नई दिल्ली/जयपुर (अग्रगामी) राज्य में बढ़ रही मंहगाई, जमाखोरी, कालाबाजारी से आम अवाम बुरी तरह से त्रस्त है। अगर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके मंत्रीमण्डलीय सहयोगियों को याद हो तो देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने 15 अगस्त, 2009 को दिल्ली के लालकिले से देश की जनता को जमाखोरों, कालाबाजारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का पुख्ता इरादा जताया था। बाद में उन्होंने इसे राज्य का विषय बता कर गेंद राज्य सरकारों के पाले में फैंक दी थी!
एक अनुमान के अनुसार राजस्थान में जमाखोरों, कालाबाजारियों ने राज्य के विभिन्न जिलों में कम के कम तीस हजार करोड़ रूपये के खाद्य पदार्थ गोदामों में जमा कर रखे हैं। हजारों टन गेहूं, ग्वार, चना, चीनी, धनिया, मिर्च, जीरा, दालों के अलावा गरम मसाले जैसे कालीमिर्च, सौंफ, इलायची, नारियल सहित अन्य कमोडिटियां भारी तादाद में जमाखोरों, कालाबाजारियों के गोदामों में जमा है और कृत्रिम रूप से भाव बढ़ा कर उन्हें खुदरा में ऊंचे भावों पर बेचने का सिलसिला जारी है। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार जमाखोरों, कालाबाजारियों की तरफ आंखें उठा कर भी नहीं देख रही है!
सूत्र बताते हैं कि व्यापारियों, जमाखोरों और कालाबाजारियों द्वारा भारी तादाद में ऊंचा किराया देकर गोदामों पर कब्जा कर जिन्सों का गैरकानूनी भण्डारण किया जा रहा है। भारतीय खाद्य निगम के भी कई गोदाम व्यापारियों को किराये पर दिये गये हैं, जबकि एफसीआई और अन्य सरकारी ऐजेंसियों द्वारा किसानों से एकत्रित अनाज खुले में पड़ा है। सरकार इस अनाज को न तो पीडीएस के जरिये आम अवाम को बांट रही है और न ही जमाखोरों से गोदाम खाली करवा कर अनाज का भण्डारण कर रही है! नतीजन हजारों टन अनाज के खराब होने की आशंका पैदा होती जा रही है। वहीं जमाखोरी, कालाबाजारी के चलते अवाम को आम उपभोक्ता वस्तुऐं ऊंची कीमत पर खरीदने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है।
दु:खद स्थिति यह है कि राज्य सरकार द्वारा दैनिक समाचार पत्रों को थोक में जारी किये जा रहे विज्ञापनों के चलते अधिकांश दैनिक समाचार पत्रों ने मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरों को नजरन्दाज करने की नीति अपना रखी है। भारतीय जनता पार्टी भी दिखावे के लिये मंहगाई का रोना रोती है, लेकिन हकीकत यह है कि ये ही कालाबाजारिये, जमाखोर भाजपा और कांग्रेस के लिये चंदे का प्रमुख स्त्रोत हैं, नतीजन भाजपा और कांग्रेस सहित कोई भी बड़ी राजनैतिक पार्टी मंहगाई, जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाने से कतरा रही है।
इधर भ्रष्ट अफसरों और नौकरशाहों की चांदी है! जमाखोरों और कालाबाजारियों पर कार्यवाही नहीं किये जाने के बदले उन्हें मोटी कमाई हो रही है और वे मूछों पर ताव देकर जनता की छाती पर मूंग दल रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कि अगर जमाखोरों, कालाबाजारियों पर सख्त कार्यवाही हो और उनके द्वारा जमा खाद्य पदार्थों को जप्त कर अवाम में सस्ते दामों पर बेचा जाये तो प्रदेश में मंहगाई का ग्राफ 20 से 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
एक अनुमान के अनुसार राजस्थान में जमाखोरों, कालाबाजारियों ने राज्य के विभिन्न जिलों में कम के कम तीस हजार करोड़ रूपये के खाद्य पदार्थ गोदामों में जमा कर रखे हैं। हजारों टन गेहूं, ग्वार, चना, चीनी, धनिया, मिर्च, जीरा, दालों के अलावा गरम मसाले जैसे कालीमिर्च, सौंफ, इलायची, नारियल सहित अन्य कमोडिटियां भारी तादाद में जमाखोरों, कालाबाजारियों के गोदामों में जमा है और कृत्रिम रूप से भाव बढ़ा कर उन्हें खुदरा में ऊंचे भावों पर बेचने का सिलसिला जारी है। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार जमाखोरों, कालाबाजारियों की तरफ आंखें उठा कर भी नहीं देख रही है!
सूत्र बताते हैं कि व्यापारियों, जमाखोरों और कालाबाजारियों द्वारा भारी तादाद में ऊंचा किराया देकर गोदामों पर कब्जा कर जिन्सों का गैरकानूनी भण्डारण किया जा रहा है। भारतीय खाद्य निगम के भी कई गोदाम व्यापारियों को किराये पर दिये गये हैं, जबकि एफसीआई और अन्य सरकारी ऐजेंसियों द्वारा किसानों से एकत्रित अनाज खुले में पड़ा है। सरकार इस अनाज को न तो पीडीएस के जरिये आम अवाम को बांट रही है और न ही जमाखोरों से गोदाम खाली करवा कर अनाज का भण्डारण कर रही है! नतीजन हजारों टन अनाज के खराब होने की आशंका पैदा होती जा रही है। वहीं जमाखोरी, कालाबाजारी के चलते अवाम को आम उपभोक्ता वस्तुऐं ऊंची कीमत पर खरीदने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है।
दु:खद स्थिति यह है कि राज्य सरकार द्वारा दैनिक समाचार पत्रों को थोक में जारी किये जा रहे विज्ञापनों के चलते अधिकांश दैनिक समाचार पत्रों ने मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरों को नजरन्दाज करने की नीति अपना रखी है। भारतीय जनता पार्टी भी दिखावे के लिये मंहगाई का रोना रोती है, लेकिन हकीकत यह है कि ये ही कालाबाजारिये, जमाखोर भाजपा और कांग्रेस के लिये चंदे का प्रमुख स्त्रोत हैं, नतीजन भाजपा और कांग्रेस सहित कोई भी बड़ी राजनैतिक पार्टी मंहगाई, जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाने से कतरा रही है।
इधर भ्रष्ट अफसरों और नौकरशाहों की चांदी है! जमाखोरों और कालाबाजारियों पर कार्यवाही नहीं किये जाने के बदले उन्हें मोटी कमाई हो रही है और वे मूछों पर ताव देकर जनता की छाती पर मूंग दल रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कि अगर जमाखोरों, कालाबाजारियों पर सख्त कार्यवाही हो और उनके द्वारा जमा खाद्य पदार्थों को जप्त कर अवाम में सस्ते दामों पर बेचा जाये तो प्रदेश में मंहगाई का ग्राफ 20 से 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।


