जयपुर (अग्रगामी) राजस्थान में 163 सीटों के साथ दो तिहाई से ज्यादा बहुमत से वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में बनी भारतीय जनता पार्टी की सरकार मिशन-25 के लिये हाथ-पैर मार कर अब अपने दड़बों में सुस्ता रही नजर आती है और राजस्थान की जनता मंहगाई, जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी की धधकती आग में जल रही है। राज्य की महिलाऐं सुरक्षित नहीं है। ताजा मामलों में बूंदी जिले के दबलाना थाना क्षेत्र के रेणफार्म स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में एक अध्यापिका के साथ चार जनों द्वारा सामुहिक बलात्कार, दौसा और चूरू जिले में नाबालिग बालिकाओं से सामुहिक बलात्कार के घिनौने मामले राजस्थान की भाजपा सरकार की गैरजुम्मेदारान लापरवाही और दायीत्वहीनता को दर्शाता है। तथा ऐसी जनविरोधी सरकार जो महिलाओं की हिफाजत नहीं कर सकती है उसको सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है!
चार महिने पहिले जब वसुन्धरा राजे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब यह कहा गया था कि भाजपा की वसुन्धरा राजे सरकार और भारतीय जनता पार्टी का मुख्य लक्ष्य लोकसभा चुनावों के लिये मिशन-25 है और मिशन पच्चीस पूरा होने के बाद ही अवाम के दु:ख तकलीफों की तरफ ध्यान दिया जायेगा। चूंकि राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों के लिये मतदान गत 17 अप्रेल और 24 अप्रेल को हो चुका है और मिशन-25 में जुटी भाजपा सरकार का इस मिशन से पिण्डा छूट चुका है, फिर राजस्थान की भाजपा सरकार क्यों आम अवाम की पीड़ा-दु:खदर्दों से किनारा कर रही है?
शर्मनाक स्थिति तो यह है कि बूंदी जिले की हिंदोली ब्लाक और दबलाना पुलिस थाना के अंतर्गत रेनफार्म स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में चार दरिंदों ने स्कूल के क्लासरूम में एक शिक्षिका के साथ सामुहिक बलात्कार किया और उसे अर्धनग्र अवस्था में छोड़ भागे। हालांकि आरोपी गिरफ्तार किये जा चुके हैं, परन्तु सवाल उठता है कि इतना बड़ा जघन्य कांड़ हो गया लेकिन राज्य के शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ को घटनास्थल पर जाने और पीडि़ता से मिलकर उसे सांत्वना देने की फुरसत तक नहीं मिल पा रही है! पूरे प्रदेश में महिला शिक्षिकाएं सुरक्षित नहीं है। इन्हें चार-पांच किलोमीटर पैदल चल कर स्कूल जाना पड़ता है। जबकि वसुन्धरा राजे के मंत्रिमण्डल के मंत्रियों और शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ के मर्जीदानों की पत्नियों के तबादले सारे कानूनों को तिलांजली देकर तुरत-फुरत जयपुर शहर में स्थित उन शिक्षण संस्थानों में कर दिये गये जहां उनकी जरूरत ही नहीं है।
छोटे-मोटे सियासी मुद्दों पर शोर-शराबा मचाने वाली भारतीय जनता पार्टी की फैक्ट फाइण्डिग टीम क्यों रेनफार्म राजकीय प्राइमरी स्कूल में ग्राउण्ड फैक्ट तलाशने नहीं गई? दिल्ली की निर्भया मुद्दे पर एक बड़ा जनआंदोलन उठ खड़ा हुआ था लेकिन रेनफार्म राजकीय प्राथमिक स्कूल की सामुहिक बलात्कार पीडि़ता के लिये दो आंसू टपकाने वाला कोई राजनेता आजतक पीडि़ता के पास नहीं पहुंचा? क्या यह हकीकत राजनेताओं के लिये चुल्लूभर पानी में डूबने लायक नहीं है?
सवाल यहां यह भी उठता है कि राजस्थान विधानसभा में दो तिहाई से ज्यादा बहुमत से जीत कर आई भारतीय जनता पार्टी के सामने मिशन-25 महत्वपूर्ण मुद्दा था या फिर उसे भारी बहुमत से जिताने वाली जनता के दु:खदर्दों को दूर करना उसकी प्राथमिक जुम्मेदारी थी!
लेकिन अवाम के लिये पीड़ादायक स्थिति यह है कि मिशन-25 चाहे वह अंबानी-अडानी ग्रुपों द्वारा समर्थित राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का मिशन हो या फिर आरएसएस के अग्रिम संगठन भाजपा का हो। उसका अंतिम चरण याने की मतदान हो चुका है और अब सरकार को अपनी खुमारी छोड़ कर जनकल्याण के लिये जुट जाना चाहिये। एक बात ओर! धौलपुर में बैठ कर कोई भी सरकार जनकल्याण नहीं कर सकती है। इसलिये धौलपुर जनकल्याण नौटंकी को दरकिनार कर सरकार सचिवालय में बैठ कर जिला प्रशासन को चुस्त-दुरूस्त करे सरकार! खास कर कानून और व्यवस्था की स्थिति को तत्काल चाकचौबंद करे। अन्यथा कुर्सी छोड़े, उनके लिये जो जनता के काम करने में माहिर हों? हम कह सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में आज भी ऐसे नेता हैं जो प्रशासनिक पकड़ रखते हैं। उनका उपयोग करे वसुन्धरा राजे सरकार और उनके शिक्षामंत्री। अन्यथा तत्काल इस्तीफा दें!
