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लोक आचरण और भ्रष्टाचार के बीच जंग की शुरूआत हुई दिल्ली में!

नई दिल्ली (अग्रगामी) वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिये सभी राजनैतिक पार्टियां सियासती तैयारियों में जुटने लगी है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) ने सत्ता की बागडोर सम्भाल ली है, वहीं अन्दरखाने भाजपा और कांग्रेस आप की सत्ता को धराशायी करने के कुचक्र में जुट गई है। दोनों ही पार्टियों को इस बात से धूजनी छूट रही है कि अगर दिल्ली में आप ने तीन महिने सही सलामत सत्ता सम्भाल ली तो फिर आप की आगामी लोकसभा चुनावों में गहराई तक दखलंदाजी हो सकती है, जिसका खमियाजा भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही उठाना पड़ेगा।
इधर आप के संयोजक और दिल्ली के नवनियुक्त मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और आप के अन्य नेताओं का सोच है कि अगर वे अगले सप्ताह दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस के सहारे विश्वास मत प्राप्त कर लेते हैं तो उन्हें आगामी छह माह के लिये संजीवनी मिल जायेगी और वे दिल्ली में सत्ता में रहते हुए आगामी लोकसभा चुनावों में बेहतर तरीके से अपनी योग्यता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने की स्थिति में आ जायेंगे।
उधर भाजपा का यह सोच है कि अगर आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा में विश्वास मत हांसिल नहीं कर पाती है तो दिल्ली विधानसभा के चुनाव भी लोकसभा चुनावों के साथ होंगे, ऐसी स्थिति में आप दिल्ली विधानसभा चुनावों में उलझ जायेगी और राष्ट्रीय राजनीति में उसकी पकड़ ढीली हो जायेगी। उपरोक्त हालात में भाजपा का दांव आप को विधानसभा में विश्वास मत से वंचित रखने का रहेगा। ताकि लोकसभा चुनावों में उसे फायदा हो। कांग्रेस ओर आप दोनों ही पार्टियां भाजपा की रणनीति से परिचित हैं। लेकिन दिल्ली की स्थानीय राजनैतिक उठापटक पर उनका फिलहाल कोई अंकुश नहीं है। वैसे आप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनावों के लिये तैयार है। जबकि कांग्रेस भी विधानसभा में आप के विश्वास मत को गिराना नहीं चाहेगी, क्योंकि ऐसा करने से उसे आगामी लोकसभा चुनावों में भारी नुकसान होने के स्पष्ट आसार हैं।
लेकिन दिल्ली में विश्वास गिरने या नहीं गिरने की उठापटक के बीच केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही प्रशासनिक फेरबदल शुरू कर दिये हैं वहीं भाजपा ओर कांग्रेस के हथकण्डों से आगाह करते हुए आप के कार्यकर्ताओं और दिल्ली के अवाम से मध्यावधि चुनावों के लिये तैयार रहने के लिये भी आव्हान कर दिया है। केजरीवाल और उनके साथी जानते हैं कि उनके पास काम करने के लिये समय काफी कम है और इस दौरान उन्होंने वादों को पूरा करने में कोताही दिखाई तो इसका भारी खमियाजा आप को उठाना होगा।
बरहाल लोक आचरण और भ्रष्टाचार के बीच जंग छिड़ गई है और आनेवाले समय में इस जंग के नतीजे अवाम के सामने होंगे।

 
AGRAGAMI SANDESH

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