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सत्ताधीश अपने राजधर्म का पालन करें या कुर्सी छोड़ें!

देश में मंहगाई ने कहर बरपा रखा है। राजनेता अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिये धर्माचार्यों के साथ मिल कर देश में धार्मिक एवं साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने में जुटे हैं। राजनेता हों या धार्मिक नेता सभी ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिये मंहगाई, भ्रष्टाचार, महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, जमाखोरी, भूमाफियाओं, बिल्डर माफियाओं को दरकिनार कर धार्मिक एवं जातिगत उन्मादों की शरण ले ली प्रतीत होता है। राजस्थान को ही लें तो देखेंगे कि नवनियुक्त राज्यपाल कल्याण सिंह के शपथग्रहण समारोह में जय श्री राम के नारे लगे! कल्याण सिंह की नियुक्ति राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर हुई है और यह समारोह शासकीय स्तर का था। अत: इस तरह के नारे नहीं लगाने चाहिये थे। ऐसा महसूस होने लगा है कि भारतीय जनता पार्टी और उसके आका संवैधानिक पदों की मर्यादा को खंडित करने पर तुले हैं और देश को हिंदुत्व का अखाड़ा बनाने की जिद पर अड़े हैं। हम यहां यह स्पष्ट कर दें की हिन्दू नाम का कोई शब्द ही नहीं है। इस शब्द की उत्पत्ति इण्डस शब्द से हुई है इण्डस एक नदी का नाम है जोकि तिब्बत से प्रारंभ होती है और अफगानिस्तान-काश्मीर-पाकिस्तान में होते हुए सिंधु नदी के नाम से अरब सागर में विलीन होती है इस नदी के बहाव क्षेत्र के उत्तर-पश्चिम में बसे लोगों को इण्डस (हिन्दू) कहा जाता रहा है। इण्डस (हिन्दुओं) की उत्पत्ति मूल रूप से मेसोपोटामिया में पल्लिवित हुई हिब्रू संस्कृति के विघटन से पैदा हुये चार धर्मों इण्डसरिलीजन (हिन्दू धर्म), ईसाई, यहूदी और इस्लाम के रूप में हुई। इण्डसरिलीजन (हिन्दू धर्म) का भारत से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है और इण्डसरिलीजन (हिन्दू धर्म) की उत्पत्ति को मेसोपोटोमिया में पल्लवित हिब्रू संस्कृति से हुई है ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट हो जाता है कि हिन्दू शब्द से भारत का कोई लेना देना नहीं है। अत: स्पष्ट है कि एक सोची समझी साजिश के तहत भारत का नाम बदल कर हिन्दुस्तान करने की साजिशों को गुपचुप तरीके से अंजाम देने की साजिशें रची जा रही है जोकि देशहित में उचित नहीं है। इस देश का नाम भारत था और भारत रहेगा इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता है।  इस समय देश में मंहगाई, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, जमाखोरी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महिलाओं तथा बच्चों व आदिवासियों पर अत्याचार अपने चर्म पर है। सत्ताधीशों और राजनेताओं को चाहिये कि वे इन समस्याओं से जनता को निजात दिलायें और अनावश्यक मुद्दों को उठाकर देश में व्याप्त मंहगाई, जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिलाओं-बच्चों और आदिवासियों पर अत्याचार के मुद्दों को गौण नहीं करे। इन समस्याओं से जनता को निजात दिलाने की जिम्मेदारी सत्ताधीशों और राजनेताओं की है और इसी में उनकी भलाई है।

 
AGRAGAMI SANDESH

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