जयपुर (अग्रगामी) जयपुर नगर निगम क्षेत्र में बेतरतीब तरीके से गैरकानूनी बिना इजाजत तामीरात हो रही है। खासकर जयपुर नगर निगम क्षेत्र के पुराने चारदीवारी क्षेत्र में गैरकानूनी तरीके से बिना इजाजत तामीर लिये हुए अवैध रूप से व्यवसायिक कॉम्पलेक्स निर्माण नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों की मिलिभगत से भू-माफिया और भू-निर्माण माफिया बेरोकटोक कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इन्हें भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं और मंत्रियों का, जिनकी पहुंच मुख्यमंत्री तक है, का वरदहस्त प्राप्त है।
जयपुर नगर निगम क्षेत्र में तकरीबन सभी निर्माण कॉलम्स पर किये जा रहे हैं। इन कॉलम्स की गहराई भी तकरीबन कम होती है और अगर भूकंप का तेज झटका आ जाये तो तकरीबन ये निर्माण गिरने की स्थिति में होंगे। चारदीवारी के ज्यादातर निर्माण खासकर अवैध रूप से बनाये गये कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों के निर्माण असुरक्षित हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में बनाये जा रहे रेजीडेन्शियल और कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों की बात करें तो लगभग सभी नये निर्माण कॉलम्स पर हैं और इनके निर्माण में भूकम्प निरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में अधिकांश नये आवासीय और व्यावसायिक निर्माणों में बीआईएस कोडिंग के अनुसार निर्माण नहीं करवाया जाता है। जयपुर नगर निगम द्वारा निर्माण हेतु पेश किये जाने वाले नक्क्षों को पास करने में गंभीर अनियमितता बरती जा रही हैं। नेशनल बिल्डिंग कोड और बीआईएस कोड की गंभीर अवहेलना की जाती है। यही नहीं नोटों की गड्डियों के आगे सर झुका कर पुराने निर्माणों पर नई मंजिलें चढ़ाने की मौन स्वीकृति दे दी जाती हैं। चारदीवारी क्षेत्र में मंजिल चढ़ाने से पहले जयपुर नगर निगम के अफसर भवन निर्माणकर्ता को रेट्रोफिटिंग के लिये भी निर्देशित नहीं करते हैं। किसी भी निर्माणकर्ता को भवन के निर्माण की इजाजत देने से पहले स्ट्रेक्चरल इंजीनियर से भवन निर्माण हेतु विस्तृत प्लान बनवाकर लेने हेतु भवन निर्माणकर्ता को निर्देशित नहीं किया जाता है। यहां तक कि खुद जयपुर नगर निगम में भी स्ट्रेक्चरल इंजीनियर का एक भी पद नहीं है। ऐसी स्थिति में भवन निर्माण से संबंधित देखरेख की सारी जिम्मेदारी एक नौसिखिया जूनियर इंजीनियर के कमजोर कंधों पर डाल दी जाती है। कई बार तो सिविल जूनियर इंजीनियर भी उपलब्ध नहीं होते हैं और उनकी जगह निर्माण कार्यों के देखरेख की जिम्मेदारी मैकेनिकल इंजीनियरों को सौंप दी जाती है। जयपुर नगर निगम के चारदीवारी क्षेत्र की हालत तो यह है कि तंग गलियों में बड़े-बड़े अवैध कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स नेशनल बिल्डिंग कोड और बीआईएस कोड की अवहेलना कर राजमिस्त्रियों के सहारे ही बनाये जा रहे हैं। जो कि भूकंप निरोधी भी नहीं होते हैं और इन निर्माणों के लिये भूमि की जांच भी नहीं की जाती है।
भूकंप को पांच हिस्सों में विभाजित किया गया है पहला न्यूनतम शक्ति वाला, दूसरा उससे अधिक शक्ति वाला, तीसरा मध्यम शक्ति वाला और चौथा मध्यम से तेज शक्ति के बीच का और पांचवां तेज शक्ति वाला। जयपुर के अरावली पहाडी क्षेत्र सहित विद्याधर नगर और शास्त्री नगर क्षेत्र तृतीय श्रेणी के भूकंप मापन के अन्तर्गत आते हैं। अगर तेज गति का भूकंप जयपुर नगर निगम के चारदीवारी क्षेत्र में आ जाये तो कॉलम्स पर बनी हुई ज्यादातर बिल्डिंगों के गिरने का खतरा है। साथ ही पुराने निर्माणों पर मंजिलें चढ़ाने से भवन की नींव के भार को वहन करने की क्षमता को खो देती हैं और उसका नतीजा भूकंप आने पर सामने आता है कि जो अतिरिक्त भार भवन की नींव पर डाला जाता है वह जमींदोज हो जाता है।
