हमने पिछले अंकों में साफ-साफ लिखा था कि कुशलचंद सुराना अपनी मनमर्जी से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर के फण्डस् का दुरूपयोग करवा रहे हैं। श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ (रजि.) जयपुर की साधारण सभा की बैठक में भी उजागर हुआ कि बना किसी तरह के बजट प्रावधानों के 65 लाख रूपये से अधिक राशि का अग्रिम (एडवांस) भुगतान अपने चहेते मारबल ठेकेदार को करवा दिया! हमने यह प्रकरण विस्तार से अग्रगामी संदेश के इन्हीं कालमों में साया किया था, जो अक्षरश: सच साबित हुआ। साधारण सभा की बैठक में यह तय किया गया कि मौनबाडी में लगाने के लिये जिस मारबल की खरीद करनी है, उसके लिये कोई बजट प्रावधान नहीं किया गया है और बिना किसी स्वीकृति के अध्यक्ष कुशलचंद सुराना ने अपनी राठौड़ी से लगभग 65 लाख रूपये का अग्रिम भुगतान अपने चहेते एक मारबल ठेकेदार को कर दिया गया है, जोकि गलत है। अत: साधारण सभा को स्थगित कर अगले तीन माह में साधारण सभा की स्थगित बैठक बुलाई जाकर बजट प्रावधान पेश किये जायें। हालांकि एक सदस्य प्रकाशचंद कोठारी ने बैठक दो माह में ही बुलाने का आग्रह किया था।
पिछली विशेष साधारण सभा की कार्यवाही को गैरजुम्मेदारान तरीके से लिखने का प्रकरण भी साधारण सभा की बैठक में सामने आया। आजीवन सदस्य हीराचंद जैन की आपत्ति पर उस गलती को सुधारने के लिये हीराचंद जैन की आपत्ति को असाधारण सभा की बैठक की मिनिट्श में शामिल किया गया। ज्ञातव्य रहे कि असाधारण सभा की कार्यवाही के दौरान हीराचंद जैन ने लिखित और मौखिक रूप से मालपुरा में अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन को खरीदने के मामले में कानूनी हवाला देकर कड़ा विरोध दर्ज करवाया था जिसे असाधारण सभा की कार्यवाही में दर्ज ही नहीं किया गया था। साधारण सभा में उपस्थित सभी सदस्यों के लिये भी आश्चर्य का विषय यह रहा कि असाधारण सभा की कार्यवाही को लिखने में ही 5 माह से अधिक का समय लगा दिया गया और साधारण सभा की कार्यवाही शुरू होने तक इस कार्यवाही को अध्यक्ष के पक्ष में लिखने का पूरा प्रयास होता रहा जोकि पूर्ण रूप से गैरकानूनी था!
जैन युनिवर्सिटी और शोध संस्थान के मुद्दे पर भी काफी बहस साधारण सभा में हुई। हीराचंद जैन ने लिखित प्रस्ताव रखा कि मौनबाड़ी से सलग्र खसरा नम्बर 535, 536 और 537 की पंचओसवालान के स्वामित्व की जमीन जिस पर गैरकानूनी बिना इजाजत तामिरात किये गये हैं जैन युनिवर्सिटी के उपयोग के लिये लेने हेतु प्रयास किये जायें।
साधारण सभा की बैठक हेतु ऐजेण्डा प्रसारित नहीं करने पर भी गहरी आपत्ती जाताई गई। सदस्यों का आरोप था कि बैठक का ऐजेण्डा उन्हें उपलब्ध नहीं करवाया गया। उल्लेखनीय है कि अखबारों में प्रकाशित विज्ञप्ति और हैण्ड बिल के माध्यम से कुछ इलाकों में वितरित साधारण सभा की विज्ञप्ति में भी फर्क होने से सदस्य अपनी नाराजगी प्रकट करते हुये नजर आये।
कार्यकारिणी सदस्यों और साधारण सदस्यों का सामुहिक एक प्रस्ताव यह भी रहा कि वर्तमान पदाधिकारी कार्यकारिणी सदस्यों और साधारण सदस्यों को साधारण सभा, असाधारण सभा और कार्यकारिणी की कार्यवाही की जानकारी मांगे जाने पर नहीं देते हैं। इस पर काफी हंगामे के बाद निर्णय हुआ की इस विषय में चाही गई सूचानाऐं तत्काल दिलवाई जायेंगी और भविष्य में सूचनाएं मांगे जाने पर समय पर उपलब्ध करवाई जायेगी।
