जयपुर (अग्रगामी) भरतपुर सम्भाग से बीकानेर पहुंची भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार विधानसभा सत्र् के अवसान के बाद अब उदयपुर का रूख करने के सोच में डूबी है। उदयपुर सम्भाग के हुक्काम अभी से ही सरकार की अगवानी और खातिरदारी की तैयारियों में जुट गये हैं।
प्रदेश में टोल टैक्स में बढ़ोतरी, मंहगाई का ग्राफ ऊंचा होने, कानून और व्यवस्था के हालात नाजुक होने, बिजली उत्पादन और वितरण में फिसड्डी होने के बावजूद बिजली दरों में वृद्धि करने तथा अब बिजली वितरण प्राईवेट सेक्टर के उद्योगपतियों के हवाले करने की तैयारी के बीच मंहगाई से जूझ रहे अवाम की पीड़ा को दरकिनार कर सरकार का जिलों की तरफ पलायन करना साफ तौर पर जमाखोरों, कालाबाजारियों, भ्रष्टाचारियों, भू-माफियाओं, बिल्डर माफियाओं और मुनाफाखोरों के साथ सरकार की मिलीभगत को उजागर करता है। क्या कारण है, राज्य की दो तिहाई बहुमत से चुनिंदा सरकार जिलों में भाग रही है और प्रदेश की राजधानी जयपुर और पूरा प्रदेश शासन सचिवालय के दोयम दर्जे के अफसरों के हवाले छोड़ दिया गया है।
राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार भरतपुर सम्भाग में भी गांव-गांव तक भटकी थी, लेकिन उस दौरान प्राप्त अवाम की शिकायतों में से 30 प्रतिशत से ज्यादा शिकायतें सरकारी दफ्तरों में कार्यवाही किये जाने के इंतजार में लम्बित पड़ी है। जब भरतपुर सम्भाग के गांव-गांव, गली कूंचे में भटकने वाली सरकार प्राप्त शिकायतों में से 30 प्रतिशत से ज्यादा आवेदनों/प्रार्थना पत्रों पर कार्यवाही करने में नाकारा साबित हो चुकी है तो फिर क्यों बीकानेर सम्भाग में भटक रही है और क्यों उदयपुर सम्भाग में पिकनिक मनाने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है?
राज्य की जनता मंहगाई से बुरी तरह पीडि़त है। केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का कहना है कि जमाखोरों, कालाबाजारियों, मुनाफाखोरों पर कार्यवाही करने का अधिकार राज्य सरकार का है और जनता को त्वरित न्याय दिलवाने के लिये जमाखोरों, कालाबाजारियों और मुनाफाखोरों के मामलों के लिये विशेष अदालतें तत्काल खोली जायें। लेकिन राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार जमाखोरों, कालाबाजारियों, मुनाफाखोरों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय राजधानी जयपुर से ही पलायन कर गई है!
भू-माफियाओं और बिल्डर माफियाओं का प्रदेश में जंगलराज कायम हो चुका है। अकेले राज्य की राजधानी जयपुर के पुराने परकोटा क्षेत्र का हर पांचवां मकान बिल्डर माफिया के कब्जे में पहुंच गया है और बिल्डर माफिया स्थानीय निकायों के अफसरों से मिलीभगत कर बिना सरकारी इजाजत लिये गैरकानूनी कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का धडल्ले से निर्माण कर रहे हैं और मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे और उनके अधीनस्थ हुक्कामों की हैसियत भी नहीं है इस बिल्डर माफिया की गर्दन नापने की। यह तो तब है जब नगरीय विकास और स्वायत्त शासन विभाग की प्रभारी मंत्री खुद मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ही हैं।
राज्य की राजधानी जयपुर में कानून और व्यवस्था के हालात बद् से बद्तर होते जा रहे हैं। महिलाओं पर अत्याचार, चोरी-डकैती के मामलों का ग्राफ ऊपर की तरफ जा रहा है। यह महकमा भी मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के पास है। अब मैडम जी ही बता सकती हैं कि राज्य की जनता के अच्छे दिन कब आयेंगे? आयेंगे भी या नहीं! क्योंकि आम अवाम की जुबान पर एक ही बात आने लगी है और वह है- या रब खैर करे?
