जयपुर (अग्रगामी) श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता के हंगामेदार प्रचार के बाद गत रविवार को चातुर्मास प्रारम्भ होने के क्रम में घट स्थापना के बाद एसएमएस इन्वेस्टमैंट ग्राउण्ड पर बने वाटरफ्रूफ पांडाल में मुनि ललितप्रभ सागर और मुनि चंद्रप्रभ सागर के साथ मुनि तरूण सागर के प्रवचनों के दौरान समग्र जैन एकता का कोई अतापता नहीं था। प्रवचन मंच पर लगाये गये बैनर पर चातुर्मास-2013 कड़वे प्रवचन-दिव्य सत्संग लिखा था, वहीं प्रवचन सुनने आये श्रद्धालुओं में श्वेताम्बर समाज के इक्के-दुक्के लोग ही नजर आये। आयोजन के सहभागी श्वेताम्बर समाज के एक घटक श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के संघमंत्री को छोड़ कर संघ के अधिकांश पदाधिकारी और सदस्यों ने इस वनमैन शो से किनारा कर लिया। स्थानकवासी, तेरापंथी तथा मंदिरमार्गियों में से तपागच्छ, खरतरगच्छ और श्रीमाल सभा सहित जवाहर नगर, मालवीय नगर, श्याम नगर, प्रताप नगर श्वेताम्बर संघों के समाज बंधु भी इस कार्यक्रम से दूर ही रहे।
श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता की आड़ में जुटाई गई भीड़ आश्चर्य से मंच के ऊपर एवं इर्दगिर्द हथियार बंद पुलिस की चाकचौबन्द भंगिमा को देख रही थी। लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि राज्य की राजधानी जयपुर के श्वेताम्बर एवं दिगम्बर घटाकों के लगभग एक सौ के आसपास धार्मिक स्थलों में चातुर्मास प्रारम्भ से सम्बन्धित कार्यक्रम हो रहे हैं। दिगम्बर जैन आचार्य सुधर्म सागर, आचार्य पारस सागर, ऐलाचार्य नवीन सागर, बालाचार्य सिद्धसेन, मुनि सुरेश कुमार सहित काफी तादाद में साधु-साध्वियां, आर्यिका व श्रमणियां विभिन्न धर्म स्थलों में चातुर्मास प्रावचन कर रहे है, लेकिन एक भी प्रवचन स्थल के अंदर सशस्त्र पुलिस बल की नियुक्ति की आवश्यकता न तो महसूस की गई और न ही नियुक्त की गई।
अब सवाल उठता है कि कड़वे प्रवचन और दिव्य सत्संग के आयोजकों और प्रवचनकर्ताओं को प्रवचन स्थल पर सशस्त्र पुलिस बल की नियुक्ति की आवश्यकता आखीर क्यों आन पड़ी? क्या कोई हमले की आशंका थी, तो पुलिस के पास एसओजी और एटीएस के दस्ते मौजूद हैं किसी हमलावर कार्यवाही का मुकाबला करने हेतु! सवाल यह भी उठता है कि प्रवचन स्थल पर वर्दीधारी सशस्त्र पुलिस बल क्या इस लिये नियुक्त किया या करवाया गया कि प्रवचन सुनने आये साधर्मी बन्धुओं से कोई खतरा महसूस किया गया हो? या फिर यह मात्र अपने स्टेटस् या रूतबा दिखाने के लिये नियुक्त करवाये गये हों! अब यह तो कार्यक्रम के आयोजक और प्रवचनकर्ता ही बता सकते हैं कि असली राग क्या है? लेकिन धार्मिक प्रवचन स्थलों पर वर्दीधारी सशस्त्र पुलिसकर्मियों की नियुक्त करना या करवाना जैन संस्कृति और जैन धर्म के स्थापित नियमों-आचरणों के प्रतिकूल तो हैं ही, इससे हमारे तीर्थंकरों के द्वारा स्थापित नियमों, सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह और अस्तेय की भी अवमानना होती है! यह कम से कम हमारे प्रबुद्ध प्रवचनकर्ताओं को तो अच्छी तरह समझ लेना चाहिये!
श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता की आड़ में जुटाई गई भीड़ आश्चर्य से मंच के ऊपर एवं इर्दगिर्द हथियार बंद पुलिस की चाकचौबन्द भंगिमा को देख रही थी। लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि राज्य की राजधानी जयपुर के श्वेताम्बर एवं दिगम्बर घटाकों के लगभग एक सौ के आसपास धार्मिक स्थलों में चातुर्मास प्रारम्भ से सम्बन्धित कार्यक्रम हो रहे हैं। दिगम्बर जैन आचार्य सुधर्म सागर, आचार्य पारस सागर, ऐलाचार्य नवीन सागर, बालाचार्य सिद्धसेन, मुनि सुरेश कुमार सहित काफी तादाद में साधु-साध्वियां, आर्यिका व श्रमणियां विभिन्न धर्म स्थलों में चातुर्मास प्रावचन कर रहे है, लेकिन एक भी प्रवचन स्थल के अंदर सशस्त्र पुलिस बल की नियुक्ति की आवश्यकता न तो महसूस की गई और न ही नियुक्त की गई।
अब सवाल उठता है कि कड़वे प्रवचन और दिव्य सत्संग के आयोजकों और प्रवचनकर्ताओं को प्रवचन स्थल पर सशस्त्र पुलिस बल की नियुक्ति की आवश्यकता आखीर क्यों आन पड़ी? क्या कोई हमले की आशंका थी, तो पुलिस के पास एसओजी और एटीएस के दस्ते मौजूद हैं किसी हमलावर कार्यवाही का मुकाबला करने हेतु! सवाल यह भी उठता है कि प्रवचन स्थल पर वर्दीधारी सशस्त्र पुलिस बल क्या इस लिये नियुक्त किया या करवाया गया कि प्रवचन सुनने आये साधर्मी बन्धुओं से कोई खतरा महसूस किया गया हो? या फिर यह मात्र अपने स्टेटस् या रूतबा दिखाने के लिये नियुक्त करवाये गये हों! अब यह तो कार्यक्रम के आयोजक और प्रवचनकर्ता ही बता सकते हैं कि असली राग क्या है? लेकिन धार्मिक प्रवचन स्थलों पर वर्दीधारी सशस्त्र पुलिसकर्मियों की नियुक्त करना या करवाना जैन संस्कृति और जैन धर्म के स्थापित नियमों-आचरणों के प्रतिकूल तो हैं ही, इससे हमारे तीर्थंकरों के द्वारा स्थापित नियमों, सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह और अस्तेय की भी अवमानना होती है! यह कम से कम हमारे प्रबुद्ध प्रवचनकर्ताओं को तो अच्छी तरह समझ लेना चाहिये!


