गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमरीकी वीजा देने के मामले में राजनैतिक पार्टियों के नेताओं में हो रही लफ्फाजी बकवास ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। हम मानते हैं कि नरेन्द्र मोदी को वीजा देना या नहीं देना अमरीका का विशेषाधिकार है। लेकिन जो सवाल अवाम के सामने है वह सवाल सीधे-सीधे देश की अस्मिता से जुड़ा है!
अमरीका गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को वीजा इस आधार पर नहीं देना चाहता है कि गुजरात में हुए साम्प्रदायिक दंगों के लिये अमरीका उन्हें दोषी मानता है। गुजरात भारत गणतंत्र का अभिन्न अंग है। गुजरात के दंगों के मामले में जो भी निर्णय लेना है, भारत की जनता और सरकार तथा कानून को लेना है। अमरीका भारत के अन्दरूनी मामले में क्यों चपड़-चों चों कर रहा है? यह समझ से परे है! जब नरेन्द्र मोदी पर भारत के किसी भी प्रदेश में आने-जाने की कोई पाबन्दी नहीं है तो अमरीका ने नरेन्द्र मोदी को वीजा देने पर क्यों पाबन्दी लगाई? भारत के अन्दरूनी मामले को लेकर जिस तरह अमरीका ने दखलंदाजी की है वह देश के स्वाभीमान को चुनौती है। यह सरासर एक संप्रभुत्व राष्ट्र के आन्तरिक मामलों में दखलंदाजी का मामला है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिये!
अमरीका की इस शर्मनाक हरकत से भी गई गुजरी सोच देश के राजनेताओं की है। वे नरेन्द्र मोदी के अमरीकी वीजा प्रकरण को लेकर इस तरह उछलकूद कर रहे हैं, जैसे वे भारत गणतंत्र के नागरिक न हो कर अमरीकी नागरिक हों! इन निहायत खुदगर्ज नेताओं की समझ में यह क्यों नहीं आ रहा है कि अमरीका गैरजुम्मेदारान तरीके से भारत के अन्दरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है। आज नरेन्द्र मोदी प्रकरण हो या फिर तमिलनाडू में रूसी परमाणु संयन्त्र का मामला हो, अमरीका गैरजुम्मेदारान तरीके से हमारे देश के अन्दरूनी मामलों में बेजा दखलंदाजी कर रहा है। लेकिन हमारे देश के राजनेताओं की बेशर्मी देखिये कि कोई भी अमरीका के खिलाफ बोलने को तैयार ही नहीं है!
हमें मोदी के पक्ष या विरोध से कोई लेना-देना नहीं है। नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी दोनों ही अमरीका में बस जायें तो भी किसी को कोई ऐतराज नहीं होगा। बस ऐतराज है तो देश के अन्दरूनी मामलों में अमरीकी दखलंदाजी का! इसका सख्ती से विरोध होना चाहिये वर्ना हमारा भी हश्र रूस, अफगानिस्तान, लीबिया, ईराक या फिर पाकिस्तान जैसा ही होना है। क्या इसके लिये देश की जनता तैयार है? यह एक विचारणीय प्रश्र है!
अमरीका गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को वीजा इस आधार पर नहीं देना चाहता है कि गुजरात में हुए साम्प्रदायिक दंगों के लिये अमरीका उन्हें दोषी मानता है। गुजरात भारत गणतंत्र का अभिन्न अंग है। गुजरात के दंगों के मामले में जो भी निर्णय लेना है, भारत की जनता और सरकार तथा कानून को लेना है। अमरीका भारत के अन्दरूनी मामले में क्यों चपड़-चों चों कर रहा है? यह समझ से परे है! जब नरेन्द्र मोदी पर भारत के किसी भी प्रदेश में आने-जाने की कोई पाबन्दी नहीं है तो अमरीका ने नरेन्द्र मोदी को वीजा देने पर क्यों पाबन्दी लगाई? भारत के अन्दरूनी मामले को लेकर जिस तरह अमरीका ने दखलंदाजी की है वह देश के स्वाभीमान को चुनौती है। यह सरासर एक संप्रभुत्व राष्ट्र के आन्तरिक मामलों में दखलंदाजी का मामला है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिये!
अमरीका की इस शर्मनाक हरकत से भी गई गुजरी सोच देश के राजनेताओं की है। वे नरेन्द्र मोदी के अमरीकी वीजा प्रकरण को लेकर इस तरह उछलकूद कर रहे हैं, जैसे वे भारत गणतंत्र के नागरिक न हो कर अमरीकी नागरिक हों! इन निहायत खुदगर्ज नेताओं की समझ में यह क्यों नहीं आ रहा है कि अमरीका गैरजुम्मेदारान तरीके से भारत के अन्दरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है। आज नरेन्द्र मोदी प्रकरण हो या फिर तमिलनाडू में रूसी परमाणु संयन्त्र का मामला हो, अमरीका गैरजुम्मेदारान तरीके से हमारे देश के अन्दरूनी मामलों में बेजा दखलंदाजी कर रहा है। लेकिन हमारे देश के राजनेताओं की बेशर्मी देखिये कि कोई भी अमरीका के खिलाफ बोलने को तैयार ही नहीं है!
हमें मोदी के पक्ष या विरोध से कोई लेना-देना नहीं है। नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी दोनों ही अमरीका में बस जायें तो भी किसी को कोई ऐतराज नहीं होगा। बस ऐतराज है तो देश के अन्दरूनी मामलों में अमरीकी दखलंदाजी का! इसका सख्ती से विरोध होना चाहिये वर्ना हमारा भी हश्र रूस, अफगानिस्तान, लीबिया, ईराक या फिर पाकिस्तान जैसा ही होना है। क्या इसके लिये देश की जनता तैयार है? यह एक विचारणीय प्रश्र है!


