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कालीबाबू रद्द करो मंत्री-नेताओं की पत्नियों की प्रतिनियुक्तियां!

जयपुर (अग्रगामी) कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार को पानी पी-पी कर कोसने वाले भाजपाई अब सत्ता में आने के बाद उनसे भी एक कदम आगे चल कर राज्य में नात्सीवादी सामन्तवादी राज कायम करने में जुट गये हैं। सत्ता की प्राप्ति के बाद अपना घर भरने और अपनों को फायदा पहुंचाने में जुटे भाजपाइयों ने सारे कानून कायदों को ताक में रख कर भाजपाइयों की घरवालियों को उन कुर्सियों से नवाजने के आदेश जारी कर दिये जिन पर बैठने की योग्यता वे नहीं रखती हैं। तर्क यह है कि कांग्रेस के राज में भी ऐसा ही होता आया है।
राजस्थान स्वेच्छा ग्रामीण सेवा नियमों की धज्जियां उड़ा कर विभाग में एक मंत्री की पत्नी सहित तीन भाजपाई नेताओं की पत्नियों को भाषा विभाग में जिन पदों पर प्रतिनियुक्तियां दी गई है हकीकत में वे उन पदों पर नियुक्ति के योग्य ही नहीं बताई जाती है। भाषा विभाग में विशेषाधिकारी पद पर केवल पुस्तकालयाध्यक्ष कैडर का ही अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है। सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के मंत्री अरूण चतुर्वेदी की पत्नी मृदुल चतुर्वेदी इस कैडर की नहीं है वे प्राणी शास्त्र की व्याख्याता हैं। अत: इस पद पर नियुक्ति के योग्य नहीं हैं।
उपनिदेशक अनुवाद के पद पर नियुक्ति हेतु हिन्दी और अंग्रेजी विषय का व्याख्याता जिसे अनुवाद का अनुभव हो, ही नियुक्त हो सकता है, लेकिन इस पद पर व्याख्याता ममता शर्मा को प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है, जोकि राजनीति शास्त्र की व्याख्याता है और इस पद पर नियुक्ति के योग्य नहीं है।
उधर टैक्सटाइल विषय की व्याख्याता मीना बंसल को प्रतिनियुक्ति पर उपनिदेशक के पद पर लगाया गा है जबकि इस पद पर हिन्दी विषय के व्याख्याता को ही लगाया जा सकता है।
पहिले तो राजस्थान स्वेच्छया ग्रामीण सेवा नियमों का खुल्लम-खुल्ला उलंघन और फिर पदों पर नियुक्ति हेतु स्थापित आदेशों और निर्देशों की धज्जियां उड़ा कर जिस तरह भाजपाई मंत्री और नेताओं व शिक्षामंत्री के चहेते की पत्नियों को मेहरबानियों से नवाजा गया है वह सिर्फ गैरजुम्मेदारान ही नहीं शर्मनाक तरीके से सत्ता का दुरूपयोग है।
इस मामले में सामाजिक व अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी का यह कथन कि राजस्थान स्वेच्छया ग्रामीण सेवा नियम से जुड़े शिक्षकों को पहिले भी कांग्रेसी राज में प्रतिनियुक्तियां दी गई हैं, उसी तरह इस बार भी प्रतिनियुक्तियां दी गई है, अत्यन्त गैरजुम्मेदारान और नैतिकता के सारे मापदण्डों को तिलांजली देने वाला है।
ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के राजस्थान स्टेट जनरल सेक्रेटरी कामरेड हीराचंद जैन ने शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी से सवाल किया है कि जो काम कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार कर रही थी और जिसका विरोध कर भाजपा तथा वसुन्धरा राजे व उनके सहयोगी सत्ता में आये, अगर उसी कांग्रेसी कल्चर का उन्हें अनुसरण करना है तो फिर उनका सत्ता में रहने का कोई औचित्य ही नहीं है और उन्हें पद त्याग कर सत्ता कांग्रेसियों को सौंप देनी चाहिये। या अपने आचरण में नैतिकता को प्राथमिकता देकर तत्काल मंत्री जी सहित तीनों भाजपाई एवं भाजपाई समर्थकों की पत्नियों की प्रतिनियुक्तियों के आदेश निरस्त करवाये जायें। साथ ही इस तरह की अनियमितता के अन्य कोई ओर मामले भी हों तो उन मामलों पर भी तत्काल सक्षम कार्यवाही की जाकर अनियमितता को खत्म किया जाये।
अब देखना है कि हमारे कालीबाबू इस गैरजुम्मेदारान प्रतिनियुक्तियों को रद्द करने के लिये कलम चलाते हैं या हथौड़ा!

 
AGRAGAMI SANDESH

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