जयपुर (अग्रगामी) देश की जनता ने संसद (लोकसभा) में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत के साथ स्थापित कियाइस आशा और विश्वास के साथ कि यह पार्टी लोकसभा के चुनाव के दौरान मंहगाई, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, भ्रष्टाचार, भू-माफियाओं, बेरोजगारी, महिलाओं, बच्चों-पिछड़े वर्ग पर हो रहे अत्याचारों से निजात दिलाने के लिये दम भर रही थी। लेकिन लोकसभा चुनाव जीतने के बाद इस पार्टी के नेता अपने वादों को भूल गये और सरस्वती नदी को खोज निकालने, आरटीओ ऑफिस समाप्त करने व अन्य गैर जरूरी कार्यों को अंजाम में जुट गये। लालकिले की प्राचीर से कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओं और बालिकाओं पर अत्याचार एवं स्कूलों में बालक बालिकाओं के लिये प्राथमिकता के आधार पर अलग से शौचालय के निर्माण की बात करने वाले नरेन्द्र मोदी इन मुद्दों को भूल गये लगते हैं। अब नरेन्द्र मोदी का एक ही मकसद रह गया है कि झारखंड, जम्मू काश्मीर, हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलवाने के लिये दिमाग पचा रहे हैं।
हालांकि जो घोषणाएं लालकिले के प्राचीर नरेन्द्र मोदी ने की है उनमें से योजना आयोग के विकेन्द्रीकरण को छोड़कर बाकी सारी योजनाएं कांग्रेस पार्टी की डॉ.मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकार के दौरान ही प्रारंभ हो चुकी हैं तथा नई सरकार ने कोई ऐसी योजना पिछले तीन महीनों में प्रारम्भ ही नहीं की है जिससे आम अवाम को किसी तरह का कोई फायदा मिले। ऐसी स्थिति के कारण आम अवाम में नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश पनपना शुरू हो गया है।
राजस्थान को ही लें, तो भारतीय जनता पार्टी की वसुन्धरा राजे सरकार का राज्य में मंहगाई, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, भू-माफियाओं, भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और महिलाओं, बालिकाओं के अत्याचार के मुद्दे पर मौन है। राजस्थान में मंत्रीमण्डल के गठन होने के बाद से ही प्रदेश की सरकार राजधानी जयपुर से लापता है कभी भरतपुर संभाग, तो कभी बीकानेर संभाग और अब उदयपुर संभाग में मंत्रीमण्डल सहित मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे गांव-गांव भटक रहीं है इसके उपरान्त भी राजस्थान की वसुन्धरा राजे सरकार प्रदेश की जनता की दिक्कतों को दूर करने में असफल है! यह समाचार लिखने तक वसुन्धरा राजे सरकार उदयपुर संभाग में भटक रही है। उन्हें समग्र राजस्थान की जनता के दुख तकलीफों की कोई चिंता नहीं है।
राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे पूरी कोशिश में जुटी है कि वे खुद या उनके लड़के सांसद दुष्यन्त सिंह को नरेन्द्र मोदी अपने मंत्रीमण्डल में शामिल करलें ताकि केंद्र सरकार में उनका दबदा बढ़ सके यह प्रयास भी हो रहे हैं कि दुष्यन्त सिंह से इस्तीफा दिलवा कर उनकी सीट झालावाड़ से श्रीमती राजे लोकसभा का चुनाव लड़े और जीत जाने की स्थिति में केंद्रीय मंत्रीमण्डल में अपना दावा पेश कर सके क्योंकि राजस्थान विधानसभा में दिग्गज भाजपाई नेताओं के आने के कारण मैडम जी का उन पर नियन्त्रण नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि राज्य मंत्रीमण्डल का भी विस्तार नहीं हो पा रहा है और कोई न कोई बहाना बनाकर मंत्रीमण्डल के विस्तार को टाला जा रहा है।
राजस्थान की जनता में भाजपानिहित वसुन्धरा राजे सरकार की जनहित के मुद्दों पर निष्क्रियता से आम अवाम में आक्रोश पनपता ही जा रहा है। उधर अवाम से जुड़ी शासकीय योजनाओं की शुरूआत पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा की जाने के कारण भी वसुन्धरा राजे सरकार के पास नया कुछ करने के लिये बचा ही नहीं है। यही कारण है कि वह संभाग दर संभाग भटक रहीं है ताकि पिछली अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ कार्यवाही करने के लिये कमियां ढूंढ सके नया कुछ करने के लिये वसुन्धरा राजे सरकार के पास कुछ भी नहीं है वहीं पिछली अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ कार्यवाही करने हेतु कोई ठोस मुद्दा मिल नहीं रहा है और संभाग दर संभाग भटकने से भी जनसमस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। अब तो रब खैर करे भाजपाई सरकारों पर ताकि वे अपना पांच साल का कार्यकाल जसतस पूरा कर सके!