जयपुर नगर निगम की बात करें तो इनके जोन आयुक्तों से लेकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी तक को अगर बिना इजाजत निर्माण हो रहे अवैध कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों के बारे में शिकायत करते हैं तो अधिकारी शिकायतों को दबाकर बैठ जाते हैं और कार्यवाही नहीं करते हैं। यहां तक कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने पर भी जोन आयुक्त स्तर पर उन शिकायतों पर आदेशों के बावजूद कार्यवाही नहीं की जाती है। इनकी इस हरकत पर उच्च अधिकारियों का न तो नियंत्रण है और न ही बेलगाम अफसरों पर कार्यवाही का मानस होता है!
एक शिकायतकर्ता ने गत 2 व 3 मई को भवन संख्या 2245, बापू बाजार, धूला हाउस के सामने जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम क्षेत्र में बनाये जा रहे व्यवसायिक निर्माण की सूचना वाट्सएप पर फोटो सहित अधिकारियों को दी तो, बजाय कार्यवाही के इन अधिकारियों ने उक्त निर्माण को पूरा कराने में कोई देरी नहीं करने के निर्माणकर्ता को निर्देश देकर काम को जारी रखा। बाद में शिकायतकर्ता ने निर्माण पूरा होने की सूचना भी 3 मई को अधिकारियों को वाट्सएप पर फोटो सहित प्रेषित की लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। यही नहीं 4 मई को लिखित शिकायत भी की गई जो रेकार्ड पर उपलब्ध है। लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी!
ज्ञातव्य रहे कि ज्यादा शिकायतें और ऊपरी दबाव आने की स्थिति में सम्बन्धित फाईलों को गायब कर दिया जाता है और गायब फाईलों के मामले में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाने में भी कोताही बरती जाती है।
जयपुर नगर निगम क्षेत्र में तकरीबन सभी निर्माण कॉलम्स पर किये जा रहे हैं। इन कॉलम्स की गहराई भी तकरीबन कम होती है और अगर भूकंप का तेज झटका आ जाये तो तकरीबन ये निर्माण गिरने की स्थिति में होंगे। चारदीवारी के ज्यादातर निर्माण खासकर अवैध रूप से बनाये गये कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों के निर्माण असुरक्षित हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में बनाये जा रहे रेजीडेन्शियल और कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों की बात करें तो लगभग सभी नये निर्माण कॉलम्स पर हैं और इनके निर्माण में भूकम्प निरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में अधिकांश नये आवासीय और व्यावसायिक निर्माणों में बीआईएस कोडिंग के अनुसार निर्माण नहीं करवाया जाता है। जयपुर नगर निगम द्वारा निर्माण हेतु पेश किये जाने वाले नक्क्षों को पास करने में गंभीर अनियमितता बरती जा रही हैं। नेशनल बिल्डिंग कोड और बीआईएस कोड की गंभीर अवहेलना की जाती है। यही नहीं नोटों की गड्डियों के आगे सर झुका कर पुराने निर्माणों पर नई मंजिलें चढ़ाने की मौन स्वीकृति दे दी जाती हैं। चारदीवारी क्षेत्र में मंजिल चढ़ाने से पहले जयपुर नगर निगम के अफसर भवन निर्माणकर्ता को रेट्रोफिटिंग के लिये भी निर्देशित नहीं करते हैं। किसी भी निर्माणकर्ता को भवन के निर्माण की इजाजत देने से पहले स्ट्रेक्चरल इंजीनियर से भवन निर्माण हेतु विस्तृत प्लान बनवाकर लेने हेतु भवन निर्माणकर्ता को निर्देशित नहीं किया जाता है। यहां तक कि खुद जयपुर नगर निगम में भी स्ट्रेक्चरल इंजीनियर का एक भी पद नहीं है। ऐसी स्थिति में भवन निर्माण से संबंधित देखरेख की सारी जिम्मेदारी एक नौसिखिया जूनियर इंजीनियर के कमजोर कंधों पर डाल दी जाती है। कई बार तो सिविल जूनियर इंजीनियर भी उपलब्ध नहीं होते हैं और उनकी जगह निर्माण कार्यों के देखरेख की जिम्मेदारी मैकेनिकल इंजीनियरों को सौंप दी जाती है। जयपुर नगर निगम के चारदीवारी क्षेत्र की हालत तो यह है कि तंग गलियों में बड़े-बड़े अवैध कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स नेशनल बिल्डिंग कोड और बीआईएस कोड की अवहेलना कर राजमिस्त्रियों के सहारे ही बनाये जा रहे हैं। जो कि भूकंप निरोधी भी नहीं होते हैं और इन निर्माणों के लिये भूमि की जांच भी नहीं की जाती है।
भूकंप को पांच हिस्सों में विभाजित किया गया है पहला न्यूनतम शक्ति वाला, दूसरा उससे अधिक शक्ति वाला, तीसरा मध्यम शक्ति वाला और चौथा मध्यम से तेज शक्ति के बीच का और पांचवां तेज शक्ति वाला। जयपुर के अरावली पहाडी क्षेत्र सहित विद्याधर नगर और शास्त्री नगर क्षेत्र तृतीय श्रेणी के भूकंप मापन के अन्तर्गत आते हैं। अगर तेज गति का भूकंप जयपुर नगर निगम के चारदीवारी क्षेत्र में आ जाये तो कॉलम्स पर बनी हुई ज्यादातर बिल्डिंगों के गिरने का खतरा है। साथ ही पुराने निर्माणों पर मंजिलें चढ़ाने से भवन की नींव के भार को वहन करने की क्षमता को खो देती हैं और उसका नतीजा भूकंप आने पर सामने आता है कि जो अतिरिक्त भार भवन की नींव पर डाला जाता है वह जमींदोज हो जाता है।
जयपुर नगर निगम की बात करें तो इनके जोन आयुक्तों से लेकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी तक को अगर बिना इजाजत निर्माण हो रहे अवैध कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों के बारे में शिकायत करते हैं तो अधिकारी शिकायतों को दबाकर बैठ जाते हैं और कार्यवाही नहीं करते हैं। यहां तक कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने पर भी जोन आयुक्त स्तर पर उन शिकायतों पर आदेशों के बावजूद कार्यवाही नहीं की जाती है। इनकी इस हरकत पर उच्च अधिकारियों का न तो नियंत्रण है और न ही बेलगाम अफसरों पर कार्यवाही का मानस होता है!
एक शिकायतकर्ता ने गत 2 व 3 मई को भवन संख्या 2245, बापू बाजार, धूला हाउस के सामने जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम क्षेत्र में बनाये जा रहे व्यवसायिक निर्माण की सूचना वाट्सएप पर फोटो सहित अधिकारियों को दी तो, बजाय कार्यवाही के इन अधिकारियों ने उक्त निर्माण को पूरा कराने में कोई देरी नहीं करने के निर्माणकर्ता को निर्देश देकर काम को जारी रखा। बाद में शिकायतकर्ता ने निर्माण पूरा होने की सूचना भी 3 मई को अधिकारियों को वाट्सएप पर फोटो सहित प्रेषित की लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। यही नहीं 4 मई को लिखित शिकायत भी की गई जो रेकार्ड पर उपलब्ध है। लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी!
ज्ञातव्य रहे कि ज्यादा शिकायतें और ऊपरी दबाव आने की स्थिति में सम्बन्धित फाईलों को गायब कर दिया जाता है और गायब फाईलों के मामले में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाने में भी कोताही बरती जाती है।



