अग्रगामी संदेश हिन्‍दी साप्ताहिक ***** प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित एवं प्रसारित ***** सटीक राजनैतिक विश्लेषण, लोकहित के समाचार, जनसंघर्ष का प्रहरी

खरतरगच्छ अमृत मंथन का अर्थ बनाम अनर्थ अमृत तो मिला नहीं और मंथन के लिये बनी कमेटी!

मालपुरा-टौंक (अग्रगामी) अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की दो दिवसीय अमृत मंथन सभा आखीरकार गत रविवार को फिर से चिंतन करने का फैसला लेकर समाप्त हो गई!

अमृत मंथन सभा जिसे चिंतन शिविर भी कहा गया,  में छह मुद्दों पर मंथन होना बताया जाता है। यह भी कहा जा रहा है कि इस अमृत मंथन सभा में जिन छह मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें सर्वसम्मति बनी बताई जाती है। लेकिन अगर अमृत मंथन (चिंतन शिविर) में भाग लेने वालों की माने तो अमृत मंथन सभा में मंथन के बाद भी अमृत नहीं मिला अलबत्ता इस हेतु विमलचंद सुराना की अध्यक्षता में फिर एक चिंतन कमेटी बना कर मामले को अधरझूल में लटका दिया गया बताया जाता है!

अग्रगामी संदेश ने तो अपने गत 8 जुलाई के अंक में साफ-साफ उजागर कर दिया था कि यह कथित अमृत मंथन बैठक सिर्फ जयपुर के सुराना परिवार के कुशलचंद सुराना या विमलचंद सुराना में से किसी एक को पुनर्वासित करने के लिये ही आयोजित करवाई गई है!
अग्रगामी संदेश को खरतरगच्छ महासंघ के अंदरूनी सूत्रों और खरतरगच्छ जन चेतना मंच से जुड़े प्रबुद्धजनों से मिली विश्वस्त जानकारी के अनुसार सुराना बंधुओं विमलचंद सुराना और कुशलचंद सुराना का जयपुर के खरतरगच्छ संघ पर से सीधा नियन्त्रण खत्म होने के बाद से अब ये लोग येन केन प्रकेरण खरतरगच्छ महासंघ पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं और इनसे जुड़े सूत्रों के अनुसार मंथन हेतु गठित कमेटी का अध्यक्ष पद हथिया कर इन्होंने पहली सीढी पार करली बतायी जाती है!

लेकिन मालपुरा (टौंक) में हुई खरतरगच्छ महासंघ की इस कथित अमृत मंथन सभा (चिंतन शिविर) के चलते महासंघ में आने वाले वक्त में जयपुर खरतरगच्छ संघ की आड़ लेकर जो खेल खेला जाना है, उसकी हकीकत भी अब सीढी दर सीढी उजागर होना शुरू हो गया है।

जयपुर के श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ में, समाज के सदस्यों, श्रावकों में, चेतना का दौर शुरू हो जाने के बाद प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से संघ पर पूरी तरह काबिज होने में आ रही अड़चनों से परेशान सुराना बंधुओं ने खरतरगच्छ महासंघ पर अपना नियन्त्रण बनाने के प्रयास तेज कर दिये थे और इस ही क्रम में मालपुरा (टौंक) में महासंघ की कथित अमृत मंथन सभा (चिंतन शिविर) का आयोजन किया/करवाया गया!

दरअसल खरतरगच्छ समुदाय के सज्जन मण्डल की एक साध्वी और आचार्य जिन कैलाश सागर सूरि जी के आज्ञाधारी कुछ साधुओं के साथ मिल कर सुराना बंधुओं और उनके अन्य पूंजीपति सरमायेदार सहयोगियों ने आचार्य जिन कैलाश सागर सूरिजी के अलावा भी एक अन्य आचार्य पद खरतरगच्छ समुदाय में स्थापित करने की अपनी मुहिम को इस अमृत मंथन सभा के जरिये आगे बढ़ाने की कोशिश की थी लेकिन उनकी समाज तोड़क यह स्कीम परवान नहीं चढी!

