राजस्थान विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी विधानसभा की दो तिहाई बहुमत से भी ज्यादा 81 प्रतिशत सीटें प्राप्त कर सत्ता पर काबिज हो गई हैं और वसुन्धरा राजे ने गत शुक्रवार 13 दिसम्बर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ.चंद्रभान भी श्रीमती राजे को बधाई देने शपथग्रहण समारोह में पहुंचे।
श्रीमती राजे ने ऐसे समय में राज्य की मुख्यमंत्री का पद सम्भाला है जब अगले वर्ष मई माह में देश में लोकसभा चुनाव होने हैं। वहीं प्रदेश की जनता मंहगाई से त्रस्त है। कालाबाजारियों-जमाखोरों ने प्रदेश में तांडव मचा रखा है। करोड़ों रूपये की खाद्य सामग्री इन कालाबाजारियों-जमाखोरों के गोदामों में भरी पड़ी है। हालात इतने बद्तर हैं कि भारतीय खाद्य निगम सहित राज्य की विभिन्न खाद्य संग्रहण ऐजेंसियों को किसानों से खरीदा हुआ गेहूं ओर अन्य जिन्सें रखने के लिये गोदामों की भारी कमी है और अनाज खुले आसमान के नीचे रखने के लिये मजबूर होना पड़ता है। उधर जमाखोरी कर ये जमाखोर बाजार में मांग को देखते हुए जिन्सों की सप्लाई में अनावश्यक रूकावट डाल कर बाजार में आम उपभोक्ता वस्तुओं की कमी पैदा कर उपभोक्ता से ऊंची कीमतें वसूलने की जुगत बैठाते रहते हैं।
लेकिन शर्मनाक स्थिति यह है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन स्तर पर इन जमाखोरों और कालाबाजारियों पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। अब देखना यही है कि वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार क्या जमाखोरों-कालाबाजारियों पर सक्षमता से अंकुश लगा पायेगी?
दूसरी अहम समस्या जो आज प्रदेश में गहराई से पैठती जा रही है, वह है अतिक्रमणों और गैर कानूनी अवैध निर्माणों की। पूरे प्रदेश में अतिक्रमणों और गैर कानूनी बिना इजाजत अवैध निर्माणों का बोलबाला है और भूमाफियाओं और बिल्डरों पर से सरकारी नियन्त्रण लगभग खत्म हो गया है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में ही एक अनुमान के अनुसार लगभग 2 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा कालाधन राजधानी में बिना इजाजत गैर कानूनी रूप से बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों में खपाया जा रहा है। राजधानी के छोटे-छोटे गली मोहल्लों तक में भूमाफिया और बिल्डर माफिया अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण में बिना किसी रोक टोक के जुटे हैं।
अगर इन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की स्वतंत्र ऐजेंसी से जांच करवाई जाये तो इन अवैध निर्माणों में खपाये जा रहे कालेधन की तादाद पांच हजार करोड़ तक पहुंच सकती है। पिछले दिनों जयपुर के दो बिल्डरों पर केंद्रीय ऐजेंसी के द्वारा मारे गये छापे से टैक्स चोरी के लगभग 43 करोड़ रूपये का खुलासा हुआ है।
प्रशासन में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और प्रशासनिक अधिकारियों की जनता के प्रति बेरूखी भी वसुन्धरा राजे सरकार के लिये सिरदर्द साबित होंगे। इनसे वसुन्धरा राजे सरकार कैसे निपटेगी? यह भी देखने-समझने के मुद्दे हैं।
अब देखना यही है कि समस्याओं के पिटारे से वसुन्धरा राजे और उनकी सरकार में शामिल होने वाले उनके सहयोगी कैसे निपट पाते हैं?
श्रीमती राजे ने ऐसे समय में राज्य की मुख्यमंत्री का पद सम्भाला है जब अगले वर्ष मई माह में देश में लोकसभा चुनाव होने हैं। वहीं प्रदेश की जनता मंहगाई से त्रस्त है। कालाबाजारियों-जमाखोरों ने प्रदेश में तांडव मचा रखा है। करोड़ों रूपये की खाद्य सामग्री इन कालाबाजारियों-जमाखोरों के गोदामों में भरी पड़ी है। हालात इतने बद्तर हैं कि भारतीय खाद्य निगम सहित राज्य की विभिन्न खाद्य संग्रहण ऐजेंसियों को किसानों से खरीदा हुआ गेहूं ओर अन्य जिन्सें रखने के लिये गोदामों की भारी कमी है और अनाज खुले आसमान के नीचे रखने के लिये मजबूर होना पड़ता है। उधर जमाखोरी कर ये जमाखोर बाजार में मांग को देखते हुए जिन्सों की सप्लाई में अनावश्यक रूकावट डाल कर बाजार में आम उपभोक्ता वस्तुओं की कमी पैदा कर उपभोक्ता से ऊंची कीमतें वसूलने की जुगत बैठाते रहते हैं।
लेकिन शर्मनाक स्थिति यह है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन स्तर पर इन जमाखोरों और कालाबाजारियों पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। अब देखना यही है कि वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार क्या जमाखोरों-कालाबाजारियों पर सक्षमता से अंकुश लगा पायेगी?
दूसरी अहम समस्या जो आज प्रदेश में गहराई से पैठती जा रही है, वह है अतिक्रमणों और गैर कानूनी अवैध निर्माणों की। पूरे प्रदेश में अतिक्रमणों और गैर कानूनी बिना इजाजत अवैध निर्माणों का बोलबाला है और भूमाफियाओं और बिल्डरों पर से सरकारी नियन्त्रण लगभग खत्म हो गया है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में ही एक अनुमान के अनुसार लगभग 2 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा कालाधन राजधानी में बिना इजाजत गैर कानूनी रूप से बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों में खपाया जा रहा है। राजधानी के छोटे-छोटे गली मोहल्लों तक में भूमाफिया और बिल्डर माफिया अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के निर्माण में बिना किसी रोक टोक के जुटे हैं।
अगर इन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की स्वतंत्र ऐजेंसी से जांच करवाई जाये तो इन अवैध निर्माणों में खपाये जा रहे कालेधन की तादाद पांच हजार करोड़ तक पहुंच सकती है। पिछले दिनों जयपुर के दो बिल्डरों पर केंद्रीय ऐजेंसी के द्वारा मारे गये छापे से टैक्स चोरी के लगभग 43 करोड़ रूपये का खुलासा हुआ है।
प्रशासन में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और प्रशासनिक अधिकारियों की जनता के प्रति बेरूखी भी वसुन्धरा राजे सरकार के लिये सिरदर्द साबित होंगे। इनसे वसुन्धरा राजे सरकार कैसे निपटेगी? यह भी देखने-समझने के मुद्दे हैं।
अब देखना यही है कि समस्याओं के पिटारे से वसुन्धरा राजे और उनकी सरकार में शामिल होने वाले उनके सहयोगी कैसे निपट पाते हैं?