चार महिने पहिले जब वसुन्धरा राजे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब यह कहा गया था कि भाजपा की वसुन्धरा राजे सरकार और भारतीय जनता पार्टी का मुख्य लक्ष्य लोकसभा चुनावों के लिये मिशन-25 है और मिशन पच्चीस पूरा होने के बाद ही अवाम के दु:ख तकलीफों की तरफ ध्यान दिया जायेगा। चूंकि राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों के लिये मतदान गत 17 अप्रेल और 24 अप्रेल को हो चुका है और मिशन-25 में जुटी भाजपा सरकार का इस मिशन से पिण्डा छूट चुका है, फिर राजस्थान की भाजपा सरकार क्यों आम अवाम की पीड़ा-दु:खदर्दों से किनारा कर रही है?
शर्मनाक स्थिति तो यह है कि बूंदी जिले की हिंदोली ब्लाक और दबलाना पुलिस थाना के अंतर्गत रेनफार्म स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में चार दरिंदों ने स्कूल के क्लासरूम में एक शिक्षिका के साथ सामुहिक बलात्कार किया और उसे अर्धनग्र अवस्था में छोड़ भागे। हालांकि आरोपी गिरफ्तार किये जा चुके हैं, परन्तु सवाल उठता है कि इतना बड़ा जघन्य कांड़ हो गया लेकिन राज्य के शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ को घटनास्थल पर जाने और पीडि़ता से मिलकर उसे सांत्वना देने की फुरसत तक नहीं मिल पा रही है! पूरे प्रदेश में महिला शिक्षिकाएं सुरक्षित नहीं है। इन्हें चार-पांच किलोमीटर पैदल चल कर स्कूल जाना पड़ता है। जबकि वसुन्धरा राजे के मंत्रिमण्डल के मंत्रियों और शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ के मर्जीदानों की पत्नियों के तबादले सारे कानूनों को तिलांजली देकर तुरत-फुरत जयपुर शहर में स्थित उन शिक्षण संस्थानों में कर दिये गये जहां उनकी जरूरत ही नहीं है।
छोटे-मोटे सियासी मुद्दों पर शोर-शराबा मचाने वाली भारतीय जनता पार्टी की फैक्ट फाइण्डिग टीम क्यों रेनफार्म राजकीय प्राइमरी स्कूल में ग्राउण्ड फैक्ट तलाशने नहीं गई? दिल्ली की निर्भया मुद्दे पर एक बड़ा जनआंदोलन उठ खड़ा हुआ था लेकिन रेनफार्म राजकीय प्राथमिक स्कूल की सामुहिक बलात्कार पीडि़ता के लिये दो आंसू टपकाने वाला कोई राजनेता आजतक पीडि़ता के पास नहीं पहुंचा? क्या यह हकीकत राजनेताओं के लिये चुल्लूभर पानी में डूबने लायक नहीं है?
सवाल यहां यह भी उठता है कि राजस्थान विधानसभा में दो तिहाई से ज्यादा बहुमत से जीत कर आई भारतीय जनता पार्टी के सामने मिशन-25 महत्वपूर्ण मुद्दा था या फिर उसे भारी बहुमत से जिताने वाली जनता के दु:खदर्दों को दूर करना उसकी प्राथमिक जुम्मेदारी थी!
लेकिन अवाम के लिये पीड़ादायक स्थिति यह है कि मिशन-25 चाहे वह अंबानी-अडानी ग्रुपों द्वारा समर्थित राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का मिशन हो या फिर आरएसएस के अग्रिम संगठन भाजपा का हो। उसका अंतिम चरण याने की मतदान हो चुका है और अब सरकार को अपनी खुमारी छोड़ कर जनकल्याण के लिये जुट जाना चाहिये। एक बात ओर! धौलपुर में बैठ कर कोई भी सरकार जनकल्याण नहीं कर सकती है। इसलिये धौलपुर जनकल्याण नौटंकी को दरकिनार कर सरकार सचिवालय में बैठ कर जिला प्रशासन को चुस्त-दुरूस्त करे सरकार! खास कर कानून और व्यवस्था की स्थिति को तत्काल चाकचौबंद करे। अन्यथा कुर्सी छोड़े, उनके लिये जो जनता के काम करने में माहिर हों? हम कह सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में आज भी ऐसे नेता हैं जो प्रशासनिक पकड़ रखते हैं। उनका उपयोग करे वसुन्धरा राजे सरकार और उनके शिक्षामंत्री। अन्यथा तत्काल इस्तीफा दें!


