जयपुर (अग्रगामी) चुनावी आचार सहिंता की धज्जियां उड़ा कर राजस्थान की सबसे बड़ी नगर निगम, जयपुर नगर निगम के भ्रष्टाचारियों ने नरक निगम में तब्दील कर दिया है!
अग्रगामी संदेश ने पिछले दिनों खुलासा किया था कि जयपुर नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव की अगुआई में निगम के सतर्कता आयुक्त अनिल गोठवाल, निदेशक विधि अशोक सिंह और जोन आयुक्तों ने एक काकस बना कर जयपुर के वाशिंदों को लूटने के लिये अपने मातहतों को खुली छूट देकर नगर निगम को भ्रष्टाचारियों का अड्डा बना दिया है।
अग्रगामी संदेश ने जयपुर महानगर के चार दीवारी क्षेत्रों में हो रहे गैरकानूनी अवैध निर्माणों के मुद्दों पर पिछले अंकों में विस्तार से लिखा था और अब लगने लगा है कि नाकारा-निकम्मे भ्रष्ट अफसरों से आजीज अवाम ने इनकी धोती-पैंटें उतारने की लगभग ठान ही ली है। शर्मनाक स्थिति यह है कि चार दिवारी क्षेत्र के हवामहल जोन पूर्व, हवामहल जोन पश्चिम एवं आमेर जोन क्षेत्र में लगभग चार सौ से ज्यादा अवैध गैरकानूनी कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों पर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव, सतर्कता आयुक्त अनिल गोठवाल, निदेशक विधि अशोक सिंह और हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह, मोतीडूंगरी जोन आयुक्त अशीष कुमार, हवामहल जोन पश्चिम आयुक्त मदन कुमार शर्मा तथा आमेर जोन आयुक्त दिनेश शर्मा और अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माताओं के साथ तालमेल और सांठगांठ के चलते, अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जा रही है। हमने अग्रगामी संदेश में इन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के बारे में विस्तार से पहिले भी लिखा है।
गत बुद्धवार 24 अक्टूबर को गैर कानूनी बिना इजाजत तामीर बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों पर कार्यवाही नहीं होने के कारण आक्रोशित सैंकड़ों की तादाद में अवाम जब नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के कार्यालय पहुंचा, इससे पहिले ही जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह अपने कार्यालय से भाग छूटे और मोतीडूंगरी जोन में जा बैठे! गुस्साये लोगों ने जोरदार हंगामा किया और आखीरकार जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह को कार्यवाही के लिये लिखित में आश्वासन देना पड़ा।
हकीकत में जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह की अगुआई में जोन में बैठे जनविरोधी भ्रष्ट, बेईमान और नाकारा हुक्कामों तथा कारिंदों की रहनुमाई में गैर कानूनी, बिना इजाजत तामीर, अवैध कॉमर्शियल काम्पलेक्सों के निर्माणों की बाढ़ सी आ गई है। इस जोन में अवैध, गैर कानूनी और बिना इजाजत तामीर के बन गये या निर्माणाधीन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों, कॉमर्शियल निर्माणों और अन्य अवैध निर्माणों के 140 से ज्यादा मामलों की शिकायतें दफ्तर की फाइलों में दबी पड़ी है। नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ कारिंदों ने अवैध निर्माणों को प्रश्रय देने के लिये एक पतली गली निकाल रखी है। आयुक्त, इनके हुक्काम और कारिंदे अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर अवैध निर्माणकर्ता को नोटिस जारी करने की नौटंकी फाइल पर बाकायदा नोटशीट साया कर करते हैं। नोटिस अवैध गैर कानूनी निर्माणकर्ता को साया कर जवाब तलब भी किया जाता है, लेकिन न तो अवैध निर्माणकर्ता नोटिस का जवाब देता है और न ही नगर निगम के आयुक्त, उनके अफसर और कारिंदे काम को रूकवाते हैं और न ही मामले में सीजर या ध्वस्त करने की कार्यवाही की जाती है। लेकिन नोटिस देने के बाद जोन आयुक्त से लेकर सहायक सर्वेयर तक की ऊपरी कमाई का मीटर चालू हो जाता है। अगर अवैध निर्माणकर्ता नजराना देने में हिचकिचाता है तो उसके निर्माण को तोडऩे के आदेश फाइलों में पारित कर दिये जाते हैं और अवैध निर्माणकर्ता को धमकाया जाता है कि वह निगम के हुक्कामों और कारिंदों को नजराना दे अन्यथा अवैध निर्माण तुड़वा दिया जायेगा।
अग्रगामी संदेश के पास नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के ढेर सारे ऐसे गैर कानूनी बन गये या बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की सूची है जिन्हें हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह और इनके अधिनस्थ कारिंदे नजराना लेकर अपने सानिध्य में बनवा रहे हैं।
वैसे मुलायजा फरमायें हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह, इनके अधीनस्थ हुक्काम और कारिंदों के सानिध्य में कुछ बिना इजाजत बन रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की बानगी का!
