नई दिल्ली/जयपुर (अग्रगामी) अल्पसंख्यक जैन समुदाय के विद्यार्थियों के लिये छात्रवृत्ति हेतु केंद्र सरकार द्वारा आवेदन मांगे गये हैं। ये आवेदन पत्र 01 जून से प्रारम्भ होकर 30 सितम्बर, 2015 तक ऑनलाईन भरे जाने हैं। जैन समुदाय के शिक्षित बेरोजगारों को उद्योग लगाने के लिये ऋण एवं सब्सिडी हेतु आवेदन करने हेतु भी शीघ्र ही नोटिफिकेशन जारी होने हैं।
अल्पसंख्यक जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं के पंजीकरण हेतु 30 जून, 2015 तक निदेशक, अल्पसंख्यक मामलात विभाग राजस्थान द्वारा आवेदन पत्र मांगे गये हैं। इन शिक्षण संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देश दिये गये हैं कि वे 30 जून तक आवेदन पत्र निदेशक अल्पसंख्यक मामलात विभाग राजस्थान जयपुर को प्रेषित कर दें।
अल्पसंख्यक जैन समुदाय के लिये जैन सांस्कृतिक एकेडमी एवं जैन साहित्य एकेडमी स्थापित करने के लिये भी उच्च स्तरीय प्रयास हो रहे हैं।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रयासों से गतवर्ष भारी तादाद में अल्पसंख्यक जैन समुदाय के विद्यार्थियों को छात्रवृति आवेदन हेतु प्रेरित किया गया था और अच्छी खासी तादाद में बच्चों को छात्रवृति प्राप्त हो रही है।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि देश में जैन समुदाय की आबादी मात्र कुछ लाख में सिमट कर रह गई है। इनमें से 80 प्रतिशत से ज्यादा मध्यम वर्ग एवं निम्र मध्यम वर्ग के परिवार हैं। जो अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में अभी तक असमर्थ रहते थे, लेकिन छात्रवृति की स्कीम के कारण अब वे अपने बच्चों को बिना किसी एहसान के उच्च शिक्षा दिलाने में समर्थ हो गये हैं।
अल्पसंख्यक जैन समुदाय की शिक्षण संस्थाओं के पंजीकरण हेतु 30 जून, 2015 तक निदेशक, अल्पसंख्यक मामलात विभाग राजस्थान द्वारा आवेदन पत्र मांगे गये हैं। इन शिक्षण संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देश दिये गये हैं कि वे 30 जून तक आवेदन पत्र निदेशक अल्पसंख्यक मामलात विभाग राजस्थान जयपुर को प्रेषित कर दें।
अल्पसंख्यक जैन समुदाय के लिये जैन सांस्कृतिक एकेडमी एवं जैन साहित्य एकेडमी स्थापित करने के लिये भी उच्च स्तरीय प्रयास हो रहे हैं।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के प्रयासों से गतवर्ष भारी तादाद में अल्पसंख्यक जैन समुदाय के विद्यार्थियों को छात्रवृति आवेदन हेतु प्रेरित किया गया था और अच्छी खासी तादाद में बच्चों को छात्रवृति प्राप्त हो रही है।
खरतरगच्छ जन चेतना मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि देश में जैन समुदाय की आबादी मात्र कुछ लाख में सिमट कर रह गई है। इनमें से 80 प्रतिशत से ज्यादा मध्यम वर्ग एवं निम्र मध्यम वर्ग के परिवार हैं। जो अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में अभी तक असमर्थ रहते थे, लेकिन छात्रवृति की स्कीम के कारण अब वे अपने बच्चों को बिना किसी एहसान के उच्च शिक्षा दिलाने में समर्थ हो गये हैं।


