
हमने गत 01 जुलाई से श्वेतामबर-दिगम्बर एकता के पाखण्ड की हकीकत को आम अवाम खास कर जैन समुदाय के सामने उजागर करना शुरू किया था। श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता के पाखण्ड, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा तरूण सागर चातुर्मास समिति के कार्यक्रमों में भाग लेने की अफवायें फैला कर भीड़ जुटाने में असफल रहने से हताश मुनि तरूण सागर का आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत से मिलना और अन्य भाजपाई नेताओं का मुनि तरूण सागर के पास पहुंचने के साथ-साथ यह अफवाह भी फैलाई गई कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वसुन्धरा राजे उनकी पुस्तक का विमोचन एसएमएस इन्वेस्टमेंट ग्राउण्ड पर करेंगी। साथ ही यह भी अफवाह फैलाई गई कि गिनिज बुक ऑफ वल्र्ड रेकार्ड में इस पुस्तक का नाम दर्ज करवाने की मशक्कत के क्रम में एक टीम भी आ रही है तथा इस पुस्तक की एक प्रति का विमाचन करने 20 इंच लम्बाई की एक युवती ज्योति आमगे भी आ रही है!
इतने सारे प्रचार और अफवाओं के बीच वसुन्धरा राजे की एक झलक पाने के लिये लोग पहुंच गये पण्डाल में! लेकिन जयपुर की एक कहावत बाबो आवे न ताली बाजे चरितार्थ हो गई! वसुन्धरा राजे को न तो आना था और न ही वे आई! लेकिन उनके नाम से भीड़ जुटाने में आयोजक-प्रयोजक आंशिक रूप से जरूर सफल हो गये। वसुन्धरा राजे के नहीं आने से और कम लम्बाई अर्थात बीस इंच की ज्योति आमगे को देखने के लिये आतुर भीड़ में अफरा-तफरी के माहौल के चलते आनन-फानन में मुनि तरूण सागर ने अपनी पुस्तक कड़वे प्रवचनों का विमोचन मुनि चंद्रप्रभ सागर से करवाया।
ज्ञातव्य रहे कि मुनि तरूण सागर कभी श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता के पाखण्ड के द्वारा तो कभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या वसुन्धरा राजे के आने की सुर्रियां छोड़ कर भीड़ जुटाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन हकीकत उजागर होने के बाद उनके पांडाल में प्रवचन सुनने वाले श्रोताओं की संख्या दिन प्रतिदिन घटती ही जा रही है। गत रविवार को गिनिज बुक ऑफ वर्ड रेकार्ड, वसुन्धरा राजे की सदारत और ज्योति आमगे की उपस्थित को प्रचारित कर भीड़ जुटाने का प्रयास किया गया। गिनिज बुक ऑफ वर्ड रेकार्ड से आम लोगों को कोई लेनादेना नहीं था! वे तो सिर्फ वसुन्धरा राजे ओर ज्योति आमगे की एक झलक और राजे के भाषण को सुनने के लिये पाण्डाल में पहुंचे थे, लेकिन वसुन्धरा राजे के नहीं आने से भीड़ में अफरा तफरी मच गई ओर प्रवचन छोड़ भीड़ ने ज्योति आमगे को देखने के लिये भट्टारक जी की नसियां में तमाशबीनों की भीड़ जमा हो गई और आयोजकों को पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को स्थगित करना पड़ा।

एक वक्त तो तमाशबीनों और प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों के बीच विवाद भी हो गया जिसे बड़ी मुश्किल से सुलझाया गया।
यहां आयोजकों के इंतजामों की कलई खुल गई। मीडियाकर्मी आपने दायीत्वों को निभा रहे थे, जबकि तमाशबीन ज्योति आमगे की एक झलक पाने की जुगत बैठा रहे थे और मीडियाकर्मियों से बदसलूकी करने पर आमादा हो गये।
जैन समुदाय में चातुर्मास व्यक्ति के लिये आध्यात्म और आराधना का ज्वार लेकर आता है और इसमें श्रावक अपने सभी कषायों का त्याग करता है। चार्तुमास में मुनि तरूण सागर के इन लटके-झटकों ने आम जैन श्रावक-श्राविका के दिलों पर वैसे तो गहरा विपरीत प्रभाव डाला है। लेकिन इसके साथ-साथ मुनि तरूण सागर और उनके सहयोगियों की दिगम्बर-श्वेताम्बर एकता के पाखण्ड की कलई भी पूरी तरह खोल कर रख दी है।


