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पचास करोड़ इकठ्ठे होंगे बिल्डरों-भूमाफियाओं से!

जयपुर (अग्रगामी) भारतीय जनता पार्टी के लिये चुनावी चंद जुटाने के चक्कर में जयपुर नगर निगम के अफसर और कारिंदे जयपुर शहर में गैर कानूनी तरीके से अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने वाले भू-माफियाओं और बिल्डरों पर शिकंजा कसने में कोताही बरत रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अकेले जयपुर महानगर के चार दिवारी क्षेत्र में निर्माणाधीन 300 से ज्यादा अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के मालिक भू-माफियाओं और बिल्डरों से लगभग 50 करोड़ रूपये इकठ्ठा करने की योजना बताई जाती है।
सूत्र बताते हैं कि राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान भी जयपुर महानगर के चार दिवारी क्षेत्र में अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माता भू-माफियाओं और बिल्डरों से मोटा चुनावी चंद वसूला गया था। साथ ही जयपुर नगर निगम के अफसरों ने भी इन भू-माफिया बिल्डरों से मोटी चांदी कूटी थी।
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेके्रटरी कामरेड़ हीराचंद जैन ने मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे से सीधा सवाल किया है कि अगर जयपुर नगर निगम के अफसर और कारिंदे रिश्वतखोरी नहीं कर रहे हैं और अगर भारतीय जनता पार्टी के लिये भू-माफिया बिल्डरों से चंदा इकठ्ठा नहीं किया जा रहा है तो फिर जयपुर महानगर के चार दिवारी क्षेत्रों में बिना इजाजत गैर कानूनी अवैध निर्माण कैसे हो रहे हैं? क्यों उन पर नगर निगम के हुक्काम कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।
कामरेड़ हीराचंद जैन ने बताया कि चार दिवारी क्षेत्र में निगम द्वारा चलाया गया नगर निगम आपके द्वार-वाजिब समस्या-वाजिब समाधान अभियान पहिले ही टांय-टांय फिस्स हो चुका है। खुद जयपुर नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लालचंद असवाल ने भी इस अभियान में पैदल मार्च के जरिये शिरकत की और जयपुर नगर निगम के भ्रष्ट अकर्मण्य अफसरों की करतूतें देखी। लेकिन शर्मनाक स्थिति यह भी रही कि निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लालचंद असवाल, हवामहल जोन पूर्व आयुक्त इंद्रजीत सिंह, हवामहल जोन पश्चिम आयुक्त मदनकुमार शर्मा और इनके लाव लश्कर को एक भी बिना इजाजत गैर कानूनी तरीके से बना अवैध कॉमर्शियल कामप्लेक्स नजर नहीं आया। जबकि इस दौरान अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों में निर्माण कार्य निरन्तर जारी रहा। अब जयपुर नगर निगम के सीईओ लालचंद असवाल साहब बतायें कि उनके नगर निगम में मोटी चांदी कूटने का काम उनके आने के बाद बदस्तूर जारी है या नहीं! अगर नहीं तो फिर अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों का निर्माण कार्य कैसे जारी है। क्योंकि नहीं उन पर कार्यवाही हो रही है? क्यों उन्हें अंकुशित नहीं किया जा रहा है।
जयपुर नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लालचंद असवाल यह भी बतायें कि हवामहल जोन पश्चिम के प्लाट नम्बर-14, फिल्म कॉलोनी, दूनी हाऊस, चौड़ा रास्ता जिसकी फाइल सरण संख्या 10/2064 (रज्जू) दिनांक 15 अक्टूबर, 2007 के सम्बन्ध में जयपुर नगर निगम ने आवासीय निर्माण हेतु इजाजत तामीर दी थी। लेकिन जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पश्चिम के जोन आयुक्त, रेवेन्यू अफसर, सहायक अभियन्ता, कनिष्ठ अभियन्ता, सर्वेयर और गजधर ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सतर्कता आयुक्त और निदेशक विधि से मिलीभगत कर वहां आवासीय निर्माण के स्थान पर एक बड़ा कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बनवा दिया। अण्डरग्राउण्ड और तीन स्टोरी बिना इजाजत तामीर के बने इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स पर कार्यवाही करने की हिमाकत जयपुर नगर निगम का कोई अफसर नहीं कर सकता है क्योंकि भू-माफिया बिल्डर ने सभी सम्बन्धित अफसरों के जेबों में नोटों की गड्डियां जो ठूंस दी है। लगता है कि हाथों में पहिनने की चांदी की चूडियां भी भेंट की हो!
इधर प्लाट के नक्क्षे में कुल निर्मित क्षेत्र 1566.81 वर्ग मीटर आवासीय निर्माण बताया गया है। जिसमें से भूतल पर 514.02 वर्ग मीटर, प्रथम तल पर 526.29 वर्ग मीटर, द्वितीय तल पर 526.39 वर्ग मीटर आवासीय निर्माण की स्वीकृति जयपुर नगर निगम ने जारी की थी।
लेकिन शर्मनाक स्थिति यह है कि जयपुर नगर निगम के भ्रष्ट और बेशर्म अफसरों और कारिंदों के सहयोग से इस आवासीय स्थल पर आवासीय निर्माण की जगह लगभग एक सौ दुकानें बना ली गई है और अवैध रूप से तलघर (तहखाना) का निर्माण कर उसमें भी दुकाने/गोदाम बना लिये गये हैं।
जयपुर नगर निगम क्षेत्र के इस बड़े बिना इजाजत बनाये गये अवैध कॉमर्शियल काम्पलेक्स में गैर कानूनी रूप से बनी दुकानों के मामले में बताया जाता है कि विभिन्न चरणों में 50 लाख से ज्यादा की नोटों की गड्डियां नगर निगम के अफसरों की जेबों में पहुंची है। यही नहीं कुछ चुनिंदा जनप्रतिनिधियों की जेबों को भी नोटों की गर्मी पहुंची है। जोकि 25 से 30 लाख तक हो सकती है। राजनैतिक पार्टियों ने अपने जनप्रतिनिधियों के जरिये कितना चंदा बटोरा यह जांच का विषय है।
अग्रगामी संदेश को मिली इस फाइल सरण संख्या 10/2064 (रज्जू) दिनांक 15 अक्टूबर, 2007  की फोटोस्टेट्स में मौजूद दस्तावेजों की प्रतियां जयपुर नगर निगम के वरिष्ठ अफसरों के भ्रष्टाचार की कलई खोल कर रख देती है।
अब राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे जिनके पास नगरीय विकास विभाग का प्रभार भी है और जयपुर नगर निगम के सीईओ लालचंद असवाल बतायेंगे कि क्या इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के खिलाफ कार्यवाही होगी या फिर चांदी के जूते के नीचे दब कर नगर निगम प्रशासन सन्नीपात में जकड़ा-अकड़ा तड़पता रहेगा!
इस प्रकरण में जो तथ्य उजागर हो रहे हैं उनसे पता चलता है कि इस प्रोजेक्ट की खरीद-बिक्री में करोड़ों रूपये का कालाधन भी काम में लिया गया बताया जाता है। इन्कमटैक्स और सर्विस टैक्स के भुगतान में भी भारी हेराफेरी की गई है।

 
AGRAGAMI SANDESH

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