श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर की कार्यकारिणी के चुनावों के लिये मतदान 22 दिसम्बर को संघ के मुख्यालय शिवजीराम भवन में होना है! इन चुनावों में मेरे द्वारा भी नामांकन भरा गया है और मतपत्र के अंत में 44 हीराचंद जैन पर अंकित है। वोट देने का आग्रह करने के साथ ही मैं स्पष्ट रूप से चुनाव लडऩे के मेरे मुद्दों पर संघ के मतदाताओं को संक्षिप्त में कुछ बताना चाहूंगा।
वर्ष 1999 में संघ के विधान में संशोधन के बाद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में चुनिन्दा संघ अध्यक्ष की परम्परा लगभग समाप्त हो गई। जो भी अध्यक्ष मनोनीत किये गये वे सहवरण के जरिये ही कार्यकारिणी में आये और फिर अध्यक्ष पद पर आसीन हुए। जबकि चुनाव में जीत कर आये समाजबन्धु सदस्य के रूप में उनके सामने लगभग नतमस्तक ही रहे! संघ चुनावों में मतदाता के रूप में संघ बन्धु भारी तादाद में मतदान कर संघ की कार्यकारिणी को चुनते हैं। संघ कार्यकारिणी के पिछले पांच कार्यकालों पर अगर गम्भीरता से गौर किया जायेगा कि इन पांच कार्यकालों (लगभग 15 सालों) में संघ की वार्षिक बैठकों में कभी भी सदस्यों की संख्या ने सैंकड़ा पार नहीं किया। लगभग ढाई हजार से ज्यादा सदस्यों के इस संघ का बजट एवं अन्य कार्यक्रम महज 60-70 व्यक्तियों द्वारा ही तैय किये जा कर लागू किये जाते रहे हैं! क्या यह उचित है?
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर राजस्थान के खरतरगच्छ समुदाय का सबसे बड़ा संगठन है और इस नाते इस संघ के पदाधिकारियों की जुम्मेदारी बनती है कि वे राजस्थान में खरतरगच्छ समुदाय को एकजुट कर सक्षम सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों का संचालन करें। लेकिन इस सम्बन्ध में सोचने तक का समय भी इनके पास नहीं है। मैं आपके समक्ष कुछ मुद्दों के साथ उपस्थित हुआ हूं। अगर आप मुझे अपना सहयोग ओर मत देते हैं तो मैं निम्र मुद्दों पर आम समाज बंधुओं का पक्ष सक्षमता से संघ कार्यकारिणी और अन्य सामाजिक मंचों पर रखने का सक्षम प्रयास करूंगा। मुद्दे निम्रानुसार हैं-
1. खरतरगच्छ समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक उन्नति के लिये जन जागरण और उचित प्लेटफार्म पर समाज के हितार्थ सक्षम आवाज बुलन्द करना।
2. खरतरगच्छ समुदाय के पिछडे, कमजोर वर्ग के आर्थिक, सामाजिक स्तर को उठाने और उनके हक की आवाज उठाने के लिये सम्मिलित प्रयास करना और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने हेतु सघन प्रयास करना।
3. राजस्थान में प्रांतीय स्तर से उन सभी शहरों, कस्बों, गांवों तक जहां खरतरगच्छ समुदाय के श्रावक-श्राविकाओं का बाहुल्य है वहां स्थानीय खरतरगच्छ संघों की स्थापना करवाने में सहयोग करना एवं उनके हितों की सुरक्षा हेतु कार्य करना।
4. विभिन्न क्षेत्रों में खरतरगच्छ के धार्मिक स्थलों, तीर्थों, मंदिरों, दादाबाडियों आदि की सुरक्षा, उन पर नाजायज कब्जों के बारे में समाज में जनजागरण कर उनकी सुरक्षा के लिये आवश्यक ठोस कार्यवाही करवाना।
5. खरतरगच्छ समुदाय के साधु-साध्वियों में एकता एवं अनुशासन कायम करवाने हेतु सघन प्रयास करना। साथ ही साधु-साध्वी, यतिकुल के संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करवा कर पूरी तरह अनुशासित करवाने का सक्षम प्रयास करना तथा उनके सुरक्षित विचरण हेतु सक्षम व्यवस्था सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर करवाना।
6. खरतरगच्छ समुदाय के बालक-बालिकाओं को समग्र जैन समुदाय के इतिहास के बारे में जानकारी देने और अध्ययन करवाने की कोई व्यवस्था किसी भी स्तर पर नहीं है। इस हेतु जैन संस्कृति के संक्षिप्त इतिहास का अल्पकालीन शैक्षिक पाठ्यक्रम बनवाकर पत्राचार के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था लागू करवाने का सक्षम प्रयास करना।
7. खरतरगच्छ समुदाय में यतिकुल लगभग क्षीण हो गया है। योग्य युवकों, युवतियों एवं अन्य इच्छुक श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरित कर देश में स्थापित किसी भी यति गुरूकुल में शिक्षार्थ प्रवेश दिलवा कर उन्हें दीक्षित करवाना और विभिन्न क्षेत्रों में उन्हें स्थापित करवा कर समाज को धार्मिक-सामाजिक रूप से मजबूती दिलवाने का प्रयास करना।
8. मौजूदा पंजीकृत खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों में खरतरगच्छ परम्पराओं की अवहेलना और श्रावक-श्राविकाओं के धार्मिक-सामाजिक उत्थान की अनदेखी कर पंजिकृत सोसायटी के रूप में नौकरशाही के जरिये अद्र्ध सरकारी संगठनों की तरह कार्य करने की प्रवृति को अंकुशित करवाने के लिये खरतरगच्छ समुदाय में जन जाग्रति करना एवं अन्य सक्षम कार्यवाही करवाना।
9. श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के विधान में सक्षम संशोधन करवा कर अधिक से अधिक समाज बंधुओं को समाज के क्रियाकलापों में शामिल करवाना।
आप से मेरा विनम्र आग्रह है कि यदि आप मेरे द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त मुद्दों पर कार्य करने हेतु मुझे निर्देशित करना चाहते हैं तो मतपत्र पर क्रम संख्या 44 हीराचंद जैन पर मुहर लगा कर मुझे उत्साहित करें ताकि समाज हित में मैं सक्षमता और संकल्पित रूप से कार्यशील हो सकूं।
वर्ष 1999 में संघ के विधान में संशोधन के बाद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में चुनिन्दा संघ अध्यक्ष की परम्परा लगभग समाप्त हो गई। जो भी अध्यक्ष मनोनीत किये गये वे सहवरण के जरिये ही कार्यकारिणी में आये और फिर अध्यक्ष पद पर आसीन हुए। जबकि चुनाव में जीत कर आये समाजबन्धु सदस्य के रूप में उनके सामने लगभग नतमस्तक ही रहे! संघ चुनावों में मतदाता के रूप में संघ बन्धु भारी तादाद में मतदान कर संघ की कार्यकारिणी को चुनते हैं। संघ कार्यकारिणी के पिछले पांच कार्यकालों पर अगर गम्भीरता से गौर किया जायेगा कि इन पांच कार्यकालों (लगभग 15 सालों) में संघ की वार्षिक बैठकों में कभी भी सदस्यों की संख्या ने सैंकड़ा पार नहीं किया। लगभग ढाई हजार से ज्यादा सदस्यों के इस संघ का बजट एवं अन्य कार्यक्रम महज 60-70 व्यक्तियों द्वारा ही तैय किये जा कर लागू किये जाते रहे हैं! क्या यह उचित है?