प्रदेश में टोल टैक्स में बढ़ोतरी, मंहगाई का ग्राफ ऊंचा होने, कानून और व्यवस्था के हालात नाजुक होने, बिजली उत्पादन और वितरण में फिसड्डी होने के बावजूद बिजली दरों में वृद्धि करने तथा अब बिजली वितरण प्राईवेट सेक्टर के उद्योगपतियों के हवाले करने की तैयारी के बीच मंहगाई से जूझ रहे अवाम की पीड़ा को दरकिनार कर सरकार का जिलों की तरफ पलायन करना साफ तौर पर जमाखोरों, कालाबाजारियों, भ्रष्टाचारियों, भू-माफियाओं, बिल्डर माफियाओं और मुनाफाखोरों के साथ सरकार की मिलीभगत को उजागर करता है। क्या कारण है, राज्य की दो तिहाई बहुमत से चुनिंदा सरकार जिलों में भाग रही है और प्रदेश की राजधानी जयपुर और पूरा प्रदेश शासन सचिवालय के दोयम दर्जे के अफसरों के हवाले छोड़ दिया गया है।
राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार भरतपुर सम्भाग में भी गांव-गांव तक भटकी थी, लेकिन उस दौरान प्राप्त अवाम की शिकायतों में से 30 प्रतिशत से ज्यादा शिकायतें सरकारी दफ्तरों में कार्यवाही किये जाने के इंतजार में लम्बित पड़ी है। जब भरतपुर सम्भाग के गांव-गांव, गली कूंचे में भटकने वाली सरकार प्राप्त शिकायतों में से 30 प्रतिशत से ज्यादा आवेदनों/प्रार्थना पत्रों पर कार्यवाही करने में नाकारा साबित हो चुकी है तो फिर क्यों बीकानेर सम्भाग में भटक रही है और क्यों उदयपुर सम्भाग में पिकनिक मनाने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है?
राज्य की जनता मंहगाई से बुरी तरह पीडि़त है। केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का कहना है कि जमाखोरों, कालाबाजारियों, मुनाफाखोरों पर कार्यवाही करने का अधिकार राज्य सरकार का है और जनता को त्वरित न्याय दिलवाने के लिये जमाखोरों, कालाबाजारियों और मुनाफाखोरों के मामलों के लिये विशेष अदालतें तत्काल खोली जायें। लेकिन राजस्थान की भाजपानीत वसुन्धरा राजे सरकार जमाखोरों, कालाबाजारियों, मुनाफाखोरों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय राजधानी जयपुर से ही पलायन कर गई है!
भू-माफियाओं और बिल्डर माफियाओं का प्रदेश में जंगलराज कायम हो चुका है। अकेले राज्य की राजधानी जयपुर के पुराने परकोटा क्षेत्र का हर पांचवां मकान बिल्डर माफिया के कब्जे में पहुंच गया है और बिल्डर माफिया स्थानीय निकायों के अफसरों से मिलीभगत कर बिना सरकारी इजाजत लिये गैरकानूनी कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का धडल्ले से निर्माण कर रहे हैं और मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे और उनके अधीनस्थ हुक्कामों की हैसियत भी नहीं है इस बिल्डर माफिया की गर्दन नापने की। यह तो तब है जब नगरीय विकास और स्वायत्त शासन विभाग की प्रभारी मंत्री खुद मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ही हैं।
राज्य की राजधानी जयपुर में कानून और व्यवस्था के हालात बद् से बद्तर होते जा रहे हैं। महिलाओं पर अत्याचार, चोरी-डकैती के मामलों का ग्राफ ऊपर की तरफ जा रहा है। यह महकमा भी मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के पास है। अब मैडम जी ही बता सकती हैं कि राज्य की जनता के अच्छे दिन कब आयेंगे? आयेंगे भी या नहीं! क्योंकि आम अवाम की जुबान पर एक ही बात आने लगी है और वह है- या रब खैर करे?