ज्ञातव्य रहे कि खरतरगच्छ समुदाय में आचार्य सहित लगभग 40 साधु एवं 259 साध्वियां हैं। साध्वियां विभिन्न मंडलों में विभाजित हैं। पुण्य मण्डल (विचक्षण मण्डल) में सब से ज्यादा 70 साध्वियां हैं, इस के अलावा ज्ञान मण्डल में 61, शिव मण्डल में 49, चम्पा मण्डल में 26, सज्जन मण्डल में 24, प्रमोद मण्डल में 14, पवित्र मण्डल में 7 और अन्य मण्डलों में 8 साध्वियां हैं।
गणनायक सुखसागर जी के समुदाय के 40 साधुओं में से मोहनलाल जी महाराज समुदाय के 5 साधुओं को छोड़ कर 45 साधु आचार्य जिन कैलाश सागर सूरिश्वर जी के समुदाय से जुडे हैं। हालांकि सभी 40 साधु उनके आज्ञानुवर्ति हैं, लेकिन अधिकांश पर गच्छाधिपति का किसी भी स्तर पर कोई नियन्त्रण नहीं है। नतीजन इनके चातुर्मास निर्णयों में गच्छाधिपति की पूरी तरह से अनदेखी की जाती रही है!

इस स्थिति का फायदा उठा कर जयपुर के कुछ पूंजीपतियों ने असन्तुष्ट साधुओं और सज्जन मण्डल की वरिष्ठ साध्वियों के साथ तालमेल बैठाकर खरतरगच्छ संघ में दूसरे आचार्य पद की स्थापना और आचार्य की नियुक्ति की नौटंकी को गतिशील करने की गैरजुम्मेदारान गतिविधियों को अन्जाम देने की कोशिशें शुरू की है।

स्वार्थी पूंजीपतियों, सरमायेदारों और उनके पिछलग्गुओं ने उपाध्याय श्री मणिप्रभ सागर से खरतरगच्छ संघ के द्वितीय आचार्य का पद ग्रहण करने का आग्रह किया बताया जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। नतीजन खरतरगच्छ महासंघ पर अपना नियन्त्रण करने की जुगत बैठाने वालों ने अमृत मंथन सभा के जरिये महासंघ पर कब्जा जमाने का प्रयास किया। हालांकि जो मुद्दे इस अमृत मंथन सभा (चिंतन शिविर) में विचारणीय रहे उनमें से अधिकांश तथा अन्य गम्भीर मुद्दों पर खरतरगच्छ जन चेतना मंच पहिले से ही सक्रिय हो चुका है और मंच के कार्यकर्ता विषयवार, मुद्देवार विस्तृत कार्ययोजना बनाने में जुटे हैं। इस अमृत मंथन बैठक में भी मंच के उन्हीं मुद्दों में से कुछ मुद्दों को अपने तरीके से जोड़तोड़ कर तैयार किया गया है।

अमृत मंथन सभा के गत 4 अगस्त को समापन के बाद मंथन में भाग लेने वाले अधिकांश सहभागियों से जब अग्रगामी संदेश ने शिविर की सार्थकता के बारे में राय जाननी चाही तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हम मालपुरा आये और दादा गुरूदेव के दर्शन हुए यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। बाकी न तो अमृत मंथन में अमृत निकला और न ही चिंतन का कोई नतीजा! संगठन में कमजोर नेतृत्व एवं पूंजीपतियों की बेजा दखलंदाजी ने खरतरगच्छ समुदाय को लगभग तितर-बितर सा कर रखा है।

हम इन सभी मुद्दों पर विवेचना के साथ आगे विस्तार से लिखेंगे। क्रमश:

 
AGRAGAMI SANDESH

AGRAGAMI SANDESH
AGEAGAMI SANDESH

मुख्‍य पृष्‍ठ | जयपुर संस्‍करण | राज्‍य समाचार | देश समाचार | विज्ञापन दर | सम्‍पर्क