देवद्रव्य की राशि को आय-व्यय में दिखाने पर गम्भीर आपत्ति व्यक्त की गई, वहीं सदस्यों ने इस बात पर भी गहरी आपत्ति जताई कि कार्यकारिणी की रिपोर्ट संघ विधान की धारा 13(25) में वर्णित तरीके से पेश नहीं की गई। बैठक में अन्य मुद्दों पर भी गहनता से चर्चा हुई और यह तय किया गया कि अगले कुछ समय पश्चात् साधारण सभा की स्थगित बैठक बुलाई जाकर सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर फैसले लिये जायें। क्रमश:
पिछली विशेष साधारण सभा की कार्यवाही को गैरजुम्मेदारान तरीके से लिखने का प्रकरण भी साधारण सभा की बैठक में सामने आया। आजीवन सदस्य हीराचंद जैन की आपत्ति पर उस गलती को सुधारने के लिये हीराचंद जैन की आपत्ति को असाधारण सभा की बैठक की मिनिट्श में शामिल किया गया। ज्ञातव्य रहे कि असाधारण सभा की कार्यवाही के दौरान हीराचंद जैन ने लिखित और मौखिक रूप से मालपुरा में अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन को खरीदने के मामले में कानूनी हवाला देकर कड़ा विरोध दर्ज करवाया था जिसे असाधारण सभा की कार्यवाही में दर्ज ही नहीं किया गया था। साधारण सभा में उपस्थित सभी सदस्यों के लिये भी आश्चर्य का विषय यह रहा कि असाधारण सभा की कार्यवाही को लिखने में ही 5 माह से अधिक का समय लगा दिया गया और साधारण सभा की कार्यवाही शुरू होने तक इस कार्यवाही को अध्यक्ष के पक्ष में लिखने का पूरा प्रयास होता रहा जोकि पूर्ण रूप से गैरकानूनी था!
जैन युनिवर्सिटी और शोध संस्थान के मुद्दे पर भी काफी बहस साधारण सभा में हुई। हीराचंद जैन ने लिखित प्रस्ताव रखा कि मौनबाड़ी से सलग्र खसरा नम्बर 535, 536 और 537 की पंचओसवालान के स्वामित्व की जमीन जिस पर गैरकानूनी बिना इजाजत तामिरात किये गये हैं जैन युनिवर्सिटी के उपयोग के लिये लेने हेतु प्रयास किये जायें।
साधारण सभा की बैठक हेतु ऐजेण्डा प्रसारित नहीं करने पर भी गहरी आपत्ती जाताई गई। सदस्यों का आरोप था कि बैठक का ऐजेण्डा उन्हें उपलब्ध नहीं करवाया गया। उल्लेखनीय है कि अखबारों में प्रकाशित विज्ञप्ति और हैण्ड बिल के माध्यम से कुछ इलाकों में वितरित साधारण सभा की विज्ञप्ति में भी फर्क होने से सदस्य अपनी नाराजगी प्रकट करते हुये नजर आये।
कार्यकारिणी सदस्यों और साधारण सदस्यों का सामुहिक एक प्रस्ताव यह भी रहा कि वर्तमान पदाधिकारी कार्यकारिणी सदस्यों और साधारण सदस्यों को साधारण सभा, असाधारण सभा और कार्यकारिणी की कार्यवाही की जानकारी मांगे जाने पर नहीं देते हैं। इस पर काफी हंगामे के बाद निर्णय हुआ की इस विषय में चाही गई सूचानाऐं तत्काल दिलवाई जायेंगी और भविष्य में सूचनाएं मांगे जाने पर समय पर उपलब्ध करवाई जायेगी।
देवद्रव्य की राशि को आय-व्यय में दिखाने पर गम्भीर आपत्ति व्यक्त की गई, वहीं सदस्यों ने इस बात पर भी गहरी आपत्ति जताई कि कार्यकारिणी की रिपोर्ट संघ विधान की धारा 13(25) में वर्णित तरीके से पेश नहीं की गई। बैठक में अन्य मुद्दों पर भी गहनता से चर्चा हुई और यह तय किया गया कि अगले कुछ समय पश्चात् साधारण सभा की स्थगित बैठक बुलाई जाकर सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर फैसले लिये जायें। क्रमश:


