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जयपुर के ई-मित्र कियोस्कधारकों की भामाशाह योजना ने बढ़ाई परेशानियां!-2

जयपुर (अग्रगामी) राज्य में जोरशोर से शुरू की गई भामाशाह योजना अब अफसरों की लापरवाही से दम तोड़ती नजर आ रही है। स्थानीय निकायों में कैम्प लगा कर भरे गये नामांकनों में भारी कमियों के चलते अब निकायों ने भामाशाह कैम्प लगाने ही कम कर दिये हैं। वहीं इन कैम्पों की गलतियों को ठीक करने का सारा काम अब ई-मित्र कियोस्कधाराकों पर थोप दिया गया है। जबकि सुविधाओं के नाम पर ठेंगा दिखाया जा रहा है।
कियोस्कधारकों की माने तो पहले इस योजना के तहत भामाशाह नामांकन के सभी आवेदनों को कियोस्क स्तर पर ही प्रशासन के अधिकारी सत्यापित कर मूल दस्तावेज अपने साथ ले जाने के आदेश थे। लेकिन जब कियास्कधाराकों ने नामांकन करने शुरू कर दिये तो प्रशासन ने आदेश जारी कर दिया कि मूल नामांकन आवेदनों को कियोस्कधारक प्रशासन के पास जमा करवाये।
अब कियास्कधाराकों के सामने अपने कमीशन की भी समस्या पैदा हो गई है। क्योंकि नामांकन करने के बाद दस्तावेजों को अपलोड करने के बाद भी अभी तक उनका सत्यापन तक नहीं हो पा रहा है। पहले दस्तावेज अपलोड नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन यह कार्य भी अतिरिक्त करना अब कियोस्कधाराकों की मजबूरी होता जा रहा है और अपलोड नहीं किया तो कियोस्क को बंद करने की प्रशासन लगातार चेतावनी जारी कर रहा है।
कियोस्कधारकों का कहना है कि भामाशाह योजना की तरह अब राशनकार्ड के आवेदनों के सत्यापन में भी काफी समय लग रहा है। एक कियोस्कधारक ने उदाहरण दिया कि पिछले पंद्रह दिन सेे नाम में त्रुटि सुधार आवेदन पर कार्य नहीं हो रहा है जबकि तीन दिन में सत्यापन की बात करने वाले प्रशासन ने अभी तक इसे जारी नहीं किया है। यह आवेदन पिछले पंद्रह दिनों से त्रुटि सुधार का इंतजार कर रहा है।
एकल कियोस्कधारकों का साफ-साफ कहना है कि वे मतदाताओं के आवेदन-राशन कार्ड का कार्य करें, बैंक के चक्कर लगायें, बिजली-पानी आदि के बिल जमा करें या मूल दस्तावेजों को जमा कराने के लिये प्रशासन के चक्कर लगायें। इससे तो बेहतर है कि वे इस तरह का कार्य ही नहीं करें जिससे उनको अपना कियोस्क छोड़ कर सरकारी अफसरों का चक्कर लगाना पड़े।
एक अन्य कियोस्कधारक ने बताया कि कियोस्क को अब कम्प्युटर प्रशिक्षण का कार्य भी करने के लिये प्रशासन ने जुम्मेदारी डाल दी है। वहीं भामाशाह, राशन कार्ड आदि का कार्य नहीं करने पर कियोस्क को ही बंद करने के लिये प्रशासन लगातार मेल और एसएमएस कर रहा है।
आम अवाम का कहना है कि कियोस्कधारक अपने कियोस्क पर समय पर बैठ कर बिल जमा करने से लेकर सभी कार्य करते हैं। लेकिन जब वे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगायेंगे तो बाकी का काम कौन करेगा? ऐसे में अवाम को कियोस्क दर कियोस्क भटक ना पड़ेगा और देखना होगा कि कियोस्क कब खुलते है?
ज्ञातव्य रहे कि अब कियोस्कधारकों को वरिष्ठ नागरिकों के लिये जिंदा होने का प्रमाण पत्र भी बनाने का कार्य दिया गया है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी अब वरिष्ठ नागरिकों को ही उठानी पड़ सकती है। क्योंकि मजबूर कियोस्कधारकों को अन्य कार्य पहले करने होंगे और नये कार्य के लिये वे किनारा करेंगे फिर अन्य समय पर आने को कहना पड़ेगा। ऐसे में सरकारी योजनाओं को सुविधा के लिये ई-मित्र पर दिया गया है, लेकिन यह योजना ही कियोस्कधारकों की जी का जंजाल बनती जा रही हैं और प्रशासन अपने आश्वासनों को बदल कर अपनी जुम्मेदारियों से दूर भाग रहा है।
आज ई-मित्र कियोस्कधारकों की सबसे बड़ी समस्या यही है कि वे कियोस्क छोड़ कर जा नहीं सकता और प्रशासन उसे कियोस्क छोडऩे पर मजबूर कर रहा है! ओर मजबूर कर रहा है सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को। देखना यही है कि प्रशासन और सरकार कब तक समस्याओं का समाधान करते हैं? करते भी हैं या नहीं!

 
AGRAGAMI SANDESH

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