पहली बानगी देखिये हमारे जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह के काम करने के अंदाज की। भवन म्युनिसिपल संख्या 4255 में गैर कानूनी तरीके से सारे कानून कायदों की धज्जियां उड़ा कर बोरिंग खोद लिया गया। लेकिन जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ हुक्काम और कारिंदे हाथ पर धरे बैठे रहे और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने से बचते रहे! अवाम को ऐसा लगने लगा है कि इन लोगों ने जेबों में भरी नोटों की गड्डियों के चलते हाथ में चूडिय़ां पहनली हो और इनका दिमाग सन्नीपात में जकड़ गया हो!
इस ही भवन म्युनिसिपल संख्या 4255 में स्वीकृत नक्क्षे के विपरीत गैर कानूनी तरीके से अवैध रूप से कॉमर्शियल काम्प्लेक्स का निर्माण हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त, इनके अधीनस्थ हुक्कामों और कारिंदों की मिलीभगत से जारी है। यही नहीं इस अवैध कॉमर्शियल काम्पलेक्स के निर्माण में 65 वर्गफुट सरकारी जमीन और 250 वर्गफुट निजी जमीन को भी दबा लिया गया है। आयुक्त हवामहल जोन पूर्व के अधीनस्थ कारिंदों का कहना है कि अवैध निर्माणकर्ता अशोक हरजानी और दीपक हरजानी ने जो नक्क्षे पेश किये उसके मुताबिक निर्माण करने दिया जा रहा है! इस शर्मनाक कथन के पीछे नोटों की गड्डियों के अलावा कोई आधार नहीं है क्योंकि फाइल में उपलब्ध दस्तावेज ही इनके कथन की हवा निकाल रहे हैं।
इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के खिलाफ कार्यवाही करने से हवामहल जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह, इनके अधीनस्थ हुक्कामों और कारिंदों को किसने रोका, बतायें ये लोग उस अफसर या नेता नांगले का नाम! या फिर कुबुल करें कि कार्यवाही नहीं करने के पेटे जयपुर नगर निगम के हुक्कामों और कारिंदों को 19 लाख रूपये का नजराना मिला।
अब इनकी दूसरी कारस्तानी पर गौर फरमा लें, ये खुद और अवाम! भवन म्युनिसिपल संख्या 3834-35 धार्मिक स्थल है और इसमें अवैध रूप से कॉमर्शियल निर्माण जयपुर नगर निगम से निर्माण स्वीकृति लिये बिना। हमारे हुजूर आयुक्त हवामहल जोन पूर्व इंद्रजीत सिंह इस मौके का मुआयना एक सप्ताह पहिले भवन निर्माण शाखा के जेईएन और गजधर गिरधारी शर्मा के साथ देख कर आये हैं। निर्माण शुरू होने से लेकर दुकान बनने और फिर उसका उद्घाटन और विद्युत कनेक्शन लेने के बावजूद मामला नोटिसों में ही चल रह है। साहब और उनके अधीनस्थ हुक्काम और कारिंदे बतायें कि कार्यवाही क्यों नहीं हुई? कितना नजराना किस-किस को कार्यवाही नहीं करने पर मिला और नोटों की गड्डियों के चलते सभी ने हाथों में चूडिय़ां पहन ली और सभी का दिमाग सन्नीपात में जकड़ गया है!
आगे चलें, हल्दियों के रास्ते में भवन म्युनिसिपल संख्या 2135-36 लूणावत मार्केट में तीसरी मंजिल तैयार हो गई। जोन में शिकायत भी हुई लेकिन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के मालिक से मोटा नजराना लेकर मामले को फाइलों में दबा दिया गया।
यही हाल मारू जी के चौक में भवन म्युनिसिपल संख्या 2494 का है। जोन अफसरों और कारिंदों ने बनवा दिया अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स! अगर खुदा ना खस्ता आग लग जाये तो फायर ब्रिगेड भी वहां तक पहुंच ही नहीं सकती है।
नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में ही भवन म्युनिसिपल संख्या 4009 से 4011 कुंदीगर भैंरू का रास्ता चौकडी घाटगेट में निर्माणाधीन अवैध कॉमर्शिलय काम्प्लेक्स की सुध लें तो हवामहल जोन पूर्व की भवन निर्माण शाखा के सारे अफसर-कारिंदे, जोन आयुक्त और उन के अधीनस्थ हुक्काम लगे हैं अवैध निर्माणकर्ता को अवैध निर्माण में सहयोग करने में! खुद जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स का मौका देख कर आये हैं, लेकिन सिर्फ दरवाजे के बाहर से। क्यों कि मामला नजराने से जुड़ा जो है!
अब जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ हुक्कामों की एक और कारगुजारी! जोन के आधीन चौकड़ी घाटगेट के कुंदीगर भैंरू के रास्ते में स्थित भवन म्युनिसिपल संख्या 3873 में दिये जा रहे अवैध निर्माण पर जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह, इनके अधीनस्थ हुक्काम और कारिंदे कार्यवाही इसलिये नहीं कर रहे बताये जाते हैं कि इस अवैध निर्माण के पेटे इन्हें मोटा नजराना मिल चुका बताया जाता है। जबकि पूरा निर्माण ही बिना इजाजत है और गैर कानूनी है। खुद आयुक्त इंद्रजीत सिंह इनके अधीनस्थ कारिंदे मौका मुआयना कर आये हैं। लेकिन कार्यवाही के नाम पर बगलें झांक रहे हैं और यह साबित करने का प्रयास कर रहे हैं कि नजराने के चलते इन्होंने हाथों में चूडियां पहन रखी हैं! ज्ञातव्य रहे कि गत गुरूवार (24 अक्टूबर) को हवामहल जोन पूर्व में जो हंगामा अवाम ने बरपाया था, उससे सम्बन्धित मुद्दों में से एक मुद्दा यह भी था।
एक अजूबा ओर देखिये जयपुर नगर निगम के हुक्कामों का! सर्वोच्च न्यायालय ने धार्मिक स्थलों की आड़ में गैर कानूनी बिना इजाजत तामीर-निर्माण पर पाबंदी लगा रखी है। लेकिन हवामहल जोन पूर्व के चौकडी घाटगेट में मोतीसिंह भौमियों के रास्ते में स्थित भवन म्युनिसिपल संख्या 3826 जो कि श्यामलाल जी यति के उपासरे के नाम से मशहूर है, उस उपासरे में स्थापित 163 साल पुराने श्वेताम्बर खरतरगच्छ के चौथे दादा गुरूदेव कुशल सूरिश्वर के चरण पादुका मंदिर और कुन्थुनाथ स्वामी मंदिर को शहीद कर वहां अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के निर्माण पर अवाम ने मोर्चा सम्भाला तो नगर निगम के भ्रष्ट और बेईमान हुक्काम और कारिंदे बिलों में जा घुसे। इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स को तोडऩे के स्पष्ट आदेश रेकार्ड पर होने के बावजूद जोन के अफसर और कारिंदे फाइल को दबा कर बैठे हैं और आदेश होने के बावजूद अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के निर्माण को सिर्फ इसलिये नहीं तोड़ रहे हैं कि अवैध निर्माणकर्ता से निगम के हुक्कामों और कारिंदों ने मोटी कमाई की है और इनकी कमाई का मीटर आज भी चालू है। अब तो इस अवैध निर्माण की फाइल ही लापता हो गई है।
जोन के आधीन दुकान नम्बर 44 का मसला लें! नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव ने दुकान के नीचे गैर कानूनी और बिना इजाजत अवैध तरीके से खोदे गये तहखाने को भरवा कर अनुपयोगी करने के आदेश दिये थे, जो रेकार्ड पर उपलब्ध हैं लेकिन जोन के हुक्कामों ने दुकान मालिक से मिल कर तहखाना ही बनवा दिया। नगर निगम से पगार उठा कर नगर निगम को ही चूना लगाने वाले देशद्रोहियों और सेठियों की काली कमाई से अपना घर भरने वालों को कब शर्म आयेगी, हुजूर! बतायें इंद्रजीत सिंह!
