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अवाम चाहता है समग्र क्रांति क्योंकि यह आजादी झूंटी है!

हमारे वतन के राजनेता अपने स्वार्थों की पूर्ति में इतने व्यस्त हैं कि वे अगस्त क्रान्ति दिवस 09 अगस्त को भी भूल गये! 09 अगस्त, 1942 अगस्त क्रान्ति दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिन्द रेडियो पर अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया था और भारत की आजादी के लिये पूरे देश में क्रान्तिकारी जनआंदोलन शुरू हो गया था।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा अगस्त क्रान्ति दिवस के दिन अंग्रेजों भारत छोड़ो के आव्हान को हमारे सफेद और काली टोपीधारी राजनेता शायद भूल गये हैं क्योंकि किसी ने भी 09 अगस्त क्रान्ति दिवस मनाने में कोई रूचि नहीं दिखाई!

इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि 9 अगस्त, 1942 को बंबई (वर्तमान मुंबई) के गांव देवी में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन था। अधिवेशन स्थल पर अरूणा आसिफ अली ने मोहनदास करमचंद गांधी से प्रात: लगभग 9 बजे कहा था कि अंग्रेज अधिवेशन स्थल को घेर कर गिरफ्तारियां करने वाले हैं, लेकिन मोहनदास करमचंद गांाधी ने अरूणा के कथन का मजाक उड़ाया था! लेकिन जब थोड़ी ही देर बाद अंग्रेजों ने अधिवेशन स्थल को घेर कर गिरफ्तारियां दी तो मोहनदास करमचंद गांधी ने भी बिना किसी प्रतिरोध के गिरफ्तारी दे दी और उस ट्रेन में बैठ गये जो उन्हें जेल पहुंचाने के लिये तैयार खड़ी थी, जबकि जयप्रकाश नारायण, अरूणा आसिफ अली और अन्य क्रान्तिकारी अण्डरग्राउण्ड हो गये और अंग्रेज उन्हें नहीं पकड़ पाये।

भारत के अगस्त क्रान्ति दिवस को जवाहरलाल नेहरू से डॉ.मनमोहन सिंह तथा सोनिया गांधी तक इसलिये भूल गये या भुलाते रहे हैं कि वे 14-15 अगस्त की रात में हुए गोरों और कालों के बीच ट्रांसफर ऑफ पावर के कुचक्र से जुडी कडियां हैं। दरअसल वे साबित करना चाहते हैं कि 14-15 अगस्त, 1947 की रात में गोरों द्वारा कालों को किया गया ट्रांसफर ऑफ पावर ही देश की आजादी है, जबकि उनकी कथनी और करनी ने आज तक यही साबित किया है कि वे गोरों (ब्रिटेन और अमरीका) के आज भी ताबेदार हैं।
अगर ऐसा नहीं होता तो जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ.मनमोहन सिंह तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अमरीका/ब्रिटेन द्वारा वाटर बोर्डिग के जरिये यातना देकर उन्हें शहीद करने की घृणित करतूत की उच्च स्तरीय जांच करवाते!

आज हमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस का यह संकल्प याद आता है कि देश को आजाद करवा कर आजादी के बाद भारतीय परिस्थितियों और बातावरण के अनुकूल वैज्ञानिक समाजवाद के जरिये क्रान्तिकारी कार्यक्रम लागू कर देश में बेरोजगारी, जातीय असन्तुलन, गरीब-अमीर के बची की खाई और असमानता को दूर कर गरीब, निम्र मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग की पीड़ा को दूर करने में पूरी ताकत झोंकी जायेगी। देश में कोई भूखा या फिर बेघर नहीं रहेगा।

लेकिन आज डॉ.मनमोहन सिंह सरकार की अमरीकी गुलाम की भूमिका ने अवाम को सोचने-समझने पर मजबूर कर दिया है और अवाम के दिल में गहराई से पैठने लगा है कि यह आजादी झूंटी है-देश की जनता भूखी है!

आवाम आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सपनो और संकल्प का भारत चाहता है और चाहता है, उसे प्राप्त करने के लिये एक समग्र क्रान्ति!

 
AGRAGAMI SANDESH

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