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जैन समाज की एकता के दावों की निकली हवा!-3

जयपुर (अग्रगामी) जैसा कि हमने पूर्व में बताया था कि दिगम्बर-श्वेताम्बर जैन एकता के पाखण्ड का जितने जोर-शोर से ढिंढोरा पीटा जा रहा है उतनी ही तेजी से उसकी असलियत की परतें परत-दर-परत खुलती ही जा रही है।

सकल जैन समाज जयपुर मोबाइल नम्बर 9887514131 और 9983314422 को निवेदक बताते हुए दिनांक 21 जुलाई से 01 सितम्बर तक महोपाध्याय ललितप्रभ सागर, मुनि तरूण सागर और मुनि चंद्रप्रभ सागर के एसएमएस इन्वेस्टमेंट ग्राउण्ड पर होने वाले प्रवचनों से सम्बन्धित जारी कार्यक्रम में 21 जुलाई से 1 सितम्बर तक 41 दिन होने वाले प्रवचनों से कहीं भी जैन एकता से सम्बन्धित कोई भी विषय प्रवचन कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है! सिर्फ प्रवचनों के समापन के अंतिम दो दिनों में आखीर कब तक बटें रहेंगे हम और सर्वधर्म सम्मेलन कार्यक्रम रखे गये हैं। आयोजकों के इस कार्यक्रम विवरण में भी श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता की बांग केवल कुछ हजार लोगों की बैठक क्षमता के वाटरफ्रूफ पांडाल में दर्शकों की भीड़ जुटाने के लिये किया जा रहा पाखण्ड है।

एक मीडियाकर्मी के दावे से गम्भीर तथ्य भी उजागर हुआ है! वह भी इस कथित श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता के पाखण्ड की कलई खोलता है। इन मीडिया (कर्मी) जी ने दावा किया है कि उन्होंने मुनीश्री तरूण सागर चातुर्मास समिति जयपुर के संयोजक माणक काला की एक बिल्डर सूरज नवलखा से मुलाकात करवाई! इन मीडिया जी का दावा है कि तब तक माणक काला अंधेरे में हाथ-पांव चला रहे थे। इन मीडियाकर्मी जी का दावा है कि इसके बाद जुड़े खरतरगच्छ संघमंत्री ज्योति कोठारी और जैन एकता की गंगा तेजी से प्रवाहित होने लगी! अग्रगामी संदेश के सम्पादक हीराचंद जैन इस दावे की हकीकत तलाशने में जुटे हैं।

अगर इन मीडियाकर्मी जी की बात मान ली जाये तो यह साफ हो जायेगा कि श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता का यह पाखण्ड माणक काला, मीडियाकर्मी, बिल्डर सूरज नवलखा (जिनका नाम मीडियाकर्मी ने अपने प्रकाशन में उजागर किया है) और ज्योति कोठारी का आयोजन है और इससे यह भी साफ हो जाता है कि इस पाखण्ड में दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों ही समूहों के समाज शामिल नहीं है और न ही वे किसी तरह की कोई शिरकत कर रहे हैं। वैसे धरातलीय स्थिति भी यही है कि दिगम्बर या श्वेताम्बर किसी समाज का कोई प्रत्यक्ष सहयोग श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता के पाखण्ड में नजर नहीं आ रहा है।

दिगम्बर-श्वेताम्बर एकता की बांग देने वालों से एक सवाल यह भी पूछा जा सकता है कि अखबारों में जो विज्ञापन दिया जा रहा है उस विज्ञापन की हकीकत क्या है?

सकल जैन समाज जयपुर के नाम से समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों में एन.के.सेठी को अध्यक्ष, माणक काला को संयोजक और महेन्द्र सुराणा को सकल जैन समाज के मंत्री के रूप में दर्शाया गया है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि सकल जैन समाज जयपुर नाम की संस्था का जयपुर में कोई अस्तित्व ही नहीं है। वहीं एन.के.सेठी, माणक काला और महेन्द्र सुराणा तो मुनि श्री तरूण सागर जी चातुर्मास समिति के क्रमश: अध्यक्ष, संयोजक और महामंत्री हैं। ये लोग किस आधार पर सकल जैन समाज के अध्यक्ष, संयोजक और महामंत्री बन गये? बतायेंगे सेठी साहब और माणक काला! क्या, इस ही तरह के गुमनाम संगठनों के जरिये श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता का गुब्बारा फुलाया जायेगा? हमारे इस कथन की पुष्टि तो इस कथित एकता के लिये पूर्व में इन्हीं तीनों पदाधिकारियों के नाम से जारी विज्ञापन से हो जाती है, जिसमें इन्हें मुनि तरूण सागर चातुर्मास समिति के पदाधिकारी के रूप में दर्शाया गया है। साथ ही आमन्त्रण की एक प्रति हमारे पास उपलब्ध है जिसमें भी इन्हें मुनि श्री तरूण सागर जी चातुर्मास समिति जयपुर का पदाधिकारी दर्शाया गया है। अब संयोजक माणक काला एवं अन्य पदाधिकारी और प्रवक्ता बतायें हकीकत क्या है?

एक ओर अत्यन्त गम्भीर सवाल है कि जयपुर जिले में ही दिगम्बर जैनाचार्य सुधर्म सागर, आचार्य पारस सागर, ऐचायार्य नवीन सागर, बालाचार्य सिद्धसेन का भी वर्षवास (चातुर्मास) है। इन्हें मुनि तरूण सागर, महोपाध्याय ललितप्रभ सागर, मुनि चंद्रप्रभ सागर के श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता के इस कथित कार्यक्रम में क्यों शामिल नहीं किया गया? जहां तक हमारी जानकारी है, इनमें से सभी मुनि तरूण सागर से वरिष्ठ हैं, अत: अगर श्वेताम्बर-दिगम्बर एकता की वास्तव में कोई पहल होती तो इन्हें शामिल किया जाना आवश्यक था! ऐसी हालत में कथित एकता का पाखण्ड ही उजागर होता है। जो लोग सकल दिगम्बर जैन समुदाय को एक सूत्र में पिरोने में अक्षम हों वे कैसे श्वेताम्बर-दिगम्बर जैन एकता का दावा कर सकते हैं!

उधर श्वेताम्बर समुदाय के स्थानकवासी मान्यता से जुडे तीनों समाजों, तेरापंथी समाज, मंदिर आम्राय को मानने वाले तपागच्छ संघ, श्रीमाल सभा, अचलगच्छ समाज के संगठनों में से एक भी संगठन इस कथित एकता के पक्ष में एकजुट नहीं है। श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के अधिकांश बुद्धिजीवियों ने पहिले ही किनारा कर लिया था और अब प्रबुद्ध समाज सेवियों और आम समाज बंधुओं ने भी पूरी तरह किनारा कर लिया है। कुछ पदाधिकारी आम समाज की भावनाओं को नजरन्दाज कर अपने पद का दुरूपयोग कर अपने निजी स्वार्थों के चलते दिगम्बर-श्वेताम्बर एकता की पूंगी बजा रहे हैं। उनके दिमाग में यही है कि पांडाल में भीड़ मुनि तरूण सागर के सिपहसालार जुटा लेंगे और वाहवाही वे बटोरेंगे! हकीकत तो आगे वक्त ही बतायेगा। क्रमश:

 
AGRAGAMI SANDESH

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