अग्रगामी संदेश ने पिछले दिनों खुलासा किया था कि जयपुर नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव की अगुआई में निगम के सतर्कता आयुक्त अनिल गोठवाल, निदेशक विधि अशोक सिंह और जोन आयुक्तों ने एक काकस बना कर जयपुर के वाशिंदों को लूटने के लिये अपने मातहतों को खुली छूट देकर नगर निगम को भ्रष्टाचारियों का अड्डा बना दिया है।
अग्रगामी संदेश ने जयपुर महानगर के चार दीवारी क्षेत्रों में हो रहे गैरकानूनी अवैध निर्माणों के मुद्दों पर पिछले अंकों में विस्तार से लिखा था और अब लगने लगा है कि नाकारा-निकम्मे भ्रष्ट अफसरों से आजीज अवाम ने इनकी धोती-पैंटें उतारने की लगभग ठान ही ली है। शर्मनाक स्थिति यह है कि चार दिवारी क्षेत्र के हवामहल जोन पूर्व, हवामहल जोन पश्चिम एवं आमेर जोन क्षेत्र में लगभग चार सौ से ज्यादा अवैध गैरकानूनी कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों पर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव, सतर्कता आयुक्त अनिल गोठवाल, निदेशक विधि अशोक सिंह और हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह, मोतीडूंगरी जोन आयुक्त अशीष कुमार, हवामहल जोन पश्चिम आयुक्त मदन कुमार शर्मा तथा आमेर जोन आयुक्त दिनेश शर्मा और अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स निर्माताओं के साथ तालमेल और सांठगांठ के चलते, अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जा रही है। हमने अग्रगामी संदेश में इन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों के बारे में विस्तार से पहिले भी लिखा है।
गत बुद्धवार 24 अक्टूबर को गैर कानूनी बिना इजाजत तामीर बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों पर कार्यवाही नहीं होने के कारण आक्रोशित सैंकड़ों की तादाद में अवाम जब नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के कार्यालय पहुंचा, इससे पहिले ही जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह अपने कार्यालय से भाग छूटे और मोतीडूंगरी जोन में जा बैठे! गुस्साये लोगों ने जोरदार हंगामा किया और आखीरकार जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह को कार्यवाही के लिये लिखित में आश्वासन देना पड़ा।
हकीकत में जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह की अगुआई में जोन में बैठे जनविरोधी भ्रष्ट, बेईमान और नाकारा हुक्कामों तथा कारिंदों की रहनुमाई में गैर कानूनी, बिना इजाजत तामीर, अवैध कॉमर्शियल काम्पलेक्सों के निर्माणों की बाढ़ सी आ गई है। इस जोन में अवैध, गैर कानूनी और बिना इजाजत तामीर के बन गये या निर्माणाधीन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों, कॉमर्शियल निर्माणों और अन्य अवैध निर्माणों के 140 से ज्यादा मामलों की शिकायतें दफ्तर की फाइलों में दबी पड़ी है। नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ कारिंदों ने अवैध निर्माणों को प्रश्रय देने के लिये एक पतली गली निकाल रखी है। आयुक्त, इनके हुक्काम और कारिंदे अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर अवैध निर्माणकर्ता को नोटिस जारी करने की नौटंकी फाइल पर बाकायदा नोटशीट साया कर करते हैं। नोटिस अवैध गैर कानूनी निर्माणकर्ता को साया कर जवाब तलब भी किया जाता है, लेकिन न तो अवैध निर्माणकर्ता नोटिस का जवाब देता है और न ही नगर निगम के आयुक्त, उनके अफसर और कारिंदे काम को रूकवाते हैं और न ही मामले में सीजर या ध्वस्त करने की कार्यवाही की जाती है। लेकिन नोटिस देने के बाद जोन आयुक्त से लेकर सहायक सर्वेयर तक की ऊपरी कमाई का मीटर चालू हो जाता है। अगर अवैध निर्माणकर्ता नजराना देने में हिचकिचाता है तो उसके निर्माण को तोडऩे के आदेश फाइलों में पारित कर दिये जाते हैं और अवैध निर्माणकर्ता को धमकाया जाता है कि वह निगम के हुक्कामों और कारिंदों को नजराना दे अन्यथा अवैध निर्माण तुड़वा दिया जायेगा।
अग्रगामी संदेश के पास नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के ढेर सारे ऐसे गैर कानूनी बन गये या बनाये जा रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की सूची है जिन्हें हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह और इनके अधिनस्थ कारिंदे नजराना लेकर अपने सानिध्य में बनवा रहे हैं।
वैसे मुलायजा फरमायें हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह, इनके अधीनस्थ हुक्काम और कारिंदों के सानिध्य में कुछ बिना इजाजत बन रहे अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्सों की बानगी का!
पहली बानगी देखिये हमारे जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त इंद्रजीत सिंह के काम करने के अंदाज की। भवन म्युनिसिपल संख्या 4255 में गैर कानूनी तरीके से सारे कानून कायदों की धज्जियां उड़ा कर बोरिंग खोद लिया गया। लेकिन जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ हुक्काम और कारिंदे हाथ पर धरे बैठे रहे और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने से बचते रहे! अवाम को ऐसा लगने लगा है कि इन लोगों ने जेबों में भरी नोटों की गड्डियों के चलते हाथ में चूडिय़ां पहनली हो और इनका दिमाग सन्नीपात में जकड़ गया हो!
इस ही भवन म्युनिसिपल संख्या 4255 में स्वीकृत नक्क्षे के विपरीत गैर कानूनी तरीके से अवैध रूप से कॉमर्शियल काम्प्लेक्स का निर्माण हवामहल जोन पूर्व के आयुक्त, इनके अधीनस्थ हुक्कामों और कारिंदों की मिलीभगत से जारी है। यही नहीं इस अवैध कॉमर्शियल काम्पलेक्स के निर्माण में 65 वर्गफुट सरकारी जमीन और 250 वर्गफुट निजी जमीन को भी दबा लिया गया है। आयुक्त हवामहल जोन पूर्व के अधीनस्थ कारिंदों का कहना है कि अवैध निर्माणकर्ता अशोक हरजानी और दीपक हरजानी ने जो नक्क्षे पेश किये उसके मुताबिक निर्माण करने दिया जा रहा है! इस शर्मनाक कथन के पीछे नोटों की गड्डियों के अलावा कोई आधार नहीं है क्योंकि फाइल में उपलब्ध दस्तावेज ही इनके कथन की हवा निकाल रहे हैं।
इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के खिलाफ कार्यवाही करने से हवामहल जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह, इनके अधीनस्थ हुक्कामों और कारिंदों को किसने रोका, बतायें ये लोग उस अफसर या नेता नांगले का नाम! या फिर कुबुल करें कि कार्यवाही नहीं करने के पेटे जयपुर नगर निगम के हुक्कामों और कारिंदों को 19 लाख रूपये का नजराना मिला।
अब इनकी दूसरी कारस्तानी पर गौर फरमा लें, ये खुद और अवाम! भवन म्युनिसिपल संख्या 3834-35 धार्मिक स्थल है और इसमें अवैध रूप से कॉमर्शियल निर्माण जयपुर नगर निगम से निर्माण स्वीकृति लिये बिना। हमारे हुजूर आयुक्त हवामहल जोन पूर्व इंद्रजीत सिंह इस मौके का मुआयना एक सप्ताह पहिले भवन निर्माण शाखा के जेईएन और गजधर गिरधारी शर्मा के साथ देख कर आये हैं। निर्माण शुरू होने से लेकर दुकान बनने और फिर उसका उद्घाटन और विद्युत कनेक्शन लेने के बावजूद मामला नोटिसों में ही चल रह है। साहब और उनके अधीनस्थ हुक्काम और कारिंदे बतायें कि कार्यवाही क्यों नहीं हुई? कितना नजराना किस-किस को कार्यवाही नहीं करने पर मिला और नोटों की गड्डियों के चलते सभी ने हाथों में चूडिय़ां पहन ली और सभी का दिमाग सन्नीपात में जकड़ गया है!
