर मामला रफादफा करने के साथ ही शिकायतकर्ता की जानकारी अतिक्रमणकारियों को देकर दबाव बनाया जायेगा कि वे बार-बार शिकायत ना करे अन्यथा परिणाम......?
नगर निगम के मोबाईल एप पर की गई शिकायत नम्बर 9415979 पर शिकायतकर्ता ने रोड़ पर सामान रख कर रोड़ जाम करने के साथ ही अस्थाई अतिक्रमण की शिकायत दर्ज करवाई और उस पर कई दिनों तक कोई कार्यवाही नहीं हुई तो शिकायतकर्ता ने इस की जानकारी प्राप्त करने के प्रयास किये लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। कुछ दिनों वाद उक्त शिकायत को कम्पलेंट सोल्वड लिख कर बंद कर दिया गया। लेकिन शिकायतकर्ता ने पुन: शिकायत नम्बर 9438952 पर बताया कि उक्त शिकायत सोल्वड नहीं हुई। साफ था कि नगर निगम ने कोई अतिक्रमण नहीं हटाया है और ना ही शिकायत वाले क्षेत्र में कोई कार्यवाही की है।
शिकायत नम्बर 9438952 पर नगर निगम का जवाब ऐसा था जिससे साफ-साफ समझ में आ रहा है कि अधिकारी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही करना ही नहीं चाहते हैं। इस शिकायत का जवाब कुछ इस तरह था-एड्रेस, वार्ड नॉट फाउंड आर रोंग? जबकि इस शिकायत नम्बर 9415979 में पूरा पता दिया गया था और वार्ड नम्बर भी दर्ज था जिस पर नगर निगम ने कार्यवाही करना बताया है, तो फिर उस शिकायत पर कार्यवाही नहीं होने की शिकायत में नगर निगम को वार्ड नम्बर और पता क्यों नहीं नजर आ रहा है।
आम अवाम चाहे तो उन शिकायतों को नगर निगम की वेबसाईट पर देख सकता है? हां यह गारंटी तो नहीं दी जा सकती की यह शिकायत की स्थिति कब तक वेबसाईट पर रहेगी क्योंकि अधिकारियों की फजीहत होने के चलते हो सकता है इसको भी गायब कर दिया जाये।
यह तो एक उदाहरण मात्र है क्योंकि नगर निगम के अधिकारी सुगम, मोबाईल एप और वेबसाईट पर दर्ज शिकायतों पर कार्यवाही करने के बजाये अतिक्रमणकारियों से मिलीभगत कर शिकायतों का जवाब कुछ इस ही तरह का देते रहे है या फिर लम्बे समय तक कोई जवाब ही नहीं दिया जाता। अब देखना यही है कि स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारी, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी इन लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्यवाही करते हैं। या फिर सब इस ही तरह चलता रहेगा और संरक्षण देने के बदले उनको भी हिस्सा मिलता रहेगा!
नगर निगम के मोबाईल एप पर की गई शिकायत नम्बर 9415979 पर शिकायतकर्ता ने रोड़ पर सामान रख कर रोड़ जाम करने के साथ ही अस्थाई अतिक्रमण की शिकायत दर्ज करवाई और उस पर कई दिनों तक कोई कार्यवाही नहीं हुई तो शिकायतकर्ता ने इस की जानकारी प्राप्त करने के प्रयास किये लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। कुछ दिनों वाद उक्त शिकायत को कम्पलेंट सोल्वड लिख कर बंद कर दिया गया। लेकिन शिकायतकर्ता ने पुन: शिकायत नम्बर 9438952 पर बताया कि उक्त शिकायत सोल्वड नहीं हुई। साफ था कि नगर निगम ने कोई अतिक्रमण नहीं हटाया है और ना ही शिकायत वाले क्षेत्र में कोई कार्यवाही की है।
शिकायत नम्बर 9438952 पर नगर निगम का जवाब ऐसा था जिससे साफ-साफ समझ में आ रहा है कि अधिकारी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही करना ही नहीं चाहते हैं। इस शिकायत का जवाब कुछ इस तरह था-एड्रेस, वार्ड नॉट फाउंड आर रोंग? जबकि इस शिकायत नम्बर 9415979 में पूरा पता दिया गया था और वार्ड नम्बर भी दर्ज था जिस पर नगर निगम ने कार्यवाही करना बताया है, तो फिर उस शिकायत पर कार्यवाही नहीं होने की शिकायत में नगर निगम को वार्ड नम्बर और पता क्यों नहीं नजर आ रहा है।
आम अवाम चाहे तो उन शिकायतों को नगर निगम की वेबसाईट पर देख सकता है? हां यह गारंटी तो नहीं दी जा सकती की यह शिकायत की स्थिति कब तक वेबसाईट पर रहेगी क्योंकि अधिकारियों की फजीहत होने के चलते हो सकता है इसको भी गायब कर दिया जाये।
यह तो एक उदाहरण मात्र है क्योंकि नगर निगम के अधिकारी सुगम, मोबाईल एप और वेबसाईट पर दर्ज शिकायतों पर कार्यवाही करने के बजाये अतिक्रमणकारियों से मिलीभगत कर शिकायतों का जवाब कुछ इस ही तरह का देते रहे है या फिर लम्बे समय तक कोई जवाब ही नहीं दिया जाता। अब देखना यही है कि स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारी, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी इन लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्यवाही करते हैं। या फिर सब इस ही तरह चलता रहेगा और संरक्षण देने के बदले उनको भी हिस्सा मिलता रहेगा!


