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दुकान मालकिन को मदद करने हेतु नगर निगम के अफसरों ने दिखाया अपना कारनामा!

जयपुर (अग्रगामी) अग्रगामी संदेश के 2 सितम्बर के अंक में भी हमने उजागर किया था कि जिस व्यक्ति का कभी इस दुनिया में अस्तित्व ही नहीं रहा उस व्यक्ति की दुकान को जयपुर नगर निगम के अफसरों और कारिन्दों ने सीज कर दिया था। सीज की गई दुकान की सील खोल कर उस को दुकान सुपूर्द कर दी गई जो उस दुकान का न तो मालिक था और न ही आज है! अब तीसरा अजूबा देखिये कि उस दुकान की असली मालकिन कही जाने वाली महिला ने दुकान को नया रूप दे कर उसमें व्यापार शुरू कर दिया है।
ज्ञातव्य रहे कि जयपुर नगर निगम के हवामहल जोन पूर्व के तत्कालीन आयुक्त मदनन कुमार शर्मा की सरपरस्ती में कनिष्ट अभियन्ता भवन चरण सिंह (अब सहायक अभियन्ता), गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य ने दुकान नम्बर 44, बापू बाजार की मालकिन और एक ठेकेदार इजराइल से सांठगांठ कर दुकान के नीचे तहखाना बनवाने के लिये फाइल को इस तरह घुमाया कि जयपुर नगर निगम की महापौर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगरूप सिंह यादव भी चक्करघन्नी खा जायें!
अग्रगामी संदेश के पास उपलब्ध दस्तावेजों की प्रतियां साफ-साफ दर्शाती है कि बापू बाजार की इस दुकान की मालकिन और ठेकेदार इजराइल से सांठगांठ कर दुकान के नीचे बने तहखाने को भरवाने से रूकवाने हेतु हवामहल जोन पूर्व के तत्कालीन कनिष्ठ अभियन्ता भवन (अब सहायक अभियन्ता) ने अपने सहयोगी गजधर गिरधारी शर्मा और कर्मचारी रामचंद्र मौर्य के साथ मिल कर पहिले इस दुकान को उस व्यक्ति की मिल्कियत बना कर सीज करने की कार्यवाही की, जो कभी इस दुनिया में आया ही नही। फिर इस दुकान की सील खोल कर उसे उस आदमी के सुपुर्द कर दिया जो इस दुकान का मालिक ही नहीं है। हमने जयपुर नगर निगम में बैठे भ्रष्टाचारियों की विस्तृत जानकारी पिछले अंकों में साया की थी।
वर्तमान में सहायक अभियन्ता के पद पर कार्यरत भ्रष्ट अभियन्ता चरण सिंह ने दस्तावेजों में साफ-साफ लिखा है कि इस दुकान के नीचे तहखाने को भरवा कर अनउपयोगी करवा दिया है। लेकिन हकीकत यह है कि चरण सिंह, गिरधारी शर्मा और रामचंद्र मौर्य ने इस दुकान की मालकिन और ठेकेदार इजराइल और उसके मातहत पैटी ठेकेदार से सांठगांठ कर तहखाने को भरवाकर अनउपयोगी करने के बजाय पूरी तरह से तहखाने को बनवा दिया और इनके इस कार्य को पैट्रोनाइज किया तत्कालीन आयुक्त मदन कुमार शर्मा ने। यही नहीं अपनी इस भ्रष्ट करतूत को छुपाने के लिये इन भ्रष्टाचारियों ने सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई सूचना भी जानबूझ कर उपलब्ध नहीं करवाई और अब आवेदक ने सूचना दिलवाने हेतु राज्य सूचना आयोग में अपील दायर कर दी है।
हम अगले अंक में इन भ्रष्टाचारियों की इस मामले में अन्य ताजा तथ्यों से अवाम को अवगत करवायेंगे।

 
AGRAGAMI SANDESH

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