आगे चलें, हल्दियों के रास्ते में भवन म्युनिसिपल संख्या 2135-36 लूणावत मार्केट में तीसरी मंजिल तैयार हो गई। जोन में शिकायत भी हुई लेकिन अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के मालिक से मोटा नजराना लेकर मामले को फाइलों में दबा दिया गया।
यही हाल मारू जी के चौक में भवन म्युनिसिपल संख्या 2494 का है। जोन अफसरों और कारिंदों ने बनवा दिया अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स! अगर खुदा ना खस्ता आग लग जाये तो फायर ब्रिगेड भी वहां तक पहुंच ही नहीं सकती है।
नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व में ही भवन म्युनिसिपल संख्या 4009 से 4011 कुंदीगर भैंरू का रास्ता चौकडी घाटगेट में निर्माणाधीन अवैध कॉमर्शिलय काम्प्लेक्स की सुध लें तो हवामहल जोन पूर्व की भवन निर्माण शाखा के सारे अफसर-कारिंदे, जोन आयुक्त और उन के अधीनस्थ हुक्काम लगे हैं अवैध निर्माणकर्ता को अवैध निर्माण में सहयोग करने में! खुद जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स का मौका देख कर आये हैं, लेकिन सिर्फ दरवाजे के बाहर से। क्यों कि मामला नजराने से जुड़ा जो है!
अब जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह और उनके अधीनस्थ हुक्कामों की एक और कारगुजारी! जोन के आधीन चौकड़ी घाटगेट के कुंदीगर भैंरू के रास्ते में स्थित भवन म्युनिसिपल संख्या 3873 में दिये जा रहे अवैध निर्माण पर जोन आयुक्त इंद्रजीत सिंह, इनके अधीनस्थ हुक्काम और कारिंदे कार्यवाही इसलिये नहीं कर रहे बताये जाते हैं कि इस अवैध निर्माण के पेटे इन्हें मोटा नजराना मिल चुका बताया जाता है। जबकि पूरा निर्माण ही बिना इजाजत है और गैर कानूनी है। खुद आयुक्त इंद्रजीत सिंह इनके अधीनस्थ कारिंदे मौका मुआयना कर आये हैं। लेकिन कार्यवाही के नाम पर बगलें झांक रहे हैं और यह साबित करने का प्रयास कर रहे हैं कि नजराने के चलते इन्होंने हाथों में चूडियां पहन रखी हैं! ज्ञातव्य रहे कि गत गुरूवार (24 अक्टूबर) को हवामहल जोन पूर्व में जो हंगामा अवाम ने बरपाया था, उससे सम्बन्धित मुद्दों में से एक मुद्दा यह भी था।
एक अजूबा ओर देखिये जयपुर नगर निगम के हुक्कामों का! सर्वोच्च न्यायालय ने धार्मिक स्थलों की आड़ में गैर कानूनी बिना इजाजत तामीर-निर्माण पर पाबंदी लगा रखी है। लेकिन हवामहल जोन पूर्व के चौकडी घाटगेट में मोतीसिंह भौमियों के रास्ते में स्थित भवन म्युनिसिपल संख्या 3826 जो कि श्यामलाल जी यति के उपासरे के नाम से मशहूर है, उस उपासरे में स्थापित 163 साल पुराने श्वेताम्बर खरतरगच्छ के चौथे दादा गुरूदेव कुशल सूरिश्वर के चरण पादुका मंदिर और कुन्थुनाथ स्वामी मंदिर को शहीद कर वहां अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के निर्माण पर अवाम ने मोर्चा सम्भाला तो नगर निगम के भ्रष्ट और बेईमान हुक्काम और कारिंदे बिलों में जा घुसे। इस अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स को तोडऩे के स्पष्ट आदेश रेकार्ड पर होने के बावजूद जोन के अफसर और कारिंदे फाइल को दबा कर बैठे हैं और आदेश होने के बावजूद अवैध कॉमर्शियल काम्प्लेक्स के निर्माण को सिर्फ इसलिये नहीं तोड़ रहे हैं कि अवैध निर्माणकर्ता से निगम के हुक्कामों और कारिंदों ने मोटी कमाई की है और इनकी कमाई का मीटर आज भी चालू है। अब तो इस अवैध निर्माण की फाइल ही लापता हो गई है।
जोन के आधीन दुकान नम्बर 44 का मसला लें! नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव ने दुकान के नीचे गैर कानूनी और बिना इजाजत अवैध तरीके से खोदे गये तहखाने को भरवा कर अनुपयोगी करने के आदेश दिये थे, जो रेकार्ड पर उपलब्ध हैं लेकिन जोन के हुक्कामों ने दुकान मालिक से मिल कर तहखाना ही बनवा दिया। नगर निगम से पगार उठा कर नगर निगम को ही चूना लगाने वाले देशद्रोहियों और सेठियों की काली कमाई से अपना घर भरने वालों को कब शर्म आयेगी, हुजूर! बतायें इंद्रजीत सिंह!


