राजस्थान विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा हो जाने के बाद राजनैतिक दलों और राजनेताओं में गहरी गहमागहमी का माहौल बनता जा रहा है। चुनावों के धूमधड़ाके में राजनेता और राजनैतिक पार्टियां आम अवाम को जिस तरह से दरकिनार कर रही है वह लोकतंत्र के लिये अत्यन्त खतरनाक है।
कांग्रेस के नेता अशोक गहलोत सरकार के पिछले डेढ साल में किये गये कामकाज को भुनाने का प्रयास कर रहे हैं। वे भूल गये कि जो कुछ उन्होंने किया वह आम अवाम के सामने है। अखबारों में विज्ञापन देने, इलेक्ट्रोनिक मीडिया व अन्य प्रचार माध्यमों से प्रचार करने से अवाम को बहलाया फुसलाया नहीं जा सकता है।
भारतीय जनता पार्टी के पास कांग्रेस और कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ जहर उगलने के अलावा कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं है, जिससे वह यह साबित कर सके कि उसका जनता से लगाव है और भाजपा जनता के दु:खदर्दों में उसकी भागीदार है।
पिछले पांच सालों में रूपये की क्रय शक्ति आधी भी नहीं बची है। रूपये के अवमूल्यन के चलते मंहगाई का ग्राफ ऊंचा बढ़ता ही गया। इसका फायदा जमाखोरों-कालाबाजारियों ने उठाया और आम उपभोक्ता वस्तुओं को गोदामों में भर लिया। आज राजस्थान में लगभग दस हजार करोड़ रूपये से ज्यादा के खाद्यान्न और अन्य आम उपभोक्ता वस्तुएं जमाखोरों-कालाबाजारियों के गोदामों में भरी पड़ी है। प्याज से लेकर मिर्च मसालों और आम उपभोक्ता वस्तुओं के भावों पर जमाखोरों और कालाबाजारियों का नियन्त्रण है। लेकिन सत्तारूढ़ दल सहित प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने पिछले पांच सालों में जमाखोरों और कालाबाजारियों और उनका प्रश्रय देने वालों के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही या जनआन्दोलन नहीं चलाया। आम अवाम मंहगाई की चक्की में पिसता रहा और आज भी पिस रहा है।
बिजली, पानी परिवहन के क्षेत्रों में भी शहरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों के लिये दोहरे मानदण्ड अपनाये गये, लेकिन पक्ष-विपक्ष, कांग्रेस और भाजपा के राजनेताओं को फुर्सत ही नहीं मिली जनता की पीड़ा सुनने की।
अवाम में इन दोनों पार्टियों, भाजपा और कांग्रेस के प्रति गहरा आक्रोश है, लेकिन अवाम की मजबूरी है कि उसके पास भाजपा और कांग्रेस के अलावा कोई सक्षम विकल्प नहीं है। अब एक विकल्प बचा है कि इनमें से कोई भी नहीं! देखना यह है कि इस विकल्प का अवाम किस तरह उपयोग करता है?
कांग्रेस के नेता अशोक गहलोत सरकार के पिछले डेढ साल में किये गये कामकाज को भुनाने का प्रयास कर रहे हैं। वे भूल गये कि जो कुछ उन्होंने किया वह आम अवाम के सामने है। अखबारों में विज्ञापन देने, इलेक्ट्रोनिक मीडिया व अन्य प्रचार माध्यमों से प्रचार करने से अवाम को बहलाया फुसलाया नहीं जा सकता है।
भारतीय जनता पार्टी के पास कांग्रेस और कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ जहर उगलने के अलावा कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं है, जिससे वह यह साबित कर सके कि उसका जनता से लगाव है और भाजपा जनता के दु:खदर्दों में उसकी भागीदार है।
पिछले पांच सालों में रूपये की क्रय शक्ति आधी भी नहीं बची है। रूपये के अवमूल्यन के चलते मंहगाई का ग्राफ ऊंचा बढ़ता ही गया। इसका फायदा जमाखोरों-कालाबाजारियों ने उठाया और आम उपभोक्ता वस्तुओं को गोदामों में भर लिया। आज राजस्थान में लगभग दस हजार करोड़ रूपये से ज्यादा के खाद्यान्न और अन्य आम उपभोक्ता वस्तुएं जमाखोरों-कालाबाजारियों के गोदामों में भरी पड़ी है। प्याज से लेकर मिर्च मसालों और आम उपभोक्ता वस्तुओं के भावों पर जमाखोरों और कालाबाजारियों का नियन्त्रण है। लेकिन सत्तारूढ़ दल सहित प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने पिछले पांच सालों में जमाखोरों और कालाबाजारियों और उनका प्रश्रय देने वालों के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही या जनआन्दोलन नहीं चलाया। आम अवाम मंहगाई की चक्की में पिसता रहा और आज भी पिस रहा है।
बिजली, पानी परिवहन के क्षेत्रों में भी शहरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों के लिये दोहरे मानदण्ड अपनाये गये, लेकिन पक्ष-विपक्ष, कांग्रेस और भाजपा के राजनेताओं को फुर्सत ही नहीं मिली जनता की पीड़ा सुनने की।
अवाम में इन दोनों पार्टियों, भाजपा और कांग्रेस के प्रति गहरा आक्रोश है, लेकिन अवाम की मजबूरी है कि उसके पास भाजपा और कांग्रेस के अलावा कोई सक्षम विकल्प नहीं है। अब एक विकल्प बचा है कि इनमें से कोई भी नहीं! देखना यह है कि इस विकल्प का अवाम किस तरह उपयोग करता है?