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रचारक भी राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के क्रियाकलापों से बेहद नाराज हैं। पिछले दिनों उन्होंने अपनी नाराजगी से सुरेश भैयाजी जोशी को सवाईमाधोपुर में संघ की आयोजित एक मीटिंग में अवगत भी कराया था। लेकिन वसुन्धरा राजे की राठौड़ी के आगे किसी भी भाजपाई अथवा आरएसएस के नेता कि पिरानगी नहीं चल पा रही है। आगे-आगे देखिये होता है क्या!
हालांकि जो घोषणाएं लालकिले के प्राचीर नरेन्द्र मोदी ने की है उनमें से योजना आयोग के विकेन्द्रीकरण को छोड़कर बाकी सारी योजनाएं कांग्रेस पार्टी की डॉ.मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकार के दौरान ही प्रारंभ हो चुकी हैं तथा नई सरकार ने कोई ऐसी योजना पिछले तीन महीनों में प्रारम्भ ही नहीं की है जिससे आम अवाम को किसी तरह का कोई फायदा मिले। ऐसी स्थिति के कारण आम अवाम में नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश पनपना शुरू हो गया है।
राजस्थान को ही लें, तो भारतीय जनता पार्टी की वसुन्धरा राजे सरकार का राज्य में मंहगाई, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, भू-माफियाओं, भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और महिलाओं, बालिकाओं के अत्याचार के मुद्दे पर मौन है। राजस्थान में मंत्रीमण्डल के गठन होने के बाद से ही प्रदेश की सरकार राजधानी जयपुर से लापता है कभी भरतपुर संभाग, तो कभी बीकानेर संभाग और अब उदयपुर संभाग में मंत्रीमण्डल सहित मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे गांव-गांव भटक रहीं है इसके उपरान्त भी राजस्थान की वसुन्धरा राजे सरकार प्रदेश की जनता की दिक्कतों को दूर करने में असफल है! यह समाचार लिखने तक वसुन्धरा राजे सरकार उदयपुर संभाग में भटक रही है। उन्हें समग्र राजस्थान की जनता के दुख तकलीफों की कोई चिंता नहीं है।
राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे पूरी कोशिश में जुटी है कि वे खुद या उनके लड़के सांसद दुष्यन्त सिंह को नरेन्द्र मोदी अपने मंत्रीमण्डल में शामिल करलें ताकि केंद्र सरकार में उनका दबदा बढ़ सके यह प्रयास भी हो रहे हैं कि दुष्यन्त सिंह से इस्तीफा दिलवा कर उनकी सीट झालावाड़ से श्रीमती राजे लोकसभा का चुनाव लड़े और जीत जाने की स्थिति में केंद्रीय मंत्रीमण्डल में अपना दावा पेश कर सके क्योंकि राजस्थान विधानसभा में दिग्गज भाजपाई नेताओं के आने के कारण मैडम जी का उन पर नियन्त्रण नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि राज्य मंत्रीमण्डल का भी विस्तार नहीं हो पा रहा है और कोई न कोई बहाना बनाकर मंत्रीमण्डल के विस्तार को टाला जा रहा है।
राजस्थान की जनता में भाजपानिहित वसुन्धरा राजे सरकार की जनहित के मुद्दों पर निष्क्रियता से आम अवाम में आक्रोश पनपता ही जा रहा है। उधर अवाम से जुड़ी शासकीय योजनाओं की शुरूआत पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा की जाने के कारण भी वसुन्धरा राजे सरकार के पास नया कुछ करने के लिये बचा ही नहीं है। यही कारण है कि वह संभाग दर संभाग भटक रहीं है ताकि पिछली अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ कार्यवाही करने के लिये कमियां ढूंढ सके नया कुछ करने के लिये वसुन्धरा राजे सरकार के पास कुछ भी नहीं है वहीं पिछली अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ कार्यवाही करने हेतु कोई ठोस मुद्दा मिल नहीं रहा है और संभाग दर संभाग भटकने से भी जनसमस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। अब तो रब खैर करे भाजपाई सरकारों पर ताकि वे अपना पांच साल का कार्यकाल जसतस पूरा कर सके!
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रचारक भी राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के क्रियाकलापों से बेहद नाराज हैं। पिछले दिनों उन्होंने अपनी नाराजगी से सुरेश भैयाजी जोशी को सवाईमाधोपुर में संघ की आयोजित एक मीटिंग में अवगत भी कराया था। लेकिन वसुन्धरा राजे की राठौड़ी के आगे किसी भी भाजपाई अथवा आरएसएस के नेता कि पिरानगी नहीं चल पा रही है। आगे-आगे देखिये होता है क्या!