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ जयपुर राजस्थान के खरतरगच्छ समुदाय का सबसे बड़ा संगठन है और इस नाते इस संघ के पदाधिकारियों की जुम्मेदारी बनती है कि वे राजस्थान में खरतरगच्छ समुदाय को एकजुट कर सक्षम सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों का संचालन करें। लेकिन इस सम्बन्ध में सोचने तक का समय भी इनके पास नहीं है। मैं आपके समक्ष कुछ मुद्दों के साथ उपस्थित हुआ हूं। अगर आप मुझे अपना सहयोग ओर मत देते हैं तो मैं निम्र मुद्दों पर आम समाज बंधुओं का पक्ष सक्षमता से संघ कार्यकारिणी और अन्य सामाजिक मंचों पर रखने का सक्षम प्रयास करूंगा। मुद्दे निम्रानुसार हैं-
1. खरतरगच्छ समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक उन्नति के लिये जन जागरण और उचित प्लेटफार्म पर समाज के हितार्थ सक्षम आवाज बुलन्द करना।
2. खरतरगच्छ समुदाय के पिछडे, कमजोर वर्ग के आर्थिक, सामाजिक स्तर को उठाने और उनके हक की आवाज उठाने के लिये सम्मिलित प्रयास करना और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने हेतु सघन प्रयास करना।
3. राजस्थान में प्रांतीय स्तर से उन सभी शहरों, कस्बों, गांवों तक जहां खरतरगच्छ समुदाय के श्रावक-श्राविकाओं का बाहुल्य है वहां स्थानीय खरतरगच्छ संघों की स्थापना करवाने में सहयोग करना एवं उनके हितों की सुरक्षा हेतु कार्य करना।
4. विभिन्न क्षेत्रों में खरतरगच्छ के धार्मिक स्थलों, तीर्थों, मंदिरों, दादाबाडियों आदि की सुरक्षा, उन पर नाजायज कब्जों के बारे में समाज में जनजागरण कर उनकी सुरक्षा के लिये आवश्यक ठोस कार्यवाही करवाना।
5. खरतरगच्छ समुदाय के साधु-साध्वियों में एकता एवं अनुशासन कायम करवाने हेतु सघन प्रयास करना। साथ ही साधु-साध्वी, यतिकुल के संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करवा कर पूरी तरह अनुशासित करवाने का सक्षम प्रयास करना तथा उनके सुरक्षित विचरण हेतु सक्षम व्यवस्था सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर करवाना।
6. खरतरगच्छ समुदाय के बालक-बालिकाओं को समग्र जैन समुदाय के इतिहास के बारे में जानकारी देने और अध्ययन करवाने की कोई व्यवस्था किसी भी स्तर पर नहीं है। इस हेतु जैन संस्कृति के संक्षिप्त इतिहास का अल्पकालीन शैक्षिक पाठ्यक्रम बनवाकर पत्राचार के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था लागू करवाने का सक्षम प्रयास करना।
7. खरतरगच्छ समुदाय में यतिकुल लगभग क्षीण हो गया है। योग्य युवकों, युवतियों एवं अन्य इच्छुक श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरित कर देश में स्थापित किसी भी यति गुरूकुल में शिक्षार्थ प्रवेश दिलवा कर उन्हें दीक्षित करवाना और विभिन्न क्षेत्रों में उन्हें स्थापित करवा कर समाज को धार्मिक-सामाजिक रूप से मजबूती दिलवाने का प्रयास करना।
8. मौजूदा पंजीकृत खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों में खरतरगच्छ परम्पराओं की अवहेलना और श्रावक-श्राविकाओं के धार्मिक-सामाजिक उत्थान की अनदेखी कर पंजिकृत सोसायटी के रूप में नौकरशाही के जरिये अद्र्ध सरकारी संगठनों की तरह कार्य करने की प्रवृति को अंकुशित करवाने के लिये खरतरगच्छ समुदाय में जन जाग्रति करना एवं अन्य सक्षम कार्यवाही करवाना।
9. श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के विधान में सक्षम संशोधन करवा कर अधिक से अधिक समाज बंधुओं को समाज के क्रियाकलापों में शामिल करवाना।
आप से मेरा विनम्र आग्रह है कि यदि आप मेरे द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त मुद्दों पर कार्य करने हेतु मुझे निर्देशित करना चाहते हैं तो मतपत्र पर क्रम संख्या 44 हीराचंद जैन पर मुहर लगा कर मुझे उत्साहित करें ताकि समाज हित में मैं सक्षमता और संकल्पित रूप से कार्यशील हो सकूं।
आपका आभारी
हीराचंद जैन
हीराचंद